सोना-चांदी फिर पकड़ने लगे रफ्तार… अमेरिका की एक खबर से बदला बाजार का पूरा खेल, अब कीमतें कहां जाएंगी?
सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़ी। इस तेजी के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, कमजोर अमेरिकी डॉलर और मध्य-पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। चांदी ने भी सोने का साथ दिया और इसकी कीमत में तेजी देखने को मिली।
बाजार की मौजूदा हलचल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली नीति पर टिकी हुई है। अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में सोने जैसे ऐसे निवेश की मांग बढ़ सकती है, जिस पर किसी कंपनी या सरकार के मुनाफे का सीधा असर नहीं पड़ता।
लगातार तीसरे दिन बढ़ा सोना
18 अगस्त को शुरुआती कारोबार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.4 प्रतिशत बढ़कर 4,431 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी करीब 0.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले सोमवार को भी सोने में करीब 0.9 प्रतिशत की बढ़त देखी गई थी। यानी लगातार दूसरे दिन की तेजी के बाद मंगलवार को भी सोने ने अपनी मजबूती बरकरार रखी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमत को सबसे बड़ा सहारा इस उम्मीद से मिल रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बच सकता है। ब्याज दरें कम रहने की संभावना सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
इसका कारण यह है कि सोना अपने आप में ब्याज नहीं देता। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशकों को बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले साधनों में पैसा रखने का आकर्षण बढ़ जाता है। लेकिन जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होती है, तो सोने को रखने की अवसर लागत घट जाती है।
अमेरिका से आई खबर ने बदला पूरा खेल
सोने की मौजूदा तेजी में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की बड़ी भूमिका है। हाल में अमेरिका में रोजगार से जुड़े आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे और महंगाई के आंकड़े भी अपेक्षाकृत नरम रहे। इसके अलावा खुदरा बिक्री के आंकड़ों ने भी बाजार को उम्मीद के मुताबिक मजबूती नहीं दिखाई।
इन आंकड़ों के बाद निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को कम करके देखना शुरू किया है। Reuters के अनुसार, सितंबर में 0.25 प्रतिशत की दर बढ़ोतरी की संभावना बाजार में करीब 33 प्रतिशत तक आ गई थी, जो एक महीने पहले लगभग 51.2 प्रतिशत थी।
यही बदलाव सोने के लिए बड़ा सपोर्ट बन गया है।
अब फेड की बैठक के मिनट्स पर नजर
बाजार में अब अगला बड़ा संकेत अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के मिनट्स से मिलने की उम्मीद है। इन मिनट्स से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि केंद्रीय बैंक के अधिकारी ब्याज दरों और महंगाई को लेकर आगे क्या सोच रहे हैं।
यदि मिनट्स से यह संकेत मिलता है कि फेड ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के पक्ष में है, तो सोने को और मजबूती मिल सकती है। दूसरी तरफ अगर अधिकारियों की भाषा अपेक्षा से ज्यादा सख्त रही और दरों में बढ़ोतरी का संकेत मिला तो सोने की तेजी पर दबाव भी आ सकता है।
यही कारण है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी फेड की टिप्पणियां और आर्थिक आंकड़े कीमती धातुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
कमजोर डॉलर भी सोने के लिए बना सहारा
सोने की तेजी के पीछे अमेरिकी डॉलर की कमजोरी भी एक अहम वजह है। डॉलर में कमजोरी आने से दूसरी मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाला सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग को सहारा मिल सकता है।
हाल के कारोबार में डॉलर दो महीने से अधिक समय के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया था। डॉलर और सोने के बीच अक्सर उलटा संबंध देखा जाता है, हालांकि यह हर समय एक जैसा नहीं रहता।
अगर डॉलर आगे भी कमजोर रहता है और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होती है, तो सोने को दोहरा फायदा मिल सकता है।
चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार
सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी में भी तेजी देखने को मिली। 18 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 0.8 प्रतिशत बढ़कर 66.33 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंची। इससे एक दिन पहले चांदी में करीब 2.1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।
चांदी को लेकर बाजार की दिलचस्पी इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि इसका इस्तेमाल केवल निवेश और आभूषणों में ही नहीं होता, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल होता है। इसलिए चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है।
