जेल की सलाखों से बंगभवन तक! 11 बार गिरफ्तारी, 117 मुकदमे… अब यही नेता बना बांग्लादेश का 23वां राष्ट्रपति, जानिए पूरी कहानी
ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक विपक्ष की राजनीति में सक्रिय रहे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए। संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को बड़े अंतर से हराया। फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के खाते में 88 वोट आए। यह बांग्लादेश में 35 साल बाद पहला प्रतिस्पर्धी राष्ट्रपति चुनाव था।
राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 सांसद मतदान के लिए पात्र थे। इनमें से 343 सांसदों ने मतदान किया और सभी डाले गए वैध मतों में फखरुल को स्पष्ट बहुमत मिला। छह सांसदों ने मतदान नहीं किया। मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर एएमएम नासिर उद्दीन ने परिणाम की घोषणा की।
फखरुल की यह जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि उनके दशकों लंबे राजनीतिक सफर की परिणति के रूप में भी देखी जा रही है। कभी छात्र राजनीति से जुड़े इस नेता ने शिक्षक के रूप में काम किया, सरकारी सेवा में रहे, स्थानीय राजनीति में कदम रखा, सांसद बने, मंत्री पद संभाला और लंबे समय तक BNP के महासचिव के रूप में पार्टी का नेतृत्व किया। अब उनका सफर बांग्लादेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच गया है।
पहली बार 35 साल बाद हुआ मुकाबले वाला राष्ट्रपति चुनाव
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर संसद के सदस्यों के जरिए होता है। इस बार मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि 1991 के बाद यह पहला अवसर था जब राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक चुनावी मुकाबला हुआ। BNP ने मिर्जा फखरुल को उम्मीदवार बनाया था, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन की ओर से कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद मैदान में थे।
फखरुल की जीत BNP की संसद में मजबूत स्थिति को भी दर्शाती है। फरवरी 2026 के आम चुनाव में BNP और उसके सहयोगियों को बड़ी सफलता मिली थी और इसके बाद तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने। इसी राजनीतिक बदलाव के बाद फखरुल को राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया।
26 जनवरी 1948 को ठाकुरगांव में हुआ जन्म
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का जन्म 26 जनवरी 1948 को बांग्लादेश के ठाकुरगांव में हुआ था। उनके पिता मिर्जा रुहुल अमीन वकील और राजनीतिज्ञ थे तथा पाकिस्तान काल में प्रांतीय परिषद के सदस्य रहे थे। परिवार का राजनीतिक वातावरण फखरुल के व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन पर भी प्रभाव डालता रहा।
फखरुल ने शुरुआती शिक्षा ठाकुरगांव में हासिल की और बाद में ढाका कॉलेज से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और स्नातक तथा मास्टर डिग्री हासिल की। छात्र जीवन में ही वे राजनीति से जुड़ गए थे और वामपंथी छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
फखरुल की राजनीति की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान वे ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े। 1969 के जनआंदोलन के दौरान वे संगठन की ढाका यूनिवर्सिटी इकाई के अध्यक्ष भी रहे। उस समय पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक असंतोष तेजी से बढ़ रहा था और छात्र आंदोलन इसका महत्वपूर्ण हिस्सा था।
राजनीति में शुरुआती सक्रियता के बावजूद उन्होंने तुरंत पूर्णकालिक राजनीति को अपना पेशा नहीं बनाया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे सरकारी सेवा में गए और 1972 में बांग्लादेश सिविल सर्विस के शिक्षा कैडर में शामिल होकर ढाका कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाने लगे। बाद में उन्होंने कई सरकारी कॉलेजों में अध्यापन किया।
सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने निरीक्षण और ऑडिट विभाग तथा यूनेस्को से जुड़े सरकारी कामों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। 1979 से 1982 के बीच वे तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एसए बारी के निजी सचिव भी रहे। 1986 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में पूरी तरह कदम रखने का फैसला किया।
1988 में बने ठाकुरगांव नगरपालिका के चेयरमैन
सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद फखरुल ने स्थानीय राजनीति से अपनी नई पारी शुरू की। 1988 में वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ठाकुरगांव नगरपालिका के चेयरमैन चुने गए। इसके बाद वे हुसैन मुहम्मद इरशाद के शासन के खिलाफ चल रहे राजनीतिक आंदोलन में शामिल हुए और 1990 के दशक की शुरुआत में BNP से जुड़ गए। 1992 में उन्हें ठाकुरगांव जिला BNP का अध्यक्ष बनाया गया।
