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ईरान से हजारों KM दूर अमेरिका के सीक्रेट बेस पर मंडराई रहस्यमयी चीज! ब्रिटेन के उड़े होश, अमेरिका ने नहीं खोला राज

 


नई दिल्ली। हिंद महासागर के बीच स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के बेहद रणनीतिक सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे जाने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यह सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां से लंबे समय से अमेरिकी सैन्य अभियानों को समर्थन मिलता रहा है। हालिया ड्रोन sightings की ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है, लेकिन ड्रोन की संख्या, उनका प्रकार, ऑपरेटर और उन्हें उड़ाने का उद्देश्य अभी तक सामने नहीं आया है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि डिएगो गार्सिया किसी सामान्य सैन्य ठिकाने की तरह नहीं है। यह हिंद महासागर में एक दूरदराज द्वीप पर स्थित ऐसा बेस है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और अन्य सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है। यहां मौजूद सुविधाओं में बड़ा एयरफील्ड और अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए बंदरगाह जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स से जुड़ी गतिविधियां भी यहां होती हैं।

अचानक आसमान में दिखाई दिए अज्ञात ड्रोन

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डिएगो गार्सिया के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे जाने की जानकारी सामने आई है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसे सैन्य अड्डे के ऊपर ड्रोन देखे जाने की जानकारी है।

हालांकि, ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना से जुड़ी परिचालन जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह नहीं बताया कि ड्रोन कब दिखाई दिए, उनकी संख्या कितनी थी या उन्हें कौन संचालित कर रहा था।

अमेरिकी अधिकारियों ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सैन्य अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की। अमेरिकी पैसिफिक कमांड की ओर से इतना जरूर कहा गया कि अमेरिकी सेना अपने कर्मियों और सैन्य सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क है।

यही गोपनीयता अब इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना रही है।

डिएगो गार्सिया इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक बेहद रणनीतिक सैन्य ठिकाना है। इसका स्थान अमेरिका के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से हिंद महासागर और आसपास के विस्तृत क्षेत्र में सैन्य अभियानों को समर्थन देना संभव होता है।

बेस पर एक बड़ा एयरफील्ड है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य विमानों और बॉम्बर अभियानों के लिए किया जाता रहा है। इसके अलावा यहां अमेरिकी नौसेना के बड़े जहाजों के लिए सुविधाएं मौजूद हैं।

बेस के विशाल लैगून का इस्तेमाल लॉजिस्टिक और सप्लाई जहाजों को सुरक्षित ठहराने के लिए भी किया जाता है। रिपोर्टों में यहां अमेरिकी स्पेस फोर्स से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।

यानी अगर किसी दुश्मन या संदिग्ध समूह की ओर से इस इलाके की निगरानी या घुसपैठ की कोशिश हुई है, तो यह सामान्य ड्रोन घटना से कहीं ज्यादा गंभीर सुरक्षा सवाल खड़े कर सकती है।

पहले भी बन चुका है मिसाइल निशाना

डिएगो गार्सिया की सुरक्षा को लेकर चिंता बिल्कुल नई नहीं है। इस साल ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान के दौरान ईरान की ओर से इस सैन्य ठिकाने की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों को डिएगो गार्सिया की ओर लॉन्च किया गया था, हालांकि दोनों बेस से टकराने में सफल नहीं हुईं।

ऐसे में अब अज्ञात ड्रोन दिखाई देने की खबर ने सुरक्षा चिंता को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया है।

मिसाइल और ड्रोन के खतरे में बड़ा अंतर यह है कि ड्रोन आकार में छोटे हो सकते हैं, कम ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और उनकी पहचान करना कई परिस्थितियों में कठिन हो सकता है।

समुद्र से ड्रोन आने की आशंका क्यों अहम?

डिएगो गार्सिया की भौगोलिक स्थिति इस मामले को और पेचीदा बनाती है। यह द्वीप किसी बड़े आबादी वाले इलाके के पास नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह श्रीलंका से करीब 1,000 मील दूर है और यहां सामान्य पर्यटकों या आम नागरिकों की आवाजाही बेहद सीमित है।

इसलिए बेस के ऊपर किसी ड्रोन का दिखाई देना अपने आप में सुरक्षा एजेंसियों के लिए असामान्य घटना हो सकती है।

सैन्य विशेषज्ञों के बीच लंबे समय से समुद्र से लॉन्च होने वाले ड्रोन को लेकर चिंता रही है। ऐसे ड्रोन किसी जहाज या अन्य समुद्री प्लेटफॉर्म से लॉन्च किए जा सकते हैं और उनके ऑपरेटर काफी दूरी पर रह सकते हैं।

हालांकि, डिएगो गार्सिया के मामले में अभी तक यह पता नहीं चला है कि कथित ड्रोन वास्तव में समुद्र से लॉन्च किए गए थे या नहीं।

क्या ईरान का हाथ है?

मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को देखते हुए सबसे ज्यादा सवाल इसी दिशा में उठ रहे हैं। डिएगो गार्सिया पहले ही ईरानी मिसाइल हमले के प्रयास का निशाना बन चुका है।

लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि हालिया ड्रोन घटना के पीछे ईरान का हाथ है।

ब्रिटेन और अमेरिका दोनों ने ड्रोन के ऑपरेटर की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए किसी देश को सीधे जिम्मेदार ठहराना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

ड्रोन किसी दूसरे देश, गैर-राज्य समूह या किसी अन्य स्रोत से भी आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

7 अगस्त की सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाया रहस्य

मामले को लेकर 7 अगस्त को एक अनौपचारिक अमेरिकी एयरफोर्स-संबंधित सोशल मीडिया पेज पर एक पोस्ट भी सामने आई थी। इसमें दावा किया गया था कि डिएगो गार्सिया के फ्यूल फार्म के पास ड्रोन देखे गए हैं और बेस पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है।

लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सोशल मीडिया पेज कोई आधिकारिक सैन्य संचार चैनल नहीं है।

इस पोस्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ब्रिटेन और अमेरिका के अधिकारियों ने भी कथित कर्फ्यू की पुष्टि नहीं की है। इसलिए कर्फ्यू की खबर को फिलहाल आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता।

यही वजह है कि इस मामले में सोशल मीडिया पर चल रही खबरों और आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई जानकारी को अलग-अलग रखना जरूरी है।

अमेरिका ने सुरक्षा व्यवस्था पर साधी चुप्पी

अमेरिकी अधिकारियों का रुख इस मामले में बेहद सतर्क रहा है। अमेरिकी पैसिफिक कमांड ने स्पष्ट किया कि सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा व्यवस्था और विशेष सुरक्षा उपायों के बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा नहीं की जाती।

इसका मतलब है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि ड्रोन दिखने के बाद बेस पर किस तरह के कदम उठाए गए।

क्या ड्रोन को ट्रैक किया गया? क्या उनकी उड़ान का रास्ता रिकॉर्ड हुआ? क्या उन्हें रोकने की कोशिश की गई? क्या बेस की एयर डिफेंस व्यवस्था को अलर्ट किया गया?

इन सवालों पर फिलहाल अमेरिकी और ब्रिटिश अधिकारियों ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

खुले में खड़े सैन्य विमानों को लेकर भी चिंता

डिएगो गार्सिया पर ड्रोन घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू बेस पर मौजूद सैन्य विमानों की सुरक्षा भी है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस बेस पर अमेरिकी सैन्य विमान खुले क्षेत्र में खड़े किए जाते रहे हैं। ऐसे में छोटे ड्रोन भी अगर प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाएं तो वे निगरानी से लेकर संभावित हमले तक कई तरह के खतरे पैदा कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ड्रोन के इस्तेमाल ने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा की हैं। यूक्रेन युद्ध में भी ड्रोन के जरिए दूर स्थित सैन्य लक्ष्यों पर हमले की क्षमता सामने आई है।

यही कारण है कि किसी रणनीतिक सैन्य अड्डे के ऊपर अज्ञात ड्रोन का दिखाई देना केवल एक छोटी हवाई घुसपैठ के रूप में नहीं देखा जा रहा।

क्या ड्रोन केवल निगरानी के लिए थे?

इस सवाल का जवाब अभी किसी के पास नहीं है।

ड्रोन का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। कोई उन्हें निगरानी के लिए इस्तेमाल कर सकता है, तो कोई किसी सैन्य ठिकाने की सुरक्षा व्यवस्था को समझने के लिए।

यदि किसी ड्रोन ने बेस की तस्वीरें या वीडियो जुटाने की कोशिश की हो तो यह भी अपने आप में एक गंभीर सुरक्षा चिंता हो सकती है।

लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कथित ड्रोन वास्तव में किसी निगरानी मिशन पर थे या उनका उद्देश्य कुछ और था।

सबसे बड़ा सवाल—ड्रोन आए कहां से?

डिएगो गार्सिया की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये ड्रोन आए कहां से?

क्या वे किसी समुद्री जहाज से लॉन्च हुए?

क्या वे किसी लंबी दूरी के मिशन पर थे?

क्या किसी सैन्य या गैर-सैन्य संगठन ने उन्हें संचालित किया?

या फिर यह किसी परीक्षण अथवा अन्य गतिविधि का हिस्सा था?

इनमें से किसी भी संभावना की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी अधिकारी फिलहाल केवल यह स्वीकार कर रहे हैं कि ड्रोन देखे जाने की रिपोर्ट सामने आई है और बेस की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है।

भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित है, इसलिए इस बेस पर होने वाली किसी भी बड़ी सुरक्षा घटना का रणनीतिक महत्व केवल अमेरिका और ब्रिटेन तक सीमित नहीं रहता।

हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है। यहां से वैश्विक व्यापार के बड़े समुद्री मार्ग गुजरते हैं और भारत सहित कई देशों की सुरक्षा एवं आर्थिक गतिविधियां इस क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।

इसलिए डिएगो गार्सिया की सुरक्षा में किसी भी बड़ी कमजोरी या वहां सैन्य तनाव बढ़ने की स्थिति का असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है।

अभी रहस्य बरकरार

डिएगो गार्सिया के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे जाने की ब्रिटेन ने पुष्टि कर दी है, लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा रहस्य अभी भी बरकरार है—आखिर ये ड्रोन किसके थे और उनका मकसद क्या था?

अमेरिका और ब्रिटेन ने ऑपरेटर, ड्रोन की संख्या, प्रकार और संभावित लॉन्च पॉइंट को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। वहीं सोशल मीडिया पर सामने आई कथित कर्फ्यू की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सैन्य ठिकानों में से एक के ऊपर अज्ञात ड्रोन दिखाई देने से सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर उठे हैं। अब नजर इस बात पर है कि जांच आगे बढ़ने पर इन ड्रोन की असली पहचान और उनके मिशन के बारे में क्या जानकारी सामने आती है।

नोट: इस खबर में ड्रोन की पहचान, ऑपरेटर और उद्देश्य को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार केवल ड्रोन देखे जाने की पुष्टि हुई है।

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