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5 साल बाद खुला सरकार का बड़ा पिटारा! यूपी के 3.53 लाख रसोइयों को मिलेंगे ये बड़े फायदे



लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी और परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील यानी पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला किया है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हजारों रसोइयों को अब पहले की तुलना में अधिक भुगतान मिलेगा।

सरकार के फैसले के मुताबिक, रसोइयों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया गया है। यानी हर महीने उनके मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी। इस फैसले का लाभ प्रदेश के करीब 3.53 लाख रसोइयों को मिलने की बात कही गई है।

मानदेय बढ़ाने के साथ सरकार ने रसोइयों के लिए कुछ अन्य सुविधाओं का भी ऐलान किया है। इनमें हर साल यूनिफॉर्म के लिए आर्थिक सहायता, खाना बनाते समय हाथों की सुरक्षा के लिए दस्ताने और कैशलेस इलाज की सुविधा शामिल है।

पांच साल बाद बढ़ा रसोइयों का मानदेय

मिड-डे मील के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थित स्कूलों में भी ये रसोइए रोजाना बड़ी संख्या में बच्चों के लिए भोजन तैयार करते हैं।

लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सरकार के नए फैसले के बाद अब उन्हें हर महीने 3,000 रुपये मिलेंगे।

इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनकी आय में रसोई के इस काम से मिलने वाला मानदेय भी शामिल है। हालांकि, मानदेय अभी भी नियमित वेतन के बजाय निर्धारित मानदेय के रूप में दिया जाता है।

2 हजार से सीधे 3 हजार रुपये हुआ मानदेय

अब तक रसोइयों को हर महीने 2,000 रुपये का मानदेय मिलता था। सरकार ने इसमें 1,000 रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 3,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया है।

इस हिसाब से सालाना मानदेय में भी 12,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी। यानी जिस रसोइए को पहले साल भर में 24,000 रुपये मानदेय मिलता था, उसे अब 36,000 रुपये वार्षिक मानदेय मिलेगा, बशर्ते पूरे वर्ष भुगतान पात्रता के अनुसार जारी रहे।

प्रदेश में बड़ी संख्या में रसोइए सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का काम करते हैं। ऐसे में मानदेय बढ़ने से सरकार पर भी अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

यूनिफॉर्म के लिए मिलेंगे 500 रुपये

सरकार ने केवल मासिक मानदेय बढ़ाने तक ही फैसला सीमित नहीं रखा है। रसोइयों को हर साल यूनिफॉर्म के लिए अलग से 500 रुपये दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

स्कूल में भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और निर्धारित ड्रेस का महत्व काफी अधिक होता है। यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली राशि से रसोइए अपने काम के लिए आवश्यक कपड़ों की व्यवस्था कर सकेंगे।

इससे स्कूलों में भोजन तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और स्वच्छ बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

हाथों की सुरक्षा के लिए 400 रुपये

भोजन तैयार करते समय रसोइयों को गर्म बर्तन, तेल, भाप और दूसरी चीजों के संपर्क में रहना पड़ता है। ऐसे में हाथों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है।

सरकार की ओर से रसोइयों को दस्ताने खरीदने के लिए 400 रुपये दिए जाने की बात कही गई है।

इस सुविधा का उद्देश्य खाना तैयार करने के दौरान रसोइयों की सुरक्षा को बेहतर बनाना है। इससे काम के दौरान हाथों को गर्म बर्तनों और अन्य जोखिमों से बचाने में मदद मिल सकती है।

कैशलेस इलाज की सुविधा भी मिलेगी

रसोइयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक कैशलेस इलाज की सुविधा है।

इस व्यवस्था के तहत पात्र रसोइयों को इलाज के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ने की बात कही गई है। इसका मतलब यह होगा कि निर्धारित व्यवस्था और पात्रता के तहत इलाज के दौरान उन्हें अस्पताल में सीधे बड़ी रकम जमा करने की परेशानी से राहत मिल सकती है।

हालांकि, कैशलेस इलाज की वास्तविक सीमा, अस्पतालों की सूची और पात्रता से जुड़ी शर्तों को संबंधित सरकारी व्यवस्था के अनुसार समझना जरूरी होगा।

23 अगस्त को लखनऊ में सम्मान समारोह

रसोइयों के सम्मान के लिए लखनऊ में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। 23 अगस्त को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में रसोइयों को सम्मानित किए जाने की योजना है।

बताया गया है कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री करीब 11 रसोइयों को सम्मानित करेंगे और उन्हें कैशलेस कार्ड भी दिए जाएंगे।

इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों और तहसील स्तर पर भी रसोइयों के सम्मान के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात सामने आई है।

करीब 3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा फायदा

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 3 लाख 53 हजार रसोइयों को लाभ मिलने की बात कही गई है।

इनमें बड़ी संख्या में ऐसे रसोइए शामिल हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में काम करते हैं। स्कूलों में बच्चों को गर्म और निर्धारित भोजन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

मानदेय में बढ़ोतरी के साथ अतिरिक्त सुविधाएं मिलने से रसोइयों को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है।

पहले भी बढ़ाया जा चुका है मानदेय

रसोइयों के मानदेय में इससे पहले भी अलग-अलग समय पर बढ़ोतरी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये किया गया था।

इसके बाद वर्ष 2022 में इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया गया।

अब एक बार फिर इसमें 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करके 3,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला किया गया है।

इस तरह पिछले कुछ वर्षों में रसोइयों के मानदेय में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी की गई है।

चुनावी चर्चा भी तेज

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार के इस फैसले को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे रसोइयों के लिए यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब प्रदेश की राजनीति में चुनावी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं।

हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले को रसोइयों की आर्थिक स्थिति और सुविधाओं में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषण में इसे चुनावी समय के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बनाया जा सकता है।

किसी भी सरकारी फैसले को चुनावी लाभ से जोड़ने से पहले उसके आधिकारिक उद्देश्य और लागू होने वाली वास्तविक व्यवस्था को देखना जरूरी होगा।

रसोइयों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना सिर्फ बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

इस पूरी व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका जमीन पर सबसे महत्वपूर्ण है। सुबह से भोजन तैयार करने, सामग्री संभालने, खाना पकाने और बच्चों तक भोजन पहुंचाने की प्रक्रिया में उनका योगदान रहता है।

ऐसे में उनके मानदेय, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े फैसले सीधे स्कूलों की भोजन व्यवस्था से जुड़े हुए हैं।

अब आगे क्या?

मानदेय बढ़ाने की घोषणा के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके प्रभावी क्रियान्वयन का होगा। रसोइयों को बढ़ा हुआ मानदेय कब से मिलेगा, भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होगा और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा किन शर्तों पर लागू होगी, इसकी जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक व्यवस्था से स्पष्ट होगी।

रसोइयों के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से वे मानदेय बढ़ाने और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बाद मिड-डे मील रसोइयों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो गया है। इसके अलावा सालाना यूनिफॉर्म के लिए 500 रुपये, दस्ताने के लिए 400 रुपये और कैशलेस इलाज जैसी सुविधाएं दिए जाने की बात कही गई है।

करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए यह फैसला आर्थिक सहायता के साथ-साथ काम के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ा हुआ मानदेय और घोषित सुविधाएं जमीनी स्तर पर रसोइयों तक किस तरह और कब पहुंचती हैं।

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