शिवरात्रि पर गूंज रहे थे भोलेनाथ के जयकारे, तभी सामने आई मौत की 5 घटनाएं… मां-बेटे समेत 7 कांवड़ियों की गई जान!
हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों के लिए सावन का यह सफर कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुए अलग-अलग हादसों में हरियाणा के सात कांवड़ियों की जान चली गई। किसी की सड़क हादसे में मौत हुई तो किसी ने शिविर में विश्राम के दौरान दम तोड़ दिया। एक कांवड़िये की करंट लगने से मौत हुई, जबकि कुछ की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद जान चली गई। सबसे दर्दनाक हादसों में यमुनानगर के मां-बेटे की मौत शामिल है।
सावन की शिवरात्रि पर जहां मंगलवार को हर तरफ भगवान भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे थे और श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे थे, वहीं हरियाणा के कई परिवारों में मातम छा गया। कांवड़ यात्रा के दौरान हुए अलग-अलग हादसों ने सात परिवारों की खुशियां छीन लीं।
जानकारी के अनुसार, मृतकों में हिसार का एक कांवड़िया, पानीपत का एक, रोहतक का एक, कुरुक्षेत्र की एक किशोरी और यमुनानगर के मां-बेटे शामिल हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर लंबी दूरी की कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य सावधानियों और बिजली के खतरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रक की टक्कर ने छीन ली मां-बेटे की जिंदगी
सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक सहारनपुर में सामने आई, जहां हरिद्वार से गंगाजल लेकर बाइक से घर लौट रहे यमुनानगर के एक परिवार के मां-बेटे की जान चली गई।
बताया गया कि यमुनानगर जिले के गांव रादौरी निवासी 17 वर्षीय पीयूष अपनी 35 वर्षीय मां संजना के साथ बाइक पर हरिद्वार से लौट रहा था। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे वे भगवानपुर रोड पर गांव नागल अहीर के पास पहुंचे थे।
इसी दौरान पीछे से आ रहे डाक कांवड़ियों के एक ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही।
बाद में देहरादून के अस्पताल में उपचार के दौरान मां और बेटे दोनों की मौत हो गई। एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई।
मुजफ्फरनगर में कैंटर की टक्कर, किशोरी की मौत
एक अन्य हादसा मुजफ्फरनगर में हुआ। दिल्ली-रुड़की हाईवे पर कांवड़ लेकर लौट रहे कुरुक्षेत्र निवासी बाइक सवार दादा-पोती को एक कैंटर ने टक्कर मार दी।
बताया गया कि हादसे में 16 वर्षीय शिवानी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे के बाद उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे पर बड़ी संख्या में डाक कांवड़ और अन्य वाहन तेज गति से चलते हैं। ऐसे में सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। शिवानी की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
दौड़ते-दौड़ते बिगड़ी तबीयत, बाइक पर बैठते ही गिर पड़ा पवन
पानीपत के समालखा निवासी 17 वर्षीय पवन उर्फ शुक्ला की मौत भी कांवड़ यात्रा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से हो गई।
पवन डाक कांवड़ के जत्थे के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहा था। बताया गया कि वह जूस की दुकान पर काम करता था। यात्रा के दौरान शामली के शिव चौक के पास जत्था पहुंचा तो पवन दौड़ लगा रहा था।
दौड़ने के बाद उसने गंगाजल दूसरे कांवड़िये को सौंप दिया और खुद बाइक पर बैठने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह बाइक पर बैठ नहीं पाया और जमीन पर गिर पड़ा।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
साथियों के अनुसार, पवन को पहले भी दौरे पड़ते थे, हालांकि कांवड़ यात्रा के दौरान उसे किसी परेशानी का सामना नहीं हुआ था। चिकित्सक ने प्रारंभिक तौर पर मौत का संभावित कारण हृदय संबंधी समस्या बताया।
शिविर में विश्राम के बाद नहीं खुलीं गुरमीत की आंखें
एक अन्य घटना में हरियाणा के शाहाबाद क्षेत्र के गांव तंगौर निवासी गुरमीत की मौत हो गई। बताया गया कि वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर वापस लौट रहा था।
यात्रा के दौरान वह एक शिविर में विश्राम के लिए रुका था। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और हृदय गति रुकने से उसकी मौत होने की बात सामने आई।
कांवड़ यात्रा के दौरान लगातार पैदल चलने, दौड़ने, नींद की कमी, गर्मी और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से शरीर पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
झूला कांवड़ चढ़ाते समय करंट ने ली 32 वर्षीय कांवड़िये की जान
हिसार में हुई घटना ने बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां वन विभाग की आवासीय कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में मंगलवार सुबह करीब 5:20 बजे 32 वर्षीय मुकंदी की करंट लगने से मौत हो गई।
बताया गया कि मुकंदी अपने तीन दोस्तों के साथ एक अगस्त को झूला कांवड़ लेने हरिद्वार गया था। सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे वे वापस पहुंचे और रात मंदिर में ही रुके।
सुबह जलाभिषेक के बाद मुकंदी अपने दोस्त मनोज के साथ शिवालय पर झूला कांवड़ चढ़ाने के लिए छत पर गया। इसी दौरान लोहे की ग्रिल के पास से गुजर रही बिजली की लाइन की चपेट में वह आ गया।
करंट का जोरदार झटका लगने के बाद वह स्टोर की छत पर गिर गया। साथियों ने तत्काल उसे निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
छुट्टी पर घर आया फौजी, कांवड़ यात्रा बनी आखिरी यात्रा
रोहतक के गांव मायना निवासी 30 वर्षीय सचिन पंघाल भारतीय सेना में मेघालय के शिलांग में तैनात थे। वह 25 जुलाई को छुट्टी लेकर घर आए थे और उन्हें 22 अगस्त को वापस ड्यूटी पर लौटना था।
इसी बीच वह दोस्तों के साथ डाक कांवड़ लाने हरिद्वार चले गए। मुजफ्फरनगर के पास रात में दौड़ते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें वाहन में लिटाया गया।
जब काफी देर तक उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें रोहतक के पीजीआईएमएस ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, मामला हार्ट अटैक से जुड़ा बताया गया।
सात मौतों ने फिर खड़े किए सुरक्षा से जुड़े सवाल
कांवड़ यात्रा आस्था और श्रद्धा से जुड़ी यात्रा है। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचते हैं। लेकिन इस दौरान सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक, तेज रफ्तार डाक कांवड़, लंबी दूरी तक दौड़ना, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बिजली की खुली लाइनें कई बार गंभीर खतरा पैदा कर देती हैं।
इस बार सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई घटनाओं ने कई परिवारों को ऐसा दर्द दिया, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। कहीं सड़क पर हुई एक टक्कर ने मां-बेटे को छीन लिया तो कहीं कुछ ही पलों में करंट ने एक युवक की जिंदगी खत्म कर दी। किसी ने दौड़ते हुए दम तोड़ा तो किसी की शिविर में विश्राम के दौरान जान चली गई।
सावन की शिवरात्रि पर जब मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे थे, उसी समय इन सात परिवारों में अपनों को खोने का दर्द पसरा था। कांवड़ यात्रा की इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आस्था के इस सफर को सुरक्षित बनाने के लिए श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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