Breaking News

Video : 2014 में जहां था सिर्फ 70 शहरों का नेटवर्क, आज पहुंचा 700 तक! PM मोदी के बयान ने खींचा ध्यान



नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और पिछले वर्षों में किए गए कामों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी पूरी ताकत से काम करना होगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल, पाइप्ड गैस के विस्तार और देश के बढ़ते ऊर्जा नेटवर्क का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में केवल करीब 70 शहरों में पाइप के जरिए गैस की व्यवस्था थी। उनके मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में यह संख्या बढ़कर करीब 700 शहरों तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री ने इस बदलाव को देश में बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले मुश्किल से 20 से 22 लाख घरों तक पाइप्ड गैस पहुंचती थी, जबकि अब करीब 1.75 करोड़ घरों तक पाइप से गैस पहुंचाने का काम हो रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण विषय है। देश की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा की उपलब्धता, कीमत और आपूर्ति की स्थिरता को बनाए रखना जरूरी होगा।

उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में केवल एक ही स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग विकल्पों पर काम करना होगा।

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, जैव ईंधन, प्राकृतिक गैस और अन्य वैकल्पिक स्रोतों को ऊर्जा सुरक्षा की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा के सही और कुशल इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनका संदेश था कि ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल भी जरूरी है।

70 शहरों से 700 शहरों तक पहुंची पाइप्ड गैस

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के विस्तार का विशेष रूप से उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में केवल लगभग 70 शहरों में पाइप के माध्यम से गैस की सुविधा उपलब्ध थी। इसके बाद गैस वितरण नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया गया और अब करीब 700 शहरों तक यह सुविधा पहुंचने की बात प्रधानमंत्री ने कही।

पाइप्ड गैस का विस्तार शहरी परिवारों के लिए ईंधन की उपलब्धता को आसान बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। घरों तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचने से उपभोक्ताओं को सिलेंडर की बुकिंग और भंडारण जैसी कुछ परेशानियों से राहत मिल सकती है।

हालांकि, PNG की उपलब्धता और उपयोगिता शहर, क्षेत्र और स्थानीय नेटवर्क के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

20-22 लाख से 1.75 करोड़ घरों तक

प्रधानमंत्री ने केवल शहरों की संख्या का ही उल्लेख नहीं किया, बल्कि घरों तक पहुंचने वाली पाइप्ड गैस की सुविधा का भी आंकड़ा साझा किया।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले मुश्किल से 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचती थी। अब यह संख्या बढ़कर करीब 1.75 करोड़ घरों तक पहुंच गई है।

अगर इन आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो यह विस्तार कई गुना बड़ा है। इसका अर्थ है कि गैस वितरण नेटवर्क को शहरों के साथ-साथ घरों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इसी बदलाव को सरकार के काम की रफ्तार से जोड़ते हुए कहा कि इतने कम समय में नेटवर्क का इतना विस्तार देश में बुनियादी ढांचे के विकास की गति को दर्शाता है।

प्राकृतिक गैस को लेकर क्यों बढ़ रहा है जोर?

प्राकृतिक गैस को कई क्षेत्रों में कोयला और तेल की तुलना में अपेक्षाकृत कम उत्सर्जन वाला जीवाश्म ईंधन माना जाता है। इसका इस्तेमाल घरेलू ईंधन के अलावा उद्योग, बिजली उत्पादन और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।

भारत में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण माना जाता है।

घर-घर PNG पहुंचाने के अलावा देश में CNG स्टेशनों और गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार पर भी पिछले वर्षों में जोर दिया गया है।

परिवहन क्षेत्र में CNG का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा सकता है।

ऊर्जा की बढ़ती मांग सबसे बड़ी चुनौती

भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली, ईंधन और गैस की मांग भी बढ़ रही है।

शहरों में बढ़ती आबादी, औद्योगिक उत्पादन, परिवहन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार से ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करना और दूसरी तरफ ऊर्जा की कीमत तथा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से जुड़े मुद्दे भी ऊर्जा नीति को प्रभावित करते हैं।

इसी कारण भारत को आने वाले वर्षों में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक स्रोतों में भी निवेश बढ़ाना होगा।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों की ओर भी पूरी शक्ति लगाना जरूरी है।

भारत में सौर ऊर्जा की क्षमता तेजी से बढ़ी है। देश के कई हिस्सों में बड़े सोलर पार्क स्थापित किए गए हैं और घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

पवन ऊर्जा भी भारत के ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा जैव ईंधन और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी भविष्य की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा को भी लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है।

पाइप्ड गैस से आम लोगों को क्या फायदा?

