दोपहर तक सब कुछ था सामान्य... फिर आसमान से गिरी मौत और 14 घरों में हमेशा के लिए छा गया मातम!
झारखंड में मंगलवार का दिन कई परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन गया। राज्य के गिरिडीह, दुमका और लातेहार जिलों में अलग-अलग स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। अचानक हुए इस प्राकृतिक हादसे ने पूरे इलाके में मातम का माहौल पैदा कर दिया। सबसे हृदयविदारक दृश्य तब देखने को मिला जब एक महिला की मौत के बाद उसके तीन मासूम बच्चे अपनी मां के शव के पास बैठकर रोते-बिलखते रहे। इस दृश्य ने ग्रामीणों से लेकर राहतकर्मियों तक की आंखें नम कर दीं।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, मृतकों में नौ लोग गिरिडीह, तीन लोग दुमका और दो लोग लातेहार जिले के निवासी थे। कई घायलों का इलाज नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
गिरिडीह में सबसे ज्यादा तबाही
गिरिडीह जिला इस प्राकृतिक आपदा से सबसे अधिक प्रभावित रहा। यहां अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने की कई घटनाएं सामने आईं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में कुल नौ लोगों की मौत हुई।
खोरीमहुआ के उप-संभागीय पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके उप-संभाग के अंतर्गत आने वाले तीन थाना क्षेत्रों में बिजली गिरने से सात लोगों की जान चली गई और तीन अन्य घायल हो गए।
उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान देवरी थाना क्षेत्र में हुआ, जहां पांच लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोग घायल हो गए।
खेल खत्म हुआ, जिंदगी भी खत्म हो गई
प्रशासन के अनुसार देवरी थाना क्षेत्र में कुछ युवक खेलकूद समाप्त करने के बाद एक स्थान पर बैठकर आराम कर रहे थे। मौसम अचानक बदला और तेज गर्जना के साथ बिजली गिर गई।
इस हादसे में कई युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में चार युवकों की उम्र केवल 18 से 20 वर्ष के बीच बताई गई है। जो कुछ देर पहले हंसी-मजाक कर रहे थे, वे अगले ही पल हमेशा के लिए इस दुनिया से चले गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
खेत में काम कर रही महिला पर टूटा कहर
इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक घटना गावां थाना क्षेत्र के पटना चौक स्थित भेलवा मुख्य पथ के पास हुई।
यहां 35 वर्षीय पूनम देवी सुबह से खेत में धान रोपाई का कार्य कर रही थीं। दोपहर के समय वह अन्य महिलाओं के साथ एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन कर रही थीं। तभी अचानक तेज गर्जना हुई और आकाशीय बिजली सीधे वहां आ गिरी।
बिजली की चपेट में आने से पूनम देवी की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद पूरा गांव सदमे में डूब गया।
तीन मासूमों के सिर से उठ गया मां का साया
पूनम देवी की मौत के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी का दिल दहला दिया।
उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे अपनी मां के शव के पास बैठकर लगातार रोते रहे। उन्हें शायद यह भी समझ नहीं आ रहा था कि अब उनकी मां कभी वापस नहीं आएगी।
ग्रामीण महिलाओं ने बच्चों को संभालने की कोशिश की, लेकिन मासूम बार-बार अपनी मां को उठाने की जिद करते रहे।
इस मार्मिक दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू निकल पड़े।
दिल्ली में मजदूरी करता है पति
ग्रामीणों ने बताया कि पूनम देवी के पति प्रवीण सिंह दिल्ली में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को असहनीय पीड़ा में डाल दिया है।
गांव के लोगों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता और बच्चों के भविष्य के लिए विशेष मदद की मांग की है।
गावां और नौडीहा में भी गई जान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरिडीह जिले के गावां और नौडीहा थाना क्षेत्रों में भी बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।
वहीं बगोदर थाना क्षेत्र में भी एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरे जिले में दहशत का माहौल बना दिया।
दुमका में भी नहीं थमा कहर
दुमका जिले के रामगढ़ ब्लॉक में भी आकाशीय बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई।
इन घटनाओं में एक बच्चे सहित चार अन्य लोग घायल हुए हैं।
घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
लातेहार में दो लोगों की मौत
लातेहार जिले में भी मौसम ने कहर बरपाया।
अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
घायल महिला को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लगातार बदल रहा था मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मंगलवार को झारखंड के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज और चमक के साथ बादल सक्रिय रहे।
ऐसे मौसम में खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों के आसपास मौजूद रहना बेहद खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आकाशीय बिजली कुछ सेकंड में ही जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें।
यदि तेज गर्जना सुनाई दे तो तुरंत सुरक्षित भवन में शरण लें और खुले मैदान, खेत, नदी, तालाब तथा पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
प्रशासन ने किसानों और ग्रामीणों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है, क्योंकि खेती के मौसम में सबसे अधिक लोग खुले खेतों में मौजूद रहते हैं।
आकाशीय बिजली से कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सावधानियां जान बचा सकती हैं—
गरज सुनाई देते ही सुरक्षित पक्के भवन में चले जाएं।
पेड़ के नीचे खड़े न हों।
खुले मैदान और खेतों से तुरंत बाहर निकलें।
बिजली के खंभों और धातु की वस्तुओं से दूरी बनाकर रखें।
मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग खुले स्थान पर करने से बचें।
मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें।
पूरे राज्य में शोक की लहर
एक ही दिन में 14 लोगों की मौत ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। सबसे ज्यादा दर्द उन तीन मासूम बच्चों की तस्वीर ने दिया, जो अपनी मां के शव के पास बैठकर उसे जगाने की कोशिश कर रहे थे।
यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्द है जिसने कई घरों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान आकाशीय बिजली की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचना ही ऐसी त्रासदियों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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