जेब में थे सिर्फ ₹20, 124 लोगों ने ठुकराया… फिर 125वें ने बदली किस्मत! आज 5.5 अरब डॉलर के मालिक हैं ये भारतीय कारोबारी
कभी जेब में सिर्फ 2.50 डॉलर लेकर अमेरिका पहुंचने वाला एक भारतीय युवक आगे चलकर अरबों डॉलर की संपत्ति खड़ी करेगा, शायद उस समय किसी ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन कारोबारी दुनिया में रोमेश टी. वाधवानी की कहानी इसी असाधारण सफर की मिसाल है। 1969 में जब वह भारत से अमेरिका पहुंचे, तब उनके पास बेहद सीमित पैसा था। उनके पीछे कोई बड़ा कारोबारी परिवार, विरासत में मिली कंपनी या करोड़ों रुपये की पूंजी नहीं थी। उनके पास था तो सिर्फ तकनीकी शिक्षा, कुछ बड़ा करने का सपना और जोखिम उठाने का साहस।
आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। फोर्ब्स के मुताबिक अगस्त 2026 में रोमेश वाधवानी की अनुमानित संपत्ति करीब 5.5 अरब डॉलर है। वह SymphonyAI के संस्थापक और चेयरमैन हैं और इससे पहले कई टेक्नोलॉजी कंपनियों को खड़ा करने और विकसित करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
उनकी कहानी सिर्फ एक अरबपति के अमीर बनने की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें असफलता, लगातार कोशिश, कारोबार में जोखिम, मुश्किल समय में टिके रहने और नई तकनीक में समय से पहले निवेश करने के कई सबक छिपे हैं।
कराची में जन्म, बंटवारे के बाद भारत आया परिवार
रोमेश वाधवानी का जन्म 1947 में कराची में हुआ था। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और उन्हें एक नए माहौल में जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। वाधवानी फाउंडेशन की जीवनी के अनुसार, उनका जन्म भारत की आजादी के कुछ ही दिनों बाद हुआ था और विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली में शरणार्थी के रूप में आया।
बचपन में उन्हें पोलियो हो गया था। इस बीमारी का असर उनकी जिंदगी पर लंबे समय तक रहा और आज भी उन्हें चलने में परेशानी होती है। लेकिन शारीरिक चुनौती उनके आत्मविश्वास के सामने कभी बड़ी बाधा नहीं बनी।
पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी शुरू से ही काफी मजबूत थी। उन्होंने IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने का फैसला किया।
1969 में अमेरिका पहुंचे तो जेब में थे सिर्फ 2.50 डॉलर
साल 1969 में रोमेश वाधवानी आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका पहुंचे। वाधवानी फाउंडेशन की प्रकाशित जीवनी के मुताबिक, पिट्सबर्ग पहुंचने के समय उनके पास सिर्फ 2.50 डॉलर थे।
आज के हिसाब से यह रकम बहुत छोटी लगती है, लेकिन उस समय भी अमेरिका में एक विदेशी छात्र के लिए इतनी कम रकम के साथ नई जिंदगी शुरू करना आसान नहीं था। उन्हें पढ़ाई, रहने और आर्थिक जरूरतों के बीच रास्ता बनाना था।
उन्होंने Carnegie Mellon University में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में मास्टर डिग्री के साथ PhD पूरी की। 1972 में उनकी PhD पूरी हुई। फोर्ब्स के अनुसार, अमेरिका जाने के बाद उनकी शैक्षणिक यात्रा ने उन्हें तकनीक और शोध की मजबूत नींव दी।
लेकिन उनके दिमाग में सिर्फ नौकरी करने का विचार नहीं था। वह खुद की कंपनी बनाना चाहते थे।
नौकरी के बजाय कंपनी बनाने का फैसला
पढ़ाई के दौरान ही वाधवानी ने तय कर लिया था कि उन्हें किसी बड़ी कंपनी में सिर्फ नौकरी नहीं करनी है। वह अपना कारोबार खड़ा करना चाहते थे। समस्या यह थी कि उनके पास कारोबार शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी।
