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फांसी से पहले कैदी ने कर दी ऐसी अनोखी डिमांड, हिल गया पूरा जेल प्रशासन! सालों पुरानी परंपरा करनी पड़ी खत्म



अमेरिका के टेक्सास से जुड़ी एक घटना आज भी “लास्ट मील” यानी फांसी से पहले कैदी के आखिरी भोजन की परंपरा को लेकर चर्चा में रहती है। आम तौर पर मौत की सजा पाने वाले कैदियों को फांसी से पहले अपनी पसंद का भोजन चुनने की अनुमति दी जाती थी। यह परंपरा इस विचार से जुड़ी थी कि जिंदगी के अंतिम क्षणों में कैदी को उसकी पसंद का खाना उपलब्ध कराया जाए।

लेकिन सितंबर 2011 में एक कैदी की असाधारण मांग और उसके बाद उस भोजन को न खाने की घटना ने टेक्सास की इस व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया। कैदी था लॉरेंस रसेल ब्रूअर, जिसे 21 सितंबर 2011 को फांसी दी गई थी। टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल जस्टिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उसकी फांसी की तारीख 21 सितंबर 2011 दर्ज है।

ब्रूअर ने आखिरी भोजन के लिए इतनी लंबी सूची दी कि वह सामान्य “लास्ट मील” से कहीं ज्यादा एक पूरी दावत जैसी दिखाई देती थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब भोजन तैयार करके उसके सामने पहुंचा, तो उसने उसे खाने से इनकार कर दिया। इसके बाद टेक्सास प्रशासन ने महज कुछ घंटों के भीतर विशेष आखिरी भोजन की परंपरा खत्म करने का फैसला कर लिया।

आखिरी भोजन की परंपरा क्या थी?

मौत की सजा पाने वाले कैदियों को अंतिम समय से पहले अपनी पसंद का भोजन मांगने की अनुमति देने की परंपरा अमेरिका में लंबे समय से चली आ रही थी। अलग-अलग राज्यों में इसके नियम अलग रहे हैं। कहीं कैदियों को सीमित बजट में भोजन चुनने की अनुमति दी जाती थी, तो कहीं जेल की रसोई में उपलब्ध सामान से उनकी पसंद का खाना तैयार किया जाता था।

टेक्सास में भी लंबे समय तक मौत की सजा पाने वाले कैदियों को अपनी पसंद का भोजन मांगने की सुविधा दी जाती रही। हालांकि यह सुविधा पूरी तरह असीमित नहीं थी और भोजन जेल की उपलब्धता तथा प्रशासनिक नियमों के अनुसार तैयार किया जाता था।

लेकिन लॉरेंस रसेल ब्रूअर का मामला इस परंपरा के लिए निर्णायक साबित हुआ।

कौन था लॉरेंस रसेल ब्रूअर?

लॉरेंस रसेल ब्रूअर को 1998 में टेक्सास के जैस्पर में जेम्स बर्ड जूनियर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह हत्या नस्लीय घृणा से जुड़ी बेहद चर्चित घटना थी और अमेरिका में इसे एक भयावह हेट क्राइम के रूप में देखा गया।

ब्रूअर को इस मामले में मौत की सजा सुनाई गई। वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद 21 सितंबर 2011 को उसे टेक्सास में फांसी दी गई। टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल जस्टिस के रिकॉर्ड में वह उस तारीख को निष्पादित कैदी के रूप में दर्ज है।

लेकिन उसकी फांसी से कुछ घंटे पहले जो हुआ, उसने टेक्सास की जेल व्यवस्था में एक अलग ही बहस छेड़ दी।

ब्रूअर ने आखिरी खाने में क्या-क्या मांगा?

फांसी से पहले ब्रूअर ने एक बेहद लंबी भोजन सूची दी। इसमें कई भारी और कैलोरी से भरपूर व्यंजन शामिल थे।

रिपोर्टों के अनुसार उसकी मांग में दो चिकन फ्राइड स्टेक, ट्रिपल-मीट बेकन चीजबर्गर, चीज ऑमलेट, फ्राइड ओकरा, तीन फजीता, करीब एक पाउंड बारबेक्यू, मीट लवर्स पिज्जा, आधी लोफ सफेद ब्रेड, एक पिंट आइसक्रीम, पीनट बटर फज और रूट बीयर जैसी चीजें शामिल थीं।

