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5 KM पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे, फिर गेट पर हुआ ऐसा कि मच गया हड़कंप! ‘हट-हट’ वाले VIDEO से उठे सवाल



हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। चंदूपुर ग्राम पंचायत से जुड़े गांवों के बड़ी संख्या में बच्चे और ग्रामीण हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों की मांग बेहद सीधी थी—स्कूल तक पक्की सड़क बनवाई जाए, ताकि बारिश के दिनों में उन्हें कीचड़ और जलभराव से होकर स्कूल न जाना पड़े।

बताया जा रहा है कि बच्चों और ग्रामीणों ने करीब 5 से 6 किलोमीटर तक पैदल मार्च किया। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्य गेट के पास प्रदर्शन शुरू कर दिया। बच्चों का कहना था कि उनके गांव से स्कूल तक जाने वाला रास्ता लंबे समय से खराब है और बरसात के दिनों में इसकी हालत बेहद खराब हो जाती है।

तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे

चंदूपुर ग्राम पंचायत से जुड़े गंगवा का डेरा, बच्ची का डेरा और आसपास के क्षेत्रों के कई स्कूली बच्चे मंगलवार को हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे।

बच्चों के साथ उनके अभिभावक और ग्रामीण भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव से स्कूल तक जाने वाला रास्ता बारिश के दिनों में कीचड़ और पानी से भर जाता है। इससे बच्चों को रोजाना स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है।

कई बार बच्चों के कपड़े और जूते कीचड़ से खराब हो जाते हैं। रास्ते में फिसलने और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

‘स्कूल जाना है, सड़क बनवाओ’

प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर नारे लगाए। उनका कहना था कि वे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन खराब रास्ता उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। खराब रास्ते के कारण गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को भी परेशानी होती है।

अगर किसी व्यक्ति को अचानक अस्पताल ले जाना पड़े तो खराब सड़क के कारण काफी दिक्कत होती है।

इसी वजह से ग्रामीण लंबे समय से पक्की सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं।

कलेक्ट्रेट गेट पर पुलिस से हुई नोकझोंक?

बच्चों और ग्रामीणों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर जाने से रोक दिया।

इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो और कुछ पोस्ट सामने आए, जिनमें दावा किया गया कि पुलिसकर्मी ने बच्चों को ‘हट-हट’ कहकर वहां से जाने के लिए कहा।

सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने बच्चों के साथ पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

इंस्पेक्टर राम कुमार का नाम चर्चा में

सोशल मीडिया पोस्ट में सदर कोतवाली के क्राइम इंस्पेक्टर राम कुमार का नाम भी लिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे बच्चों को कलेक्ट्रेट से हटाने की कोशिश की।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला पुलिसकर्मी वास्तव में इंस्पेक्टर राम कुमार ही है या नहीं।

इसलिए पुलिस अधिकारी की भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान या जांच का इंतजार करना जरूरी है।

अधिकारियों ने बच्चों से की बातचीत

प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों और उनके अभिभावकों से बातचीत की।

ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी और कहा कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क का स्थायी समाधान चाहिए।

बच्चों ने भी अपनी परेशानी अधिकारियों के सामने रखी। उनका कहना था कि बरसात के समय रास्ता इतना खराब हो जाता है कि स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई।

सड़क निर्माण के लिए भेजा गया प्रस्ताव

प्रशासन की ओर से बताया गया कि चंदूपुर ग्राम पंचायत से जुड़े क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।

बताया जा रहा है कि करीब 1,600 मीटर सड़क का हिस्सा खराब स्थिति में है। बारिश के दौरान यहां जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है।

सड़क निर्माण के लिए करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

अब सड़क निर्माण के लिए शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

लंबे समय से चली आ रही है समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई बात नहीं है। पिछले काफी समय से ग्रामीण प्रशासन के सामने सड़क निर्माण की मांग रखते आ रहे हैं।

बरसात के दौरान समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है। रास्ते में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है।

ग्रामीणों के अनुसार, कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका।

यही वजह है कि इस बार बच्चों को भी प्रदर्शन में शामिल होना पड़ा।

पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं ग्रामीण

चंदूपुर क्षेत्र के ग्रामीण और स्कूली बच्चे इससे पहले भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर सड़क निर्माण की मांग उठा चुके हैं।

पिछले प्रदर्शन के दौरान भी ग्रामीणों ने बताया था कि खराब सड़क के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

प्रशासन की ओर से तत्काल राहत के तौर पर रास्ते से कीचड़ और जलभराव हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्रामीण स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

बच्चों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल थे।

इसी वजह से सोशल मीडिया पर इसे ‘Gen Alpha का प्रदर्शन’ कहकर भी चर्चा की जा रही है।

बच्चों की मांग किसी राजनीतिक मुद्दे से जुड़ी नहीं थी। उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि उन्हें स्कूल जाने के लिए सुरक्षित और बेहतर रास्ता मिले।

बच्चों का तिरंगा लेकर कई किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी

चंदूपुर क्षेत्र में बारिश के दौरान रास्ते की हालत और ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क पर पानी जमा होने के बाद कीचड़ फैल जाता है।

स्कूल जाने वाले बच्चों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार उन्हें जूते हाथ में लेकर पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने के बाद बच्चों की परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

इसके अलावा गांव में एंबुलेंस और अन्य वाहनों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।

अब शासन के फैसले का इंतजार

प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अब ग्रामीणों और बच्चों की नजर प्रस्ताव की मंजूरी पर है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से आश्वासन सुनते आ रहे हैं। अब उन्हें सड़क का काम जमीन पर शुरू होता हुआ देखना है।

यदि प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिलती है तो बरसात के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है।

बच्चों ने उठाया बड़ा सवाल

हमीरपुर कलेक्ट्रेट में बच्चों का प्रदर्शन सिर्फ सड़क की मांग नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का सवाल भी सामने लाता है।

जब बच्चों को अपने स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट तक आना पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है।

फिलहाल प्रशासन ने सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। करीब 1.81 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की जानकारी है।

अब देखना यह है कि प्रस्ताव को मंजूरी कब मिलती है और चंदूपुर के बच्चों को पक्की सड़क के लिए आखिर कितना और इंतजार करना पड़ता है।

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