रात 10 बजे अचानक 11वीं मंजिल बनी आग का दरिया! 2 की मौत, 6 घायल… आखिर कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने लोगों को दहला दिया। विले पार्ले पश्चिम इलाके में स्थित एक बहुमंजिला इमारत की 11वीं मंजिल पर अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने घर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और पूरी मंजिल धुएं से भर गई। इस हादसे में ढाई साल के एक बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।
घटना बैपटिस्टा रोड स्थित शांता भवन नाम की 12 मंजिला इमारत में हुई। आग लगने की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। उस समय इमारत में मौजूद कई लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती घने धुएं के बीच सुरक्षित बाहर निकलना था।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के मुताबिक हादसे में कुल आठ लोग प्रभावित हुए। इनमें से दो को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाकी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया।
रात करीब 10 बजे मिली आग की सूचना
मुंबई फायर ब्रिगेड के अनुसार मंगलवार रात करीब 10 बजे शांता भवन में आग लगने की सूचना मिली। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि आग इमारत की 11वीं मंजिल पर लगी थी।
आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने इसे लेवल-2 की आग घोषित किया।
बताया जा रहा है कि आग करीब 4,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैल गई थी। आग की चपेट में घर की बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रिक उपकरण, एयर कंडीशनिंग यूनिट, फर्नीचर, सोफा, बिस्तर, फॉल्स सीलिंग और रसोई में रखा सामान आ गया।
आग ने कुछ ही समय में ऐसा विकराल रूप ले लिया कि आसपास के लोगों में अफरातफरी मच गई।
11वीं मंजिल पर फंसे थे कई लोग
आग लगने के बाद सबसे बड़ी चुनौती 11वीं मंजिल पर फंसे लोगों को बाहर निकालना थी। आग के साथ-साथ पूरे इलाके में धुआं भर गया था।
दमकलकर्मियों ने सुरक्षा उपकरणों के साथ इमारत में प्रवेश किया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
बचाव दल को अंदर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गैलरी और कमरों में घना धुआं भर जाने के कारण दमकलकर्मियों को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही थी।
बचाव अभियान के दौरान दो लोग बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें तत्काल बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
ढाई साल के बच्चे की मौत ने झकझोर दिया
इस हादसे में ढाई साल के बच्चे की मौत ने पूरे मामले को बेहद दर्दनाक बना दिया।
आग लगने के दौरान छोटे बच्चे के लिए घने धुएं और गर्मी के बीच सुरक्षित निकल पाना मुश्किल था। दमकलकर्मियों ने लोगों को बचाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन दो लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
मासूम की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में मातम का माहौल बन गया।
अस्पताल पहुंचने पर दो लोगों को मृत घोषित किया गया
BMC के मुताबिक आग से प्रभावित आठ लोगों में से दो को अस्पताल ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान अबीर और अंकिता के रूप में बताई गई है।
घटना के बाद दोनों शवों को अस्पताल में रखा गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। पुलिस और प्रशासन परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।
छह लोग घायल, चार की हालत स्थिर
हादसे में छह अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं। इनमें पार्थ, हिरेन, यशस्वी और अभिषेक समेत अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
दो घायलों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं चार लोगों का इलाज नानावटी अस्पताल में चल रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
घायलों में कुछ लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी हुई, जबकि कुछ को आग के दौरान चोटें आने की जानकारी सामने आई है।
करीब दो घंटे तक चलता रहा बचाव अभियान
आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की टीमों ने लगातार काम किया। आग काफी बड़े क्षेत्र में फैल चुकी थी, इसलिए इसे नियंत्रित करने में समय लगा।
दमकलकर्मियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आधी रात के आसपास आग पर काबू पा लिया।
हालांकि आग बुझने के बाद भी दमकल टीमों ने तुरंत काम बंद नहीं किया। दोबारा आग भड़कने की आशंका को देखते हुए कूलिंग ऑपरेशन चलाया गया।
कूलिंग के दौरान आग से प्रभावित जगहों पर पानी डालकर यह सुनिश्चित किया गया कि अंदर किसी हिस्से में गर्मी या आग की कोई चिंगारी बाकी न रह जाए।
आग बुझने के बाद भी सामने आया बड़ा सवाल
आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है—आखिर 11वीं मंजिल पर इतनी भीषण आग लगी कैसे?
फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
दमकल विभाग और संबंधित अधिकारी घटनास्थल की जांच कर रहे हैं। बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, एयर कंडीशनिंग यूनिट और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा सकती है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग की शुरुआत किस हिस्से से हुई और वह इतनी तेजी से कैसे फैल गई।
क्या बिजली के उपकरण बने वजह?
आग की चपेट में इलेक्ट्रिक वायरिंग और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या किसी इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की संभावना की जांच की जा सकती है।
हालांकि यह सिर्फ एक संभावित कारण है। जब तक दमकल विभाग या जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक आग के कारण को लेकर किसी एक संभावना को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
जांच टीम आग लगने की जगह और वहां मौजूद इलेक्ट्रिकल सिस्टम की स्थिति को भी देख सकती है।
घने धुएं ने बढ़ाई मुश्किल
इस घटना में आग के साथ-साथ धुआं भी बड़ा खतरा बन गया था। ऊंची मंजिल पर आग लगने के बाद धुआं तेजी से आसपास के हिस्सों में फैल गया।
ऐसी परिस्थितियों में लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार आग की लपटों से पहले धुआं ही लोगों की जान के लिए खतरा बन जाता है।
दमकलकर्मियों के लिए भी घने धुएं के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद बचाव दल ने अभियान जारी रखा और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
इमारत में मची अफरातफरी
आग लगने की खबर फैलते ही इमारत में रहने वाले लोगों में अफरातफरी मच गई। कई लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।
विले पार्ले जैसे घनी आबादी वाले इलाके में बहुमंजिला इमारत में आग लगना आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी चिंता का कारण बन गया।
दमकल की गाड़ियों और पुलिस टीमों के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना के बाद पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। आग के कारणों के साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि हादसे के समय फ्लैट में कितने लोग मौजूद थे और बचाव के दौरान किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
पुलिस आसपास के लोगों और इमारत से जुड़े लोगों से जानकारी ले सकती है।
इसके अलावा आग से प्रभावित स्थान का निरीक्षण कर यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आग किस जगह से शुरू हुई थी।
आग की घटना ने फिर उठाए सुरक्षा के सवाल
मुंबई में बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाओं के बाद फायर सेफ्टी इंतजामों को लेकर सवाल उठते हैं।
ऊंची इमारतों में आपातकालीन निकास, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और बिजली व्यवस्था की नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विले पार्ले की इस घटना में भी जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन किस तरह किया जा रहा था।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
एक तरफ दमकलकर्मी आग बुझाने और लोगों को बचाने में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर हादसे के बाद मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
ढाई साल के बच्चे समेत दो लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। छह लोग घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है।
फिलहाल सभी की नजर पुलिस और दमकल विभाग की जांच पर है।
आग बुझ गई, लेकिन कई सवाल अभी बाकी
विले पार्ले की शांता भवन इमारत में लगी आग पर करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद काबू पा लिया गया, लेकिन इस हादसे ने कई सवाल पीछे छोड़ दिए हैं।
11वीं मंजिल पर आग की शुरुआत आखिर कहां से हुई? क्या बिजली की खराबी वजह थी या किसी अन्य कारण से आग भड़की? आग इतनी तेजी से 4,000 वर्ग फुट तक कैसे फैल गई? और क्या सभी सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता घायलों का इलाज और मृतकों के परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है। आग की वास्तविक वजह सामने आने के बाद ही इस दर्दनाक हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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