मध्य-पूर्व तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग
कीमती धातुओं की मौजूदा तेजी में भू-राजनीतिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बातचीत में अनिश्चितता के कारण बाजार में जोखिम की चिंता बनी हुई है।
Reuters के अनुसार, ईरान की ओर से तनाव बढ़ाने की चेतावनी और युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर अपने पोर्टफोलियो के कुछ हिस्से को सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर ले जाते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोना निश्चित रूप से बढ़ेगा। कई बार संकट के दौरान निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना भी बेच सकते हैं। इसलिए बाजार की दिशा कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
भारत में भी बढ़ सकती है हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। भारत में कीमत तय होने में अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, स्थानीय मांग और टैक्स जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।
इसलिए अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मजबूत बना रहता है और रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारतीय बाजार में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है।
हालांकि, स्थानीय बाजार में ज्वेलरी खरीदते समय केवल अंतरराष्ट्रीय कीमत को देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। दुकान के भाव में मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल होने के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।
क्या सोना फिर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ेगा?
यही सवाल इस समय निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोने ने 2026 में पहले ही बेहद ऊंचे स्तर देखे हैं और बाद में इसमें तेज गिरावट भी आई। अगस्त में अंतरराष्ट्रीय सोना फिर से करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास लौट आया है। Reuters के अनुसार, अगस्त में सोने में लगभग 9 प्रतिशत की वापसी देखने को मिली है।
लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। अगर अमेरिकी महंगाई बढ़ती है, डॉलर मजबूत होता है या फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो सोने पर दबाव आ सकता है।
इसके विपरीत ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, डॉलर में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव सोने को और ऊपर ले जाने वाले कारक बन सकते हैं।
चांदी में भी बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना
चांदी का बाजार सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर माना जाता है। इसमें निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग भी जुड़ी होती है। इसलिए आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर चांदी पर तेजी से पड़ सकता है।
18 अगस्त को चांदी में तेजी का सिलसिला जारी रहा, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि तेज बढ़त के बाद कीमतों में अचानक मुनाफावसूली भी हो सकती है। इसलिए केवल तेजी देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा संकेत?
फिलहाल सोने और चांदी की दिशा तय करने वाले तीन बड़े संकेत दिखाई दे रहे हैं—अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव।
अगर ये तीनों कारक कीमती धातुओं के पक्ष में बने रहते हैं, तो सोने और चांदी में तेजी आगे भी जारी रह सकती है। लेकिन अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े मजबूत होते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना फिर बढ़ती है, तो बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
इसलिए आने वाले दिनों में फेड की बैठक के मिनट्स और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े बेहद अहम रहने वाले हैं।
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए जरूरी बात
सोना और चांदी लंबे समय से भारतीय परिवारों की बचत और निवेश का हिस्सा रहे हैं। लेकिन मौजूदा ऊंचे और तेजी से बदलते बाजार में खरीदारी करते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी है।
निवेश का फैसला व्यक्ति की जरूरत, जोखिम क्षमता और समयावधि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। आभूषण खरीदने वालों को मेकिंग चार्ज और शुद्धता की भी जांच करनी चाहिए, जबकि निवेश के लिए खरीदारी करने वाले व्यक्ति को अलग-अलग विकल्पों और उनके शुल्क को समझना चाहिए।
फिलहाल बाजार का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सोना फिर मजबूत हो रहा है और चांदी भी उसके साथ रफ्तार पकड़ रही है। अमेरिका से आने वाले अगले संकेत और वैश्विक तनाव की स्थिति यह तय करेगी कि यह तेजी कुछ दिनों की हलचल साबित होती है या कीमती धातुओं में एक नई बड़ी तेजी की शुरुआत।

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