इसके बावजूद उन्होंने पहला कदम उठाया और CompuGuard Corporation की शुरुआत की। यह कंपनी व्यावसायिक इमारतों में ऊर्जा प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े सॉफ्टवेयर पर काम करती थी। यह वह दौर था जब कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर उद्योग आज की तुलना में बिल्कुल शुरुआती अवस्था में था।
लेकिन कंपनी शुरू करना और उसके लिए निवेश जुटाना दो अलग बातें थीं। वाधवानी को जल्द ही इसका अहसास हो गया।
125 निवेशकों के दरवाजे खटखटाए, 124 ने कर दिया मना
अपनी पहली कंपनी को बढ़ाने के लिए वाधवानी को करीब 1 लाख डॉलर की जरूरत थी। उन्होंने निवेशकों से संपर्क करना शुरू किया।
वाधवानी फाउंडेशन के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका की 125 वेंचर कैपिटल फर्मों से संपर्क किया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पहले 124 निवेशकों ने उन्हें मना कर दिया। केवल आखिरी निवेशक ने उनकी कंपनी में निवेश करने की हामी भरी।
यहीं से उनकी कारोबारी यात्रा का एक बड़ा सबक सामने आता है—कई बार सफलता और असफलता के बीच सिर्फ एक कोशिश का अंतर होता है।
वह 124 अस्वीकृतियों के बाद भी रुके नहीं। उन्हें 125वीं कोशिश में निवेश मिला और उन्होंने अपनी कंपनी को आगे बढ़ाया। करीब एक दशक तक उन्होंने Compuguard पर काम किया और इसे लगभग 10 मिलियन डॉलर के कारोबार तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने कंपनी बेच दी।
पहली कंपनी से मिली सफलता के साथ गलतियों का सबक
रोमेश वाधवानी खुद मानते रहे हैं कि शुरुआती कारोबार में उनसे गलतियां भी हुईं। उन्हें यह समझ आया कि सिर्फ तकनीक अच्छी होना काफी नहीं है। प्रोडक्ट, ग्राहक और बाजार की जरूरतों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
इस पहली कंपनी ने उन्हें टेक्नोलॉजी बिजनेस खड़ा करने का व्यावहारिक अनुभव दिया। लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी।
American Robot ने पहुंचाया मुश्किल दौर में
पहली कंपनी के बाद वाधवानी ने American Robot नाम की कंपनी की जिम्मेदारी संभाली। उस समय अमेरिका में इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स को लेकर काफी उत्साह था। कंपनी ने रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी में काम किया और इसमें 40 मिलियन डॉलर से ज्यादा की वेंचर कैपिटल राशि जुटाई गई।
लेकिन कारोबार हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं चलता।
जापानी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में कम कीमत वाले औद्योगिक रोबोट उतारने शुरू किए। इससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई और American Robot पर आर्थिक दबाव बढ़ने लगा।
कई उद्यमी ऐसी स्थिति में कंपनी बंद करने या खुद को अलग करने का रास्ता चुन सकते थे। लेकिन वाधवानी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने करीब एक दशक तक कंपनी के साथ बने रहकर कारोबार को बचाने की कोशिश की। उनका तर्क था कि जिन निवेशकों ने उन पर भरोसा करके पैसा लगाया है, उन्हें मुश्किल समय में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
इस अनुभव ने उन्हें कारोबार की एक दूसरी बड़ी सीख दी—सफलता सिर्फ मुनाफा कमाने में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने में भी है।
फिर बदला शहर, बदली रणनीति और शुरू हुई तीसरी पारी
American Robot के अनुभव के बाद वाधवानी ने अपनी अगली बड़ी छलांग के लिए सिलिकॉन वैली का रुख किया। करीब 1990 के आसपास उन्होंने पिट्सबर्ग से निकलकर कैलिफोर्निया के टेक हब में नई शुरुआत की।
इसके बाद 1991 में उन्होंने Aspect Development की शुरुआत की। कंपनी बिजनेस-टू-बिजनेस सॉफ्टवेयर और सप्लाई चेन से जुड़े समाधान विकसित करती थी।
