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आटे की बोरी खुलते ही सामने आया ऐसा राज, अफसर भी रह गए हैरान! 1800 किलो सफेद पाउडर बरामद, फैक्ट्री सील

 


आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से खाद्य पदार्थों में मिलावट का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफएसडीए की टीम ने एक फ्लोर मिल पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में सेलखड़ी पाउडर बरामद किया है। आरोप है कि गेहूं के आटे में सफेद पत्थर का पाउडर यानी सेलखड़ी मिलाकर उसकी गुणवत्ता और वजन बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी।

बुधवार को गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में टीम को मिल परिसर से करीब 1,800 किलोग्राम सेलखड़ी पाउडर और 13.5 कुंतल आटा मिला। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बरामद सामग्री को सीज कर दिया और मिल के संचालन पर रोक लगाते हुए परिसर को सील कर दिया। मामले में मिल से लिए गए अलग-अलग नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

एफएसडीए अधिकारियों के मुताबिक, प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही मिलावट की प्रकृति और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रथम दृष्टया मामला गंभीर मिलावट का नजर आ रहा है।

गुप्त सूचना के बाद फ्लोर मिल पर छापा

एफएसडीए के सहायक आयुक्त खाद्य-2 महेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार, आटा और मैदा के खिलाफ चल रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत टीम को फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में एक फ्लोर मिल में मिलावट की सूचना मिली थी।

इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने बुधवार को जौतना डाबर रोड स्थित समृद्धि फ्लोर मिल पर अचानक छापेमारी की। टीम के पहुंचते ही मिल परिसर में मौजूद गतिविधियों की जांच शुरू की गई।

छापेमारी के दौरान मिल संचालक अमित कुमार भी मौके पर मौजूद बताया गया। अधिकारियों ने परिसर में रखे आटे और अन्य सामग्री की जांच की। इसी दौरान बड़ी मात्रा में सेलखड़ी पाउडर बरामद हुआ।

अधिकारियों के मुताबिक, मिल में आटे के निर्माण से संबंधित गतिविधियां चल रही थीं, जबकि फर्म के पास मसालों के व्यापार का लाइसेंस होने की बात सामने आई है। यानी जिस लाइसेंस के आधार पर कारोबार किया जा रहा था, उसके दायरे से अलग आटा निर्माण किए जाने का आरोप है।

1800 किलो सेलखड़ी और 13.5 कुंतल आटा बरामद

छापेमारी में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ, जब अधिकारियों को मिल परिसर से करीब 1,800 किलो सेलखड़ी पाउडर मिला। इसके अलावा लगभग 13.5 कुंतल तैयार आटा भी बरामद किया गया।

सेलखड़ी एक मुलायम सफेद पत्थर का पाउडर होता है। अधिकारियों का आरोप है कि इसका इस्तेमाल आटे का रंग अधिक सफेद और चमकदार दिखाने तथा वजन बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने बरामद सामान को मौके पर ही सीज कर दिया। इसके साथ ही मिल की मशीनों और स्टॉक को भी सील कर दिया गया, ताकि आगे उत्पादन या माल को बाजार में भेजने की संभावना न रहे।

तीन ब्रांड के नाम पर बेचा जा रहा था आटा

जांच के दौरान एफएसडीए टीम को कथित तौर पर पता चला कि मिल में तैयार आटे को अलग-अलग ब्रांड नामों से बाजार में भेजा जा रहा था।

अधिकारियों के अनुसार, मिलावटी आटे को समृद्धि ब्रांड आटा, उत्तम ब्रांड आटा और श्याम भोग चक्की फ्रेश आटा के नाम से बेचे जाने की जानकारी मिली है।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इन नामों से कितना आटा बाजार में भेजा जा चुका है और किन क्षेत्रों में इसकी सप्लाई की गई थी। यदि प्रयोगशाला जांच में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मिल से संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है, जिससे उत्पादन और बिक्री की मात्रा का पता लगाया जा सके।

आटे में क्यों मिलाया जाता है सेलखड़ी?