PNG का सबसे बड़ा फायदा सुविधा और निरंतर आपूर्ति से जुड़ा है। घरों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचने पर उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बुक कराने और उसके आने का इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है।

पाइप्ड गैस का भुगतान आम तौर पर उपयोग के आधार पर किया जाता है। इससे गैस की खपत को ट्रैक करना भी संभव होता है।

हालांकि, PNG की कीमत और घरेलू LPG की कीमत की तुलना अलग-अलग शहरों और समय के अनुसार बदल सकती है। इसलिए केवल पाइप्ड गैस का नेटवर्क बढ़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर परिवार के लिए ईंधन की लागत हमेशा कम होगी।

शहरों के साथ गांवों तक पहुंच का सवाल

पाइप्ड गैस का विस्तार अभी भी मुख्य रूप से शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के नेटवर्क से जुड़ा रहा है। भारत के सामने भविष्य में इसे अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाने की चुनौती बनी रहेगी।

ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करने में भौगोलिक परिस्थितियां, आबादी का घनत्व और बुनियादी ढांचे की लागत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसलिए आने वाले वर्षों में गैस नेटवर्क के विस्तार के साथ यह भी देखना होगा कि इसका लाभ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।

ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध अर्थव्यवस्था से

ऊर्जा की उपलब्धता किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। अगर उद्योगों को लगातार और उचित कीमत पर ऊर्जा मिलती है तो उत्पादन और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके विपरीत ऊर्जा की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित कर सकता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में बदलाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

यही कारण है कि ऊर्जा के अलग-अलग स्रोत विकसित करना और घरेलू क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

2014 के बाद ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव का दावा

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में 2014 के बाद हुए बदलावों को सरकार की विकास गति से जोड़ते हुए कहा कि 70 शहरों से 700 शहरों तक पाइप्ड गैस का विस्तार इस रफ्तार का उदाहरण है।

उन्होंने 20-22 लाख घरों से 1.75 करोड़ घरों तक पहुंचने वाले पाइप्ड गैस नेटवर्क का भी उल्लेख किया।

सरकार के लिए ऐसे आंकड़े यह दिखाने का माध्यम हैं कि पिछले वर्षों में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ाया गया है।

हालांकि, इन आंकड़ों का स्वतंत्र मूल्यांकन करते समय यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि गैस कनेक्शन की संख्या के साथ वास्तविक उपयोग कितना है, नेटवर्क की क्षमता क्या है और उपभोक्ताओं को किस कीमत पर गैस उपलब्ध हो रही है।

आगे की राह में कई चुनौतियां

ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार के बावजूद भारत के सामने कई चुनौतियां हैं।

पहली चुनौती ऊर्जा की बढ़ती मांग है। दूसरी चुनौती आयात पर निर्भरता कम करना है। तीसरी चुनौती स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण है।

इसके साथ ही गैस पाइपलाइन नेटवर्क का सुरक्षित संचालन, गैस की कीमत, बुनियादी ढांचे में निवेश और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

भारत को एक ऐसा ऊर्जा मॉडल विकसित करना होगा जिसमें आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके।

2047 के विकसित भारत से जुड़ा ऊर्जा लक्ष्य

प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य भी प्रमुख रूप से सामने आया। ऊर्जा सुरक्षा इस लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

अगर भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनना है तो उद्योग, परिवहन, घरों और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध करानी होगी।

साथ ही ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी जरूरी होगा।

भविष्य में भारत को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा—नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, परमाणु ऊर्जा की क्षमता, प्राकृतिक गैस का नेटवर्क, ऊर्जा दक्षता, भंडारण तकनीक और वैकल्पिक ईंधनों का विकास।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा और पाइप्ड गैस के विस्तार को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में करीब 70 शहरों में पाइप्ड गैस की सुविधा थी, जो अब लगभग 700 शहरों तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2014 से पहले करीब 20-22 लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचती थी, जबकि अब लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पाइप्ड गैस पहुंचाने का काम हो रहा है।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी तेजी से काम करना होगा।

आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा केवल गैस या बिजली की उपलब्धता का सवाल नहीं होगी। यह भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, उद्योग, घरेलू बजट और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा होगी।

2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए भारत को ऐसी ऊर्जा व्यवस्था बनानी होगी जो सुरक्षित, किफायती, भरोसेमंद और भविष्य के लिए टिकाऊ हो।

कोई टिप्पणी नहीं