राष्ट्रीय राजनीति में उनकी बड़ी सफलता 2001 के आम चुनाव में मिली। उन्होंने ठाकुरगांव-1 सीट से चुनाव जीता और संसद पहुंचे। BNP की सरकार बनने के बाद उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में उन्हें नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय की राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी दी गई।
2011 से पार्टी के संकटमोचक बने
BNP के भीतर फखरुल की भूमिका समय के साथ लगातार मजबूत होती गई। मार्च 2011 में उन्हें पार्टी का कार्यवाहक महासचिव बनाया गया और 2016 में वे पूर्णकालिक महासचिव बने। इसके बाद लगभग एक दशक तक वे पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक चेहरों में शामिल रहे।
शेख हसीना के लंबे शासनकाल के दौरान BNP को भारी राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा। पार्टी की अध्यक्ष खालिदा जिया जेल और बाद में नजरबंदी तथा बीमारी से जूझती रहीं, जबकि तारिक रहमान लंबे समय तक देश से बाहर रहे। ऐसे समय में फखरुल ने पार्टी की जमीनी गतिविधियों और संगठन को संभालने में अहम भूमिका निभाई। Reuters और AP के अनुसार, वे शेख हसीना के शासन के खिलाफ BNP की राजनीतिक गतिविधियों के प्रमुख चेहरों में रहे।
117 मुकदमे और 11 बार गिरफ्तारी का दावा
फखरुल का राजनीतिक सफर संघर्षों से भी भरा रहा। जनवरी 2026 में उन्होंने खुद कहा था कि पिछले 15 वर्षों में उनके खिलाफ 117 मामले दर्ज किए गए, उन्हें 11 बार गिरफ्तार किया गया और उन्होंने लगभग साढ़े तीन साल जेल में बिताए। ये आंकड़े उनके अपने बयान पर आधारित हैं।
अक्टूबर 2023 में भी उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय BNP के बड़े प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ मामले दर्ज हुए थे और एक अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया था। उस गिरफ्तारी के दौरान उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या 100 तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी।
यही राजनीतिक संघर्ष फखरुल की छवि को BNP के भीतर एक अनुभवी और संकट के समय पार्टी को संभालने वाले नेता के रूप में मजबूत करता गया।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने से पहले दिया महासचिव पद से इस्तीफा
अगस्त 2026 में BNP ने राष्ट्रपति पद के लिए फखरुल के नाम की घोषणा की। प्रधानमंत्री और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान ने पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में उनके नाम को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर आगे रखा। इसके बाद फखरुल ने BNP महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद BNP ने संसद में अपने मजबूत बहुमत के कारण उनके चुनाव को लेकर काफी मजबूत स्थिति बना ली थी। 20 अगस्त को मतदान हुआ और फखरुल ने 255 वोट हासिल कर राष्ट्रपति पद पर अपनी जीत सुनिश्चित कर दी। चुनाव आयोग ने बाद में आधिकारिक गजट जारी करके उन्हें राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित किया।
राष्ट्रपति पद की शपथ आज
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने फखरुल को बधाई दी। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह 21 अगस्त 2026 की शाम बंगभवन में आयोजित किया जाना है।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक माना जाता है, लेकिन देश की राजनीतिक अस्थिरता के दौर में इस पद की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष होने के साथ सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ भी होते हैं।
राष्ट्रपति बनने के बाद फखरुल के सामने क्या चुनौतियां?
मिर्जा फखरुल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे देश का संवैधानिक प्रमुख बनने की है जो पिछले कुछ वर्षों में बेहद तीव्र राजनीतिक बदलावों से गुजरा है। 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश ने अंतरिम शासन का दौर देखा और 2026 के चुनाव के बाद BNP सत्ता में लौटी। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की भूमिका राजनीतिक संस्थाओं के बीच संवैधानिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण होगी।
फखरुल का राजनीतिक जीवन विरोध, गिरफ्तारी, मुकदमों और संगठनात्मक संघर्ष से होकर गुजरा है। अब वही नेता देश के राष्ट्रपति भवन बंगभवन में प्रवेश करने जा रहे हैं। छात्र राजनीति से शुरू हुई उनकी यात्रा नगरपालिका, संसद, मंत्री पद और BNP के शीर्ष संगठनात्मक पद से होते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची है।
उनकी जीत बांग्लादेश की बदलती राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि फखरुल राष्ट्रपति के रूप में अपनी लंबे राजनीतिक अनुभव को किस तरह संवैधानिक जिम्मेदारियों में बदलते हैं और BNP सरकार के साथ उनकी भूमिका किस रूप में सामने आती है।

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