यह कंपनी उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा कारोबारी मोड़ साबित हुई।
Aspect Development ने तेजी से विस्तार किया। कंपनी ने बिजनेस के लिए खरीद, सप्लाई और तकनीकी सहयोग से जुड़े सॉफ्टवेयर समाधान विकसित किए। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बावजूद वाधवानी ने कारोबार को दोबारा व्यवस्थित किया और कंपनी को मजबूत बनाया।
9.3 अरब डॉलर का सौदा और पहली बार बने अरबपति
साल 2000 में Aspect Development को i2 Technologies ने लगभग 9.3 अरब डॉलर के शेयर सौदे में खरीद लिया। उस समय यह सॉफ्टवेयर उद्योग के सबसे बड़े सौदों में से एक था।
यही वह घटना थी जिसने रोमेश वाधवानी को अरबपति क्लब में पहुंचा दिया।
जिस व्यक्ति ने 1969 में अमेरिका की धरती पर सिर्फ 2.50 डॉलर के साथ कदम रखा था, उसकी बनाई कंपनी अब अरबों डॉलर के सौदे का हिस्सा बन चुकी थी।
लेकिन उनकी कहानी में यहां भी एक बड़ा ट्विस्ट आया।
अरबों डॉलर की संपत्ति बनी, फिर इंटरनेट बबल ने दिया झटका
Aspect Development की बिक्री का सौदा मुख्य रूप से i2 Technologies के शेयरों में हुआ था। इसके बाद इंटरनेट और टेक्नोलॉजी शेयरों का बुलबुला फूटा। टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और i2 Technologies के शेयरों में भी बड़ा नुकसान हुआ।
इसका असर वाधवानी की संपत्ति पर भी पड़ा। यानी अरबपति बनने के बाद भी उनकी संपत्ति स्थायी रूप से सुरक्षित नहीं थी।
लेकिन उन्होंने इसे अंत नहीं माना।
इसके बजाय उन्होंने फिर से कारोबार खड़ा करने का फैसला किया।
2002 में Symphony Technology Group की शुरुआत
साल 2002 में वाधवानी ने Symphony Technology Group (STG) की स्थापना की। इसका मॉडल पहले के कारोबार से अलग था। कंपनी ने सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी से जुड़ी मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करने, उन्हें बेहतर बनाने और आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया।
यह रणनीति धीरे-धीरे सफल होती गई। CSIS के मुताबिक, वाधवानी ने STG को एक स्टार्टअप से बढ़ाकर 2.5 अरब डॉलर के संयुक्त राजस्व और 15,000 कर्मचारियों वाली संस्था तक पहुंचाया।
उनकी कारोबारी यात्रा में अब तक कई कंपनियां बनाना, विकसित करना और आगे बढ़ाना शामिल हो चुका था। वाधवानी फाउंडेशन के अनुसार, उन्होंने पांच दशकों की उद्यमी यात्रा में 40 से ज्यादा कंपनियां बनाई या विकसित की हैं।
2017 में फिर लगाया AI पर बड़ा दांव
जब कई कारोबारी अपने जीवन के इस पड़ाव पर रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं, तब वाधवानी ने एक और बड़ा जोखिम लिया।
साल 2017 में उन्होंने SymphonyAI की स्थापना की। उनका मानना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में कंपनियों के काम करने के तरीके को बड़े पैमाने पर बदल सकती है।
आज SymphonyAI रिटेल, कंज्यूमर पैकेज्ड गुड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, मीडिया और अन्य क्षेत्रों में AI आधारित समाधान विकसित करती है। फोर्ब्स के अनुसार, वाधवानी ने 2022 की शुरुआत में SymphonyAI के CEO पद से हटकर चेयरमैन की भूमिका संभाली, लेकिन कंपनी के रणनीतिक काम से जुड़े रहे।
वाधवानी के लिए AI कोई अचानक आया हुआ विषय नहीं है। उनके करियर की शुरुआत ही कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के शुरुआती दौर में हुई थी। Wadhwani Foundation की प्रोफाइल के अनुसार, Carnegie Mellon में पढ़ाई के दौरान उन्हें AI के शुरुआती अग्रदूतों से सीखने का अवसर भी मिला था।
