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सोना-चांदी के भाव में फिर बड़ा खेल! लगातार दूसरे दिन टूटी कीमतें, क्या अब आने वाली है खरीदारी की सुनहरी वापसी?



भारतीय सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन नरमी देखने को मिली। 19 अगस्त 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और निवेशकों की नजर अमेरिका की ब्याज दर नीति, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम पर टिकी रही। घरेलू बाजार में सोना करीब 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी भी 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर के आसपास कारोबार करती रही।

हालांकि, वैश्विक बाजार में दिन के दौरान कुछ सुधार भी देखने को मिला। मंगलवार की तेज गिरावट के बाद बुधवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कुछ नरमी और डॉलर में कमजोरी आने से अंतरराष्ट्रीय सोने को सहारा मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल एकतरफा तेजी या गिरावट नहीं है। कीमतें बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही हैं और छोटी-सी वैश्विक खबर भी इनके भाव में बड़ा बदलाव ला सकती है।

19 अगस्त को सोने के भाव में क्यों आई नरमी?

सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड रही। जब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है, तो निवेशकों के लिए ऐसा सोना, जो खुद कोई ब्याज नहीं देता, कुछ कम आकर्षक हो जाता है।

इसके साथ ही ऊर्जा कीमतों में तेजी और महंगाई की चिंता ने भी सोने पर दबाव बनाया। अमेरिका और ईरान से जुड़े तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

हालांकि 19 अगस्त को तस्वीर थोड़ी बदली। बॉन्ड यील्ड में कुछ नरमी और डॉलर के कमजोर होने से सोने को दोबारा मजबूती मिली। यही कारण है कि घरेलू बाजार में दबाव के बावजूद वैश्विक बाजार में रिकवरी के संकेत दिखाई दिए।

घरेलू बाजार में सोना अभी भी बेहद महंगा

गिरावट के बावजूद सोना अपने ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों के आसपास बना हुआ है। 19 अगस्त को अलग-अलग बाजारों में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.53 से 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में दिखाई दी।

शहर और स्थानीय सर्राफा बाजार के अनुसार कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसके अलावा शुद्धता, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण ग्राहक को दुकान पर मिलने वाला अंतिम भाव बाजार में बताए गए रेट से अलग हो सकता है।

यही वजह है कि सोना खरीदते समय केवल 10 ग्राम की कीमत देखना पर्याप्त नहीं है। ग्राहक को अंतिम बिल में शामिल सभी शुल्कों की जानकारी भी लेनी चाहिए।

22 कैरेट सोने के खरीदारों के लिए क्या स्थिति?

ज्यादातर आभूषण 22 कैरेट सोने से बनाए जाते हैं। इसलिए शादी, त्योहार या पारिवारिक जरूरत के लिए सोना खरीदने वालों की नजर 22 कैरेट के भाव पर ज्यादा रहती है।

19 अगस्त को 22 कैरेट सोने का भाव कई प्रमुख बाजारों में करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा।

हालांकि ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को केवल सोने का बेस रेट नहीं देखना चाहिए। अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज और GST जैसे शुल्क भी शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि बाजार में बताए गए सोने के भाव और दुकान पर मिलने वाले अंतिम बिल में अंतर दिखाई देता है।

चांदी में भी जोरदार उतार-चढ़ाव

सोने के साथ चांदी भी दबाव में रही। घरेलू वायदा बाजार में चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाल के दिनों में चांदी में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। एक तरफ ब्याज दरों और डॉलर से दबाव बन रहा है, तो दूसरी तरफ औद्योगिक मांग चांदी की कीमतों को सहारा दे रही है।

चांदी की खासियत यह है कि इसकी मांग केवल निवेश और आभूषणों तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ऑटोमोबाइल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और इंडस्ट्रियल डिमांड का असर भी चांदी की कीमत पर पड़ता है।

अमेरिका की ब्याज दरों पर टिकी बाजार की नजर

इस समय सोने और चांदी के बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अमेरिका के फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है।