कुछ रिपोर्टों में उसके ऑर्डर की सूची में बीफ, सब्जियों और चीज से बना ऑमलेट तथा अन्य अतिरिक्त सामग्री का भी उल्लेख मिलता है। कुल मिलाकर भोजन की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि यह सामान्य कैदी के भोजन से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था।

जेल के किचन ने उसकी मांग के अनुसार भोजन तैयार किया। उस समय तक किसी को शायद अंदाजा नहीं था कि यही भोजन कुछ घंटों बाद टेक्सास की दशकों पुरानी परंपरा के अंत का कारण बनने वाला है।

फिर आया सबसे चौंकाने वाला मोड़

जब ब्रूअर के सामने उसका आखिरी भोजन परोसा गया, तो उसने एक ऐसी हरकत की जिसने जेल अधिकारियों को हैरान कर दिया।

उसने खाना खाया ही नहीं।

रिपोर्टों के मुताबिक उसने अपने द्वारा मांगे गए भोजन में से एक निवाला तक नहीं लिया। भोजन बाद में फेंक दिया गया।

यही बात टेक्सास के एक प्रभावशाली राज्य सीनेटर जॉन व्हिटमायर को बेहद नागवार गुजरी। उनका मानना था कि मौत की सजा पाए कैदी को इतनी विशेष सुविधा देना उचित नहीं है, खासकर तब जब इतनी बड़ी मात्रा में खाना सिर्फ इसलिए तैयार कराया गया और फिर उसे खाया भी नहीं गया।

सीनेटर जॉन व्हिटमायर ने उठाई आवाज

ब्रूअर के अंतिम भोजन की खबर सामने आने के बाद टेक्सास सीनेट की क्रिमिनल जस्टिस कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष जॉन व्हिटमायर ने जेल प्रशासन को पत्र लिखा।

उन्होंने विशेष “लास्ट मील” की व्यवस्था को अनुचित बताया और मांग की कि मौत की सजा पाने वाले कैदियों को अलग से विशेष भोजन देने की परंपरा समाप्त की जाए।

व्हिटमायर का तर्क था कि मौत की सजा पाने वाले कैदी को फांसी से पहले वही भोजन दिया जाना चाहिए जो उस दिन जेल के दूसरे कैदियों को दिया जाता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति को गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है, उसे जेल में अन्य कैदियों की तुलना में ऐसी विशेष सुविधा क्यों दी जानी चाहिए।

कुछ ही घंटों में बदल गया पूरा नियम

व्हिटमायर के पत्र के बाद टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनल जस्टिस ने तेजी से कार्रवाई की।

22 सितंबर 2011 को TDCJ के कार्यकारी निदेशक ब्रैड लिविंगस्टन ने घोषणा की कि मौत की सजा पाने वाले कैदियों के लिए विशेष रूप से पसंद का आखिरी भोजन तैयार करने की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से खत्म की जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत फांसी का सामना कर रहे कैदी को वही भोजन दिया जाना था जो उस जेल यूनिट के बाकी कैदियों को मिलता था। यानी अब कोई विशेष स्टेक, पिज्जा, आइसक्रीम या पसंदीदा मिठाई की अलग से मांग पूरी नहीं की जानी थी।

इस फैसले के साथ टेक्सास में लंबे समय से चली आ रही “लास्ट मील” की विशेष सुविधा अचानक समाप्त हो गई।

क्या सिर्फ खाना न खाने से खत्म हुई परंपरा?

तकनीकी तौर पर केवल खाना न खाने की वजह से ही पूरा नियम नहीं बदला था। असल वजह थी बहुत बड़ा और महंगा ऑर्डर देने के बाद उसे न खाना, जिसने पहले से मौजूद इस सुविधा पर राजनीतिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए।

व्हिटमायर पहले भी इस व्यवस्था को लेकर असहज थे। लेकिन ब्रूअर के मामले ने उन्हें तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर जेल प्रशासन ने खुद यह व्यवस्था नहीं रोकी तो वह कानून बनवाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद TDCJ ने खुद ही नीति बदल दी।

इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि ब्रूअर का मामला उस विवाद का निर्णायक ट्रिगर बना, जिसने टेक्सास में विशेष आखिरी भोजन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया।

उस समय जेल में बाकी कैदियों को क्या खाना मिला?

