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37% तक टूट सकता है सोना! WGC की रिपोर्ट ने मचाई सनसनी, खरीदने वाले अभी जान लें ये बड़ी बात



सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है, लेकिन वर्ष 2026 में इसकी कीमतों में आए उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाला सोना अब लगातार दबाव में दिखाई दे रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों की नीतियों ने गोल्ड मार्केट की दिशा बदल दी है।

अब वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की नई रिपोर्ट ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि सोना एक अहम तकनीकी स्तर से नीचे फिसलता है, तो इसमें जनवरी 2026 के उच्चतम स्तर की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में जिन लोगों ने निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदा है या जो आने वाले शादी-ब्याह के सीजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से लगातार फिसल रहा है सोना

इस वर्ष जनवरी में सोने ने घरेलू बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया था। उस समय इसकी कीमत लगभग 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद बाजार का रुख तेजी से बदलने लगा।

अब स्थिति यह है कि सोने की कीमत घटकर लगभग 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ चुकी है। यानी जनवरी के मुकाबले घरेलू बाजार में करीब 34 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

इस गिरावट ने उन निवेशकों को चिंता में डाल दिया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर सोने में निवेश किया था। वहीं दूसरी ओर, नए खरीदार इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कीमतें और नीचे आती हैं या नहीं।

ईरान संकट और कच्चे तेल ने बदला पूरा समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा असर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं का पड़ा है। खासकर ईरान से जुड़े तनाव और तेल बाजार में आई अस्थिरता ने निवेशकों की रणनीति बदल दी।

जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा तो निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख किया, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध की स्थिति में नरमी आने लगी और तेल बाजार में स्थिरता के संकेत मिले, वैसे-वैसे सोने पर दबाव बढ़ने लगा।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ता है। यदि महंगाई कम होती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपना सकते हैं, जिससे निवेशकों की रणनीति बदल जाती है।

WGC की रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई चिंता?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,857 डॉलर प्रति औंस का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि सोना इस सपोर्ट लेवल से नीचे चला जाता है तो उसका अगला मजबूत तकनीकी सपोर्ट लगभग 3,500 डॉलर प्रति औंस पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार यह स्तर जनवरी 2026 में बने उच्चतम स्तर की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ऐसे स्तर निवेशकों की मनोवैज्ञानिक सोच को भी प्रभावित करते हैं। यदि महत्वपूर्ण सपोर्ट टूटता है तो बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

जनवरी के ऑल टाइम हाई से काफी नीचे पहुंचा बाजार

जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की थी। लेकिन उसके बाद लगातार कमजोरी देखने को मिली।

वर्तमान समय में स्पॉट गोल्ड अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अब तक सोने में उल्लेखनीय कमजोरी आ चुकी है और यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

डॉलर की चाल तय करेगी सोने का भविष्य

सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर का सीधा प्रभाव पड़ता है।

यदि डॉलर मजबूत होता है तो सोना आम तौर पर कमजोर पड़ता है क्योंकि अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है।

वहीं यदि डॉलर कमजोर पड़ता है तो सोने की मांग बढ़ सकती है।

इसी कारण वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी डॉलर की चाल को आने वाले समय का सबसे बड़ा कारक बताया है।

जापानी येन भी निभा सकता है अहम भूमिका

रिपोर्ट में केवल डॉलर ही नहीं बल्कि जापानी येन का भी उल्लेख किया गया है।

यदि जापानी मुद्रा येन मजबूत होती है तो वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का नजरिया बदल सकता है और सोने को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है।

मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर अब केवल विदेशी मुद्रा तक सीमित नहीं रहता बल्कि सोना, चांदी और अन्य कमोडिटी बाजारों पर भी साफ दिखाई देता है।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी सोने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हाल ही में फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

यदि आने वाले महीनों में भी ब्याज दरें स्थिर रहती हैं तो डॉलर पर दबाव आ सकता है और इससे सोने को कुछ राहत मिल सकती है।

लेकिन यदि महंगाई बढ़ती है और फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

इसी कारण वैश्विक निवेशक अब फेड की प्रत्येक बैठक और उसके संकेतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

ईरान-अमेरिका संबंधों से बदल सकता है पूरा खेल

सोने की आगे की दिशा काफी हद तक ईरान और अमेरिका के बीच बनने वाले समीकरणों पर भी निर्भर मानी जा रही है।

यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बेहतर होगी।

इससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है।

तेल सस्ता होने से महंगाई नियंत्रित रहने की संभावना बढ़ेगी और वित्तीय बाजारों में स्थिरता आ सकती है।

ऐसी स्थिति में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है।

हालांकि यदि मध्य पूर्व में दोबारा तनाव बढ़ता है तो निवेशक फिर से सोने की ओर लौट सकते हैं और कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

शादी-ब्याह वालों के लिए क्या है संकेत?

भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा है।

शादी-ब्याह के मौसम में बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी होती है।

यदि कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो आने वाले महीनों में खरीदारी की योजना बना रहे परिवारों को राहत मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बड़ी खरीदारी करने से पहले बाजार की चाल, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कीमतों के रुझान का आकलन करना जरूरी है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कीमतों में गिरावट देखकर घबराने या तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय के लिए निवेश करना चाहता है तो उसे चरणबद्ध तरीके से निवेश (Systematic Buying) की रणनीति अपनानी चाहिए। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का प्रभाव कम हो सकता है।

जो निवेशक अल्पकालिक मुनाफे के उद्देश्य से बाजार में हैं, उन्हें वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी फेड की नीतियों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।

आगे क्या हो सकता है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने यह संकेत जरूर दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर टूटते हैं तो सोने में बड़ी गिरावट संभव है। हालांकि बाजार की दिशा केवल तकनीकी संकेतों से तय नहीं होती।

अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, जापानी येन की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, ईरान-अमेरिका संबंध और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले महीनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल इतना तय है कि गोल्ड मार्केट बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों को भी हर नए घटनाक्रम पर नजर बनाए रखनी होगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां बदलती हैं तो सोना दोबारा संभल भी सकता है, लेकिन यदि दबाव बना रहा तो वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की चेतावनी बाजार में और बड़ी गिरावट का संकेत साबित हो सकती है।

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