निवेशक यह जानना चाहते हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा। फेड की पिछली बैठक के मिनट्स पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।

अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है तो सोने को फायदा हो सकता है। इसके विपरीत यदि महंगाई को देखते हुए दरें ऊंची बनाए रखने या बढ़ाने का संकेत मिलता है तो सोने पर दबाव आ सकता है।

यही वजह है कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े सामने आते ही दुनिया भर के बुलियन बाजारों में तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

डॉलर भी तय करेगा सोने की दिशा

सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है। इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी का सोने पर सीधा असर पड़ता है।

जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है।

वहीं डॉलर मजबूत होने पर सोने की कीमत पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की दिशा पर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमत भी बनी चिंता

सोने की कीमतों पर एक और बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों का है।

अमेरिका और ईरान से जुड़े तनाव तथा मध्य पूर्व की स्थिति के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।

महंगाई बढ़ने की स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को लेकर अधिक सतर्क हो सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी अप्रत्यक्ष रूप से सोने के लिए नकारात्मक संकेत बन सकती है।

हालांकि दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग भी बढ़ सकती है। यही दो विपरीत ताकतें इस समय सोने की कीमत को लगातार ऊपर-नीचे कर रही हैं।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

19 अगस्त की बाजार चाल के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना खरीदने का यह सही समय है?

इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। अगर किसी परिवार को शादी या किसी जरूरी कार्यक्रम के लिए सोना खरीदना है तो केवल थोड़े समय की कीमतों की चाल देखकर पूरी खरीदारी रोक देना जरूरी नहीं है।

वहीं निवेश के लिए खरीदारी करने वाले लोगों के लिए बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के अनुसार चरणबद्ध निवेश की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सोने की कीमतें कभी भी तेजी से ऊपर या नीचे जा सकती हैं।

क्या गिरावट आगे भी जारी रह सकती है?

आने वाले दिनों में सोने की दिशा कई चीजों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी फेड का रुख, बॉन्ड यील्ड, डॉलर, महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक तनाव सबसे महत्वपूर्ण होंगे।

अगर बॉन्ड यील्ड और डॉलर में तेजी लौटती है तो सोने पर दोबारा दबाव बन सकता है। दूसरी ओर अगर डॉलर कमजोर रहता है और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है तो सोने में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

यानी मौजूदा समय में बाजार में दोनों संभावनाएं मौजूद हैं।

लंबी अवधि में सोने को लेकर क्या संकेत?

हाल की गिरावट के बावजूद सोने को लेकर लंबी अवधि का नजरिया पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सुरक्षित संपत्ति की तलाश जैसे कारक सोने को लंबे समय में समर्थन दे सकते हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कीमत हर समय बढ़ती रहेगी। सोने में भी बड़ी गिरावट के दौर आ सकते हैं।

19 अगस्त का बाजार यही संकेत दे रहा है कि सोना अभी बेहद ऊंचे स्तर पर है, लेकिन छोटी अवधि में इसमें तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा संकेत

सोने और चांदी की मौजूदा चाल को सिर्फ एक दिन की गिरावट या तेजी के आधार पर समझना सही नहीं होगा। हालिया तेज गिरावट के बाद वैश्विक बाजार में दोनों धातुओं ने कुछ सुधार के संकेत दिए हैं। इससे पता चलता है कि बाजार बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में अमेरिकी फेड के संकेत सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। वहीं आम खरीदारों को स्थानीय बाजार का भाव, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और GST को ध्यान में रखकर ही खरीदारी करनी चाहिए।

फिलहाल सोना और चांदी दोनों में गिरावट के बाद बाजार की नजर अगले बड़े संकेत पर है। अगर ब्याज दरों और डॉलर को लेकर माहौल बदला, तो इन दोनों कीमती धातुओं के भाव एक बार फिर बड़ी तेजी या गिरावट दिखा सकते हैं।

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