इस घटना की एक दिलचस्प जानकारी यह भी है कि जिस दिन ब्रूअर को फांसी दी गई, उस दिन जेल यूनिट के दूसरे कैदियों के लिए सामान्य भोजन में स्लॉपी जो, नेवी बीन्स, क्रीम्ड कॉर्न और कटी हुई ब्रेड शामिल थी।

ब्रूअर के लिए इसके बजाय अलग से बेहद लंबा और भारी भोजन तैयार किया गया था। लेकिन उसने उसे खाया नहीं और भोजन बाद में फेंक दिया गया।

यही तुलना बाद की बहस का एक बड़ा हिस्सा बनी।

इस घटना पर आज भी क्यों होती है चर्चा?

ब्रूअर के आखिरी भोजन की कहानी सिर्फ खाने की मात्रा की वजह से चर्चित नहीं हुई। इसके पीछे कई बड़े सवाल भी जुड़े थे।

पहला सवाल था कि क्या मौत की सजा पाने वाले व्यक्ति को फांसी से पहले विशेष भोजन की सुविधा मिलनी चाहिए? दूसरा सवाल था कि इस सुविधा पर कितना खर्च किया जाना उचित है? तीसरा सवाल था कि क्या अंतिम इच्छा के नाम पर भोजन की बर्बादी स्वीकार की जा सकती है?

कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले का समर्थन किया, जबकि कुछ आलोचकों ने कहा कि पूरी बहस को केवल एक कैदी के भोजन पर केंद्रित करना मौत की सजा और न्याय व्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों से ध्यान भटका सकता है। उस समय टेक्सास सिविल राइट्स प्रोजेक्ट से जुड़े एक प्रतिनिधि ने भी इस मुद्दे को मौत की सजा की व्यापक बहस से जोड़कर देखा था।

क्या अमेरिका के सभी राज्यों में ऐसी व्यवस्था खत्म हो गई?

नहीं। यह दावा सही नहीं होगा कि ब्रूअर की घटना के बाद पूरे अमेरिका में आखिरी भोजन की परंपरा समाप्त हो गई।

अलग-अलग राज्यों में मौत की सजा पाने वाले कैदियों के अंतिम भोजन से जुड़े नियम अलग रहे हैं। कहीं विशेष भोजन की अनुमति रही, कहीं बजट की सीमा तय की गई और कहीं जेल के सामान्य मेन्यू से ही भोजन दिया गया।

2011 में उपलब्ध रिपोर्टों में भी बताया गया था कि कुछ राज्यों में आखिरी भोजन पर अलग-अलग सीमाएं थीं। उदाहरण के लिए फ्लोरिडा में उस समय अंतिम भोजन के लिए खर्च की सीमा का उल्लेख किया गया था।

इसलिए ब्रूअर की घटना का सबसे सीधा असर टेक्सास की नीति पर पड़ा था।

एक कैदी की आखिरी मांग और बदल गई जेल व्यवस्था

लॉरेंस रसेल ब्रूअर की कहानी इसलिए असामान्य है क्योंकि उसने अपनी आखिरी इच्छा के रूप में ऐसा भोजन चुना जिसे पूरा करने में जेल प्रशासन को काफी तैयारी करनी पड़ी, लेकिन अंत में उसने उसे छुआ तक नहीं।

21 सितंबर 2011 को ब्रूअर को फांसी दी गई और अगले ही दिन टेक्सास ने विशेष आखिरी भोजन की व्यवस्था खत्म करने का ऐलान कर दिया।

इस घटना ने यह सवाल भी सामने रखा कि किसी कैदी की अंतिम इच्छा को कितना महत्व दिया जाना चाहिए और क्या ऐसी सुविधा न्याय व्यवस्था का हिस्सा होनी चाहिए।

आज जब “लास्ट मील” की कहानियां इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होती हैं, तब ब्रूअर का मामला सबसे ज्यादा चर्चित उदाहरणों में शामिल रहता है। इसकी वजह सिर्फ उसकी लंबी भोजन सूची नहीं, बल्कि उसका पूरा खाना छोड़ देना और उसके तुरंत बाद टेक्सास द्वारा नियम बदल देना है।

एक ऐसी परंपरा, जो दशकों से चली आ रही थी, एक कैदी के आखिरी भोजन के बाद अचानक खत्म हो गई। यही वजह है कि लॉरेंस रसेल ब्रूअर की आखिरी रात को आज भी टेक्सास की जेल व्यवस्था के इतिहास की एक असाधारण घटना के रूप में याद किया जाता है।

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