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सोने की तलाश में खदान के अंदर उतरे थे दर्जनों लोग… अचानक धंस गई पूरी जमीन, 30 लाशें निकलीं!



सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के पश्चिमी हिस्से से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां नाना-मामबेरे प्रीफेक्चर के अब्बा इलाके में एक पारंपरिक सोने की खदान अचानक ढह गई। खदान के अंदर उस समय बड़ी संख्या में खनिक काम कर रहे थे। जमीन और मिट्टी के अचानक धंसने के बाद कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए।

हादसे में अब तक कम से कम 30 खनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। स्थानीय बचावकर्मियों और लोगों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद मलबे से 30 शव बाहर निकाले हैं। इसके अलावा कई अन्य खनिकों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।

यह हादसा मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को हुआ। जिस खदान में दुर्घटना हुई, वहां आधुनिक तकनीक और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। इसी वजह से अचानक हुए भूस्खलन और जमीन धंसने के बाद बचाव अभियान भी बेहद मुश्किल हो गया।

अचानक धंस गई जमीन और मच गई चीख-पुकार

स्थानीय जानकारी के मुताबिक, अब्बा इलाके की यह खदान पारंपरिक तरीके से संचालित की जा रही थी। यहां खनिक सीमित संसाधनों के साथ जमीन के अंदर जाकर सोने की तलाश करते थे। हादसे के समय भी कई मजदूर खदान के अंदर मौजूद थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक मिट्टी और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। कुछ ही पलों में खदान का एक हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। अंदर काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया।

खदान के बाहर मौजूद अन्य मजदूरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव का काम शुरू किया। कई लोग हाथों से मिट्टी और मलबा हटाने लगे। बाद में बचाव दल भी मौके पर पहुंचा। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अपने साथियों को बचाने के लिए लोग लगातार मलबा हटाते नजर आए।

30 शव निकाले गए, कई अब भी लापता

स्थानीय उप महापौर सुलेमान बी के मुताबिक, बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों ने घंटों की मेहनत के बाद ढही हुई खदान से 30 शव बाहर निकाल लिए। कुछ घायल खनिकों को आसपास के अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा गया है।

लेकिन सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। बचाव अभियान में जुटे लोगों को आशंका है कि कई खनिक अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

समय बीतने के साथ उनके जीवित मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय लोग और बचावकर्मी लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं। कठिन परिस्थितियों के बीच हर संभव तरीके से दबे हुए लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

हादसे में युवा खनिकों की बड़ी संख्या

घटनास्थल से सामने आए वीडियो में हादसे की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। फुटेज में कीचड़ और मिट्टी से सने कई युवा पुरुष और महिला खनिक बचाव अभियान में जुटे नजर आ रहे हैं। कुछ लोग मलबे से शव निकालने में मदद करते दिखाई देते हैं, जबकि आसपास बड़ी संख्या में मजदूर और स्थानीय लोग मौजूद हैं।

कई लोगों के चेहरों पर डर और चिंता साफ नजर आ रही है। अपने साथियों और परिचितों के मलबे में दबे होने की खबर के बीच लोग लगातार बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं।

इस तरह के हादसे में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बावजूद लोग तेजी से मलबा हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

आखिर क्यों हुआ इतना बड़ा हादसा?

फिलहाल हादसे की विस्तृत तकनीकी वजह सामने नहीं आई है। हालांकि, स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह एक पारंपरिक या आर्टिसनल खनन स्थल था, जहां आधुनिक खनन तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था का अभाव था।

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में छोटे पैमाने पर सोने और अन्य खनिजों का खनन बड़ी संख्या में लोग करते हैं। कई जगहों पर खनन बेहद सीमित संसाधनों और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के साथ किया जाता है। जमीन के अंदर गहरी सुरंगें बनाकर काम करने वाले मजदूरों के लिए मिट्टी और चट्टानों के अचानक खिसकने का खतरा हमेशा बना रहता है।

इसी वजह से विशेषज्ञ लंबे समय से इस क्षेत्र में आर्टिसनल माइनिंग को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने और खनिकों के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।

एक ही इलाके में लगातार हो रहे खदान हादसे

अब्बा इलाके की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में इस साल खदानों में ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं।

जून 2026 में भी नाना-मामबेरे प्रीफेक्चर के एक अन्य आर्टिसनल गोल्ड माइनिंग साइट पर जमीन धंसने से कम से कम आठ खनिकों की मौत हुई थी और कई लोग लापता हो गए थे। वह हादसा कोंयेमे खनन स्थल पर हुआ था। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक उस समय भी कई मजदूर जमीन के नीचे मौजूद थे।

इससे पहले 6 मई 2026 को इसी प्रीफेक्चर के बे-मबारी खनन स्थल पर एक खदान धंसने से कम से कम 23 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी खनन क्षेत्र में सुरक्षा नियमों और सरकारी निगरानी को लेकर सवाल उठे थे।

लगातार हो रही इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आखिर इतने हादसों के बावजूद खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं की जा पा रही है।

हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है खनन से

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है। यहां सोने, हीरे और अन्य खनिजों का खनन स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग छोटे पैमाने पर खनन के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं।

लेकिन समस्या यह है कि कई छोटे खनन स्थलों पर मजदूरों को आधुनिक उपकरण, सुरक्षात्मक हेलमेट, उचित वेंटिलेशन और मजबूत सुरंग संरचना जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।

खनिकों के लिए यह काम बेहद जोखिम भरा हो जाता है। एक छोटी सी तकनीकी गलती, जमीन की संरचना में बदलाव या भारी बारिश के बाद मिट्टी की कमजोरी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

2026 में सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में खदान हादसों की श्रृंखला ने इसी समस्या को फिर सामने ला दिया है। मई में बे-मबारी हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी और जून में कोंयेमे में आठ खनिकों की जान गई।

प्रशासन ने जताया दुख, मदद की अपील

सरकारी प्रवक्ता एवरिस्ट नगामाना ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

स्थानीय उप महापौर ने भी स्वयंसेवी संगठनों और आम लोगों से बचाव अभियान में मदद करने की अपील की है। उनका कहना है कि मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत है।

फिलहाल राहत और बचाव कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। बचावकर्मी एक-एक करके मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

परिवारों की निगाहें बचाव अभियान पर टिकीं

हादसे की खबर फैलने के बाद खनिकों के परिवार और रिश्तेदार घटनास्थल के आसपास पहुंच रहे हैं। किसी को अपने परिजन के जिंदा बाहर निकलने की उम्मीद है तो किसी परिवार को पहले ही अपने सदस्य को खोने का दुख झेलना पड़ा है।

मलबे से लगातार शव निकाले जाने के बीच वहां मौजूद लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। बचावकर्मी भी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं क्योंकि मलबा हटाने के दौरान दोबारा जमीन खिसकने का खतरा बना रहता है।

फिलहाल 30 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन बचाव अभियान पूरा होने तक मृतकों और लापता लोगों की संख्या बदल सकती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अंतिम आंकड़ा अभियान समाप्त होने और सभी प्रभावित लोगों की पहचान होने के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक की यह त्रासदी एक बार फिर याद दिलाती है कि सोने की चमक के पीछे काम करने वाले हजारों खनिक किस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर रोजी-रोटी कमाने को मजबूर हैं। जब तक पारंपरिक खनन स्थलों पर सुरक्षा मानकों, तकनीकी निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक ऐसे हादसों का खतरा बना रहेगा।

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