एफएसडीए अधिकारियों के मुताबिक, मिलावटखोर कई बार घटिया गुणवत्ता वाले गेहूं से तैयार आटे का रंग बदलने के लिए ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। सेलखड़ी पाउडर मिलाने से आटा अधिक सफेद और चमकदार दिखाई दे सकता है।

इसके अलावा आरोप है कि इसका इस्तेमाल आटे का वजन बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। यानी कम लागत वाली सामग्री मिलाकर तैयार उत्पाद की मात्रा बढ़ाई जाती है और उसे बाजार में सामान्य आटे की तरह बेचने की कोशिश की जाती है।

यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। हालांकि, बरामद पदार्थ की वास्तविक संरचना और आटे में उसकी मात्रा के बारे में अंतिम जानकारी प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।

मौके से लिए गए चार नमूने

एफएसडीए की टीम ने कार्रवाई के दौरान अलग-अलग उत्पादों के नमूने भी लिए। अधिकारियों ने समृद्धि ब्रांड आटा, उत्तम ब्रांड आटा और श्याम भोग चक्की फ्रेश आटा का एक-एक नमूना लिया। इसके अलावा सेलखड़ी पाउडर का भी नमूना जांच के लिए सुरक्षित किया गया।

इन सभी नमूनों को प्रयोगशाला भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह पता चलेगा कि आटे में किस स्तर की मिलावट थी और बरामद पाउडर की संरचना क्या है।

महेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार, प्रथम दृष्टया आटे में सेलखड़ी की मिलावट का मामला सामने आ रहा है, लेकिन कानूनी कार्रवाई के लिए प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

मिल का कामकाज कराया गया बंद

मिल में कथित मिलावट और अवैध निर्माण गतिविधियों को देखते हुए एफएसडीए की टीम ने तत्काल प्रभाव से फैक्ट्री का कामकाज बंद करा दिया। आटा बनाने वाली मशीनों और स्टॉक को सील कर दिया गया।

अधिकारियों ने मिल संचालक के खिलाफ फतेहपुर सीकरी थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर भी दी है। आगे की कार्रवाई जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से आसपास के अन्य खाद्य कारोबारियों में भी हड़कंप मच गया है। विभाग की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही गई है।

मैनपुरी और फिरोजाबाद में भी सामने आ चुके हैं मामले

आटे में कथित रूप से सफेद पाउडर की मिलावट का मामला केवल आगरा तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। कुछ दिन पहले मैनपुरी के ज्योति खुड़िया इलाके में भी बिना लाइसेंस संचालित एक आटा मिल के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

वहां एफएसडीए ने फैक्ट्री से करीब 43 बोरियां यानी लगभग 2,150 किलो टेलकम/सेलखड़ी पाउडर और करीब 1,500 किलो तैयार मिलावटी आटा जब्त किए जाने की जानकारी दी थी।

इसके अलावा फिरोजाबाद में भी इस तरह की मिलावट का मामला सामने आने की बात अधिकारियों ने बताई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई पर जोर बढ़ गया है।

उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का विषय

आटे में किसी बाहरी पदार्थ की कथित मिलावट सिर्फ कारोबारी धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। रोजाना इस्तेमाल होने वाला आटा बड़ी संख्या में परिवारों के भोजन का हिस्सा है। ऐसे में यदि किसी उत्पाद में नियमों के विपरीत कोई पदार्थ मिलाया जाता है तो उसका असर लंबे समय तक लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

हालांकि, इस मामले में बरामद आटे को लेकर अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला जांच के बाद ही निकलेगा। इसलिए अधिकारियों की रिपोर्ट आने से पहले स्वास्थ्य पर किसी निश्चित प्रभाव का दावा करना उचित नहीं होगा।

रिपोर्ट आने के बाद होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल समृद्धि फ्लोर मिल पर कार्रवाई हो चुकी है और बरामद सामान सीज कर दिया गया है। नमूने प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है।

यदि रिपोर्ट में आटे में प्रतिबंधित या असुरक्षित पदार्थ की मिलावट की पुष्टि होती है, तो मिल संचालक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि कथित मिलावटी आटा बाजार में कितनी मात्रा में पहुंचा और किन क्षेत्रों में उसकी बिक्री हुई।

आगरा में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों में मिलावट के उस खतरे को सामने ला दिया है, जो आम उपभोक्ता की नजर से अक्सर छिपा रहता है। मिल के अंदर 1,800 किलो सेलखड़ी की बरामदगी और बड़ी मात्रा में तैयार आटे के सीज होने के बाद अब प्रयोगशाला रिपोर्ट ही बताएगी कि आखिर इस पूरे खेल की असली तस्वीर क्या थी।

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