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भारत की 2047 वाली तैयारी ने पाकिस्तान को डरा दिया! पाकिस्तानी एक्सपर्ट बोला- बस भारत से मामला खराब न हो



नई दिल्ली: 15 अगस्त भारत और पाकिस्तान दोनों के इतिहास में बेहद अहम तारीख है। वर्ष 1947 में इसी दौर में ब्रिटिश शासन से आजादी मिली, लेकिन आजादी के साथ भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन भी हुआ। इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे। कश्मीर विवाद, युद्ध, सीमा संघर्ष और आतंकवाद ने भारत-पाकिस्तान रिश्तों को कई दशकों तक प्रभावित किया है।

आज स्थिति यह है कि दोनों परमाणु हथियार संपन्न देश अपनी-अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार आधुनिक बनाने में जुटे हैं। खासकर 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के रक्षा बजट, सैन्य आधुनिकीकरण और स्वदेशी हथियार उत्पादन पर पाकिस्तान में भी गंभीर चर्चा हो रही है। पाकिस्तान के रक्षा मामलों के विश्लेषक कमर चीमा ने भारत की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति को लेकर चिंता जताई है और यहां तक कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध खराब न हों, यही बेहतर होगा।

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के बजट अनुमान से 15.19 प्रतिशत अधिक है। इसमें रक्षा पूंजीगत खर्च के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान है।

आजादी के साथ शुरू हुआ था बंटवारे का दर्द

1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने के साथ भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान एक अलग देश के रूप में अस्तित्व में आया। विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा और विस्थापन हुआ। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में सबसे बड़ा विवाद जम्मू-कश्मीर को लेकर रहा।

आजादी के बाद दोनों देशों के बीच कई युद्ध और सैन्य टकराव हुए। 1965 और 1971 के युद्धों ने दोनों देशों के संबंधों को और ज्यादा प्रभावित किया। 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ और पाकिस्तान को बड़ा रणनीतिक झटका लगा।

इसके बाद भी कश्मीर विवाद खत्म नहीं हुआ। सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ के आरोप भारत-पाकिस्तान संबंधों में लगातार तनाव का कारण बने रहे।

कारगिल से लेकर आतंकवाद तक

1999 का कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष का एक और बड़ा अध्याय था। भारतीय सेना ने ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर किया।

इसके बाद पाकिस्तान की रणनीति में आतंकवाद का मुद्दा और ज्यादा प्रमुख हो गया। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। मुंबई, दिल्ली, पठानकोट और उरी जैसे आतंकी हमलों ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद तनावपूर्ण बनाया।

2016 में उरी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की। इसके बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की। इन घटनाओं के बाद भारत की नीति में यह संदेश स्पष्ट दिखाई दिया कि सीमा पार आतंकवादी हमलों का जवाब केवल कूटनीतिक स्तर पर नहीं दिया जाएगा।

पहलगाम हमले के बाद आया ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई। भारत ने इसके बाद पाकिस्तान स्थित और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय सरकारी विवरण के अनुसार 7-8 मई 2025 की रात नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव तेजी से बढ़ा और भारत-पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक ड्रोन, मिसाइल और सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनी रही।

10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच बातचीत के बाद जमीन, हवा और समुद्र में सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने उस समय इसकी पुष्टि की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को समाप्त नहीं माना गया है और भारत भविष्य में किसी भी आतंकी हमले का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा।

अब पाकिस्तान को क्यों सता रही भारत की सैन्य ताकत?

यही वह सवाल है जिसने पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषकों की चिंता बढ़ाई है। पाकिस्तान के रक्षा मामलों के विश्लेषक कमर चीमा ने भारत के सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।

उनके अनुसार भारत केवल तत्काल सैन्य जरूरतों पर काम नहीं कर रहा, बल्कि लंबी अवधि की सैन्य क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की रणनीति में आधुनिक विमान, मिसाइल, युद्धपोत, पनडुब्बियां, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और स्वदेशी रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

चीमा का तर्क है कि यदि भारत लंबे समय तक किसी बड़े सुरक्षा संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहता है तो उसे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करनी होगी। इसी वजह से भारत का आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पाकिस्तान के लिए विशेष चिंता का विषय बन रहा है।

भारत का रक्षा बजट बना बड़ा संकेत

वित्त वर्ष 2026-27 का रक्षा बजट पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह पिछले बजट अनुमान की तुलना में 15.19 प्रतिशत की वृद्धि है।

रक्षा पूंजीगत खर्च के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक रखे गए हैं। सरकार के अनुसार घरेलू रक्षा उद्योग से खरीद बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये घरेलू रक्षा उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं।

यानी भारत केवल हथियार खरीदने पर ही पैसा खर्च नहीं कर रहा, बल्कि देश में हथियार और सैन्य तकनीक विकसित करने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

तेजस, ब्रह्मोस और पिनाका पर बढ़ा जोर

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता में तेजस लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसे हथियार महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