2026 में संपत्ति करीब 5.5 अरब डॉलर
फोर्ब्स की अगस्त 2026 की प्रोफाइल के मुताबिक, रोमेश वाधवानी की वास्तविक समय के आधार पर अनुमानित संपत्ति करीब 5.5 अरब डॉलर है।
यानी 2.50 डॉलर से शुरू हुआ सफर अब अरबों डॉलर की संपत्ति तक पहुंच चुका है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा एक ही कारोबार से नहीं बना। उन्होंने अलग-अलग दौर में सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी, प्राइवेट इक्विटी और AI जैसे क्षेत्रों में काम किया।
सिर्फ पैसा कमाना नहीं, भारत में रोजगार पैदा करना भी लक्ष्य
रोमेश वाधवानी की कहानी का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा उनका परोपकारी काम है। उन्होंने Wadhwani Foundation की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। SAIGroup के मुताबिक, फाउंडेशन की स्थापना 2001 में हुई थी और यह उद्यमिता, नवाचार और स्किलिंग से जुड़े बड़े कार्यक्रमों पर काम करता है।
फाउंडेशन युवाओं को सिर्फ डिग्री तक सीमित रखने के बजाय रोजगार योग्य कौशल और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने पर जोर देता है। भारत में रोजगार पैदा करने और युवाओं को स्किल देने को लेकर वाधवानी लंबे समय से बात करते रहे हैं।
उनकी सोच साफ है कि बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के लिए सिर्फ पारंपरिक नौकरियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। उद्यमिता और कौशल विकास को भी मजबूत करना जरूरी है।
Padma Shri से भी सम्मानित हो चुके हैं
भारत सरकार ने 2020 में रोमेश वाधवानी को पद्म श्री से सम्मानित किया। Wadhwani Foundation की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, उन्हें देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
उनका काम सिर्फ अमेरिका में टेक्नोलॉजी कंपनियां बनाने तक सीमित नहीं रहा। भारत में शिक्षा, रोजगार, कौशल और AI से जुड़े सामाजिक प्रभाव वाले प्रयासों में भी उनका योगदान रहा है।
2.50 डॉलर से 5.5 अरब डॉलर तक का सफर क्या सिखाता है?
रोमेश वाधवानी की कहानी में सबसे बड़ी बात सिर्फ उनकी मौजूदा संपत्ति नहीं है। असली कहानी उन असफलताओं की है जिनके बाद उन्होंने दोबारा शुरुआत की।
पहली कंपनी के लिए 125 निवेशकों के दरवाजे खटखटाना और 124 बार असफल होना, American Robot के कठिन दौर में वर्षों तक टिके रहना, इंटरनेट बबल में संपत्ति गंवाना और फिर दोबारा कंपनियां खड़ी करना—ये घटनाएं बताती हैं कि उनका कारोबारी सफर सीधी रेखा में नहीं चला।
Aspect Development की 9.3 अरब डॉलर की बिक्री ने उन्हें अरबपति बनाया, लेकिन उसके बाद की गिरावट ने उन्हें फिर से जमीन पर ला दिया। इसके बावजूद उन्होंने STG और फिर SymphonyAI के जरिए नई शुरुआत की।
आज जब उनकी उम्र 78 वर्ष है और वह अगस्त 2026 में 79 वर्ष के होने वाले हैं, तब भी उनका ध्यान AI जैसे भविष्य के क्षेत्र पर है। फोर्ब्स की प्रोफाइल के मुताबिक वह SymphonyAI के चेयरमैन हैं।
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शुरुआत में आपके पास कितना पैसा है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप असफलता के बाद कितनी बार दोबारा खड़े होते हैं। रोमेश वाधवानी के पास अमेरिका पहुंचते समय सिर्फ 2.50 डॉलर थे, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा, तकनीकी समझ, जोखिम लेने की क्षमता और लगातार कोशिश के दम पर एक ऐसा कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया जिसकी कीमत आज अरबों डॉलर में आंकी जाती है।

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