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IIT दिल्ली में छात्र की मौत के बाद उबाल, हॉस्टल और प्रोजेक्ट को लेकर उठे सवाल; छात्रों ने मांगा 1 करोड़ मुआवजा

 


नई दिल्ली स्थित IIT दिल्ली में MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। 22 अगस्त 2026 को लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद ऋषिकेश की मौत हो गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने की बात कही गई है। घटना के बाद छात्रों ने सोमवार को कैंपस में प्रदर्शन किया और संस्थान के प्रशासनिक रवैये को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

छात्र संगठनों का आरोप है कि ऋषिकेश को हॉस्टल आवंटन, मेडिकल प्रमाणपत्र और अकादमिक प्रोजेक्ट से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं ने उनकी स्थिति को और कठिन बना दिया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी बाकी है और यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रशासनिक फैसलों ने सीधे तौर पर छात्र की मौत में भूमिका निभाई।

मौत के बाद कैंपस में प्रदर्शन

ऋषिकेश की मौत के दो दिन बाद छात्रों ने IIT दिल्ली परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के पास जुटकर स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार की मांग की।

प्रदर्शन के चलते सोमवार को IIT दिल्ली में कक्षाएं भी निलंबित कर दी गईं। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के निदेशक रंजन बनर्जी से मुलाकात कर अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन सौंपा। रिपोर्ट के मुताबिक, निदेशक ने मांग-पत्र प्राप्त किया और उस पर हस्ताक्षर भी किए।

छात्रों का कहना है कि मामले की जांच केवल व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य के नजरिए से नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, ऋषिकेश की मौत से पहले सामने आई हॉस्टल, पढ़ाई, रिसर्च प्रोजेक्ट और प्रशासनिक परेशानियों की भी स्वतंत्र जांच जरूरी है।

हॉस्टल को लेकर क्या आरोप हैं?

प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक ऋषिकेश पहले IIT दिल्ली के हॉस्टल में रह रहे थे। बाद में उन्हें कैंपस में हॉस्टल नहीं मिल पाया और उन्हें कैंपस के बाहर रहना पड़ा।

Careers360 की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने दावा किया कि शैक्षणिक सत्र के दौरान हॉस्टल की पहली सूची में ऋषिकेश का नाम था, लेकिन बाद की सूची में नाम हटा दिया गया। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल आवंटन के लिए मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया में उन्हें कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कोई छात्र पहले से व्यक्तिगत या स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से गुजर रहा हो तो ऐसी लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया उसके लिए अतिरिक्त तनाव पैदा कर सकती है। हालांकि, हॉस्टल न मिलने की पूरी वजह और संस्थान के नियमों के अनुसार उस फैसले की वैधता जांच का विषय है।

IIT दिल्ली की Student Affairs व्यवस्था में हॉस्टल, काउंसलिंग और छात्र सहायता से जुड़े संसाधन मौजूद हैं।

रिसर्च प्रोजेक्ट को लेकर भी सवाल

छात्रों ने ऋषिकेश के अकादमिक करियर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि उन्हें फिजिक्स विभाग में रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं मिल पाया।

रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों ने कहा कि प्रोजेक्ट आवंटन की प्रक्रिया पहले हो चुकी थी और उस दौरान ऋषिकेश संस्थान में मौजूद नहीं थे। बाद में उन्हें प्रोजेक्ट हासिल करने में परेशानी हुई। छात्रों की मांग है कि यह भी जांचा जाए कि उन्हें प्रोजेक्ट क्यों नहीं मिला और क्या विभागीय प्रक्रिया में कोई ऐसी कमी थी जिसने उनकी स्थिति को और कठिन बनाया।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि MSc के अंतिम चरण में रिसर्च प्रोजेक्ट अकादमिक प्रदर्शन और आगे की पढ़ाई या करियर के लिए अहम हो सकता है। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोजेक्ट न मिलने के पीछे प्रशासनिक लापरवाही थी या सामान्य अकादमिक नियमों के तहत ऐसा हुआ।

छात्रों ने अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की

प्रदर्शनकारी छात्रों ने IIT दिल्ली के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की है। इसमें छात्र कल्याण से जुड़े डीन और एसोसिएट डीन, हॉस्टल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी तथा फिजिक्स विभाग के प्रमुख का नाम शामिल है।

छात्रों का आरोप है कि ऋषिकेश की परेशानियों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जांच में यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, किसी अधिकारी को सीधे तौर पर छात्र की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में छात्रों के आरोप और पुलिस की जांच दोनों अलग-अलग पहलू सामने रखते हैं।

परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऋषिकेश के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही छात्रों ने स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है।

छात्रों की मांगों में यह भी शामिल है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए और प्रशासन अपनी ओर से लिखित जवाब दे।

छात्रों का कहना है कि केवल एक छात्र की मौत पर प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है। संस्थान को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें हॉस्टल, अकादमिक अवसर, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक शिकायतों से जुड़ी समस्याओं को समय रहते सुना जा सके।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त की सुबह घटना की सूचना PCR कॉल के जरिए करीब 8:33 बजे मिली। रिपोर्टों के मुताबिक ऋषिकेश कैंपस में पहुंचे थे और बाद में लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल तक गए। उन्हें IIT अस्पताल ले जाया गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया।

पुलिस ने बताया है कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। इसलिए घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए उपलब्ध जानकारी और संबंधित लोगों के बयानों की जांच की जा रही है।

यही वजह है कि छात्रों की ओर से भी स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि घटना से पहले के दिनों में ऋषिकेश के साथ क्या-क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम सामने आना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही पर बहस

IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई का दबाव, भविष्य की चिंता, शोध और व्यक्तिगत परिस्थितियां छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई और परीक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि छात्रों को समय पर सहायता और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होता है।

ऋषिकेश के मामले ने इसी मुद्दे पर बहस तेज कर दी है। छात्रों का कहना है कि किसी छात्र की परेशानी को केवल उसकी व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि संस्थागत व्यवस्था ने उसे किस तरह प्रभावित किया।

दूसरी ओर, किसी छात्र की आत्महत्या या मौत के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना भी उचित नहीं है। वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

अब आगे क्या?

फिलहाल IIT दिल्ली परिसर में छात्रों की मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है। छात्रों ने स्वतंत्र जांच और जवाबदेही के साथ-साथ हॉस्टल तथा छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच में हॉस्टल, मेडिकल प्रमाणपत्र और रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों की पुष्टि होती है और क्या किसी प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका सामने आती है। इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।

ऋषिकेश कुमार की मौत ने IIT दिल्ली में छात्र कल्याण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। छात्रों का आक्रोश फिलहाल स्वतंत्र जांच, अधिकारियों की जवाबदेही और परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग के रूप में सामने आया है, जबकि पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

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