तेजस के उत्पादन और खरीद को लेकर भी भारत ने बड़े फैसले किए हैं। उपलब्ध रक्षा एवं उद्योग संबंधी रिपोर्टों के अनुसार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास 180 तेजस विमानों के ऑर्डर हैं, जिनकी कुल कीमत 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

भारत के लिए इसका महत्व केवल लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। स्वदेशी विमान उत्पादन से लंबे समय में रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी आत्मनिर्भरता में भी फायदा हो सकता है।

परमाणु ताकत को लेकर भी बदला समीकरण

भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार रखने वाले देश हैं। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का जोखिम केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रहता।

जून 2026 में प्रकाशित SIPRI Yearbook 2026 के अनुसार भारत के परमाणु हथियारों का कुल अनुमानित भंडार जनवरी 2026 में करीब 190 था। रिपोर्ट में पहली बार भारत के लगभग 12 परमाणु हथियारों को ‘deployed’ स्थिति में होने का आकलन किया गया। हालांकि भारत के परमाणु हथियारों की वास्तविक तैनाती संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और SIPRI का आकलन खुले स्रोतों पर आधारित है।

SIPRI के आकलन के मुताबिक भारत की परमाणु क्षमता जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों वाली परमाणु त्रिस्तरीय क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

यह पाकिस्तान के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव से दोनों देशों के रणनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

पाकिस्तान ने भी बदले रणनीतिक समीकरण

भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता के बीच पाकिस्तान भी अपने सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने Strategic Mutual Defense Agreement पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों देशों ने कहा था कि एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा।

इसके बाद अगस्त 2026 में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने Mecca Joint Defence Agreement पर हस्ताक्षर किए। तुर्किये के अनुसार इस समझौते में भी सामूहिक रक्षा का प्रावधान है और किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

हालांकि पाकिस्तान और उसके सहयोगी इस समझौते को रक्षात्मक बताते हैं। इसलिए इसे सीधे भारत के खिलाफ गठबंधन कहना सही नहीं होगा।

चीन पर पाकिस्तान की निर्भरता भी बड़ी चुनौती

पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में चीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन और अन्य रक्षा प्रणालियों में चीनी तकनीक और उपकरणों की बड़ी हिस्सेदारी है।

यही कारण है कि पाकिस्तान के लिए भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता बढ़ना एक अतिरिक्त चुनौती माना जा सकता है। अगर भारत आने वाले वर्षों में अधिक हथियार और सैन्य प्लेटफॉर्म देश में ही बनाने लगता है तो लंबे संघर्ष की स्थिति में उसकी आपूर्ति क्षमता मजबूत हो सकती है।

‘भारत से रिश्ते खराब न हों’ क्यों कहा जा रहा?

कमर चीमा की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि वह भारत के साथ संबंध खराब न होने की बात करते हैं। उनके तर्क में भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और लंबे समय की रक्षा रणनीति को लेकर चिंता दिखाई देती है।

भारत की मौजूदा नीति में रक्षा आधुनिकीकरण के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादन, तकनीकी क्षमता और सैन्य तैयारी पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के रणनीतिक विश्लेषकों के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि आने वाले वर्षों में भारत की सैन्य क्षमता आज की तुलना में काफी अलग हो सकती है।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होना तय है। सैन्य क्षमता बढ़ाना कई देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा होता है और परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसी देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य संघर्ष को रोकना और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना ही होना चाहिए।

आने वाले सालों में क्या होगा?

भारत-पाकिस्तान संबंधों का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा—सीमा पर स्थिति, आतंकवाद, कश्मीर, दोनों देशों की राजनीतिक परिस्थितियां, सैन्य आधुनिकीकरण और कूटनीतिक संबंध।

एक तरफ भारत तेजी से स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आधुनिक सैन्य तकनीक की ओर बढ़ रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान चीन, सऊदी अरब और तुर्किये जैसे देशों के साथ अपने रणनीतिक रिश्ते मजबूत कर रहा है।

ऐसे माहौल में दोनों देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सैन्य ताकत बढ़ाने के साथ-साथ संघर्ष को नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी संवाद और संकट प्रबंधन के रास्ते भी खुले रहें।

फिलहाल कमर चीमा की टिप्पणी यह संकेत देती है कि भारत का बढ़ता रक्षा बजट और सैन्य आधुनिकीकरण पाकिस्तान में गंभीरता से देखा जा रहा है। भारत की तरफ से 2026-27 में रिकॉर्ड रक्षा बजट और घरेलू उत्पादन पर जोर आने वाले वर्षों की दिशा को स्पष्ट करता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच सात दशक से अधिक पुराने तनाव के बीच अब सैन्य शक्ति का मुकाबला एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अब ड्रोन, साइबर युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, अंतरिक्ष और स्वदेशी रक्षा उत्पादन भी रणनीतिक शक्ति के अहम हिस्से बन रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की चिंता केवल आज की भारतीय सेना को लेकर नहीं, बल्कि 2030 और 2047 तक भारत किस स्तर की सैन्य आत्मनिर्भरता हासिल कर लेगा, इसे लेकर भी दिखाई देती है।

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