नमक समझकर डाल दिया कुछ ऐसा… खाना खाते ही 25 बच्चों की बिगड़ी हालत, स्कूल में मचा हड़कंप!
बिहार के नालंदा जिले से मिड-डे मील को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में नमक की जगह गलती से कपड़े धोने वाला सर्फ डाल दिया गया। खाना खाने के कुछ ही देर बाद दो दर्जन से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई बच्चों को उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत हुई। आनन-फानन में सभी प्रभावित बच्चों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
यह मामला नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड क्षेत्र स्थित मध्य विद्यालय परासी का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, स्कूल में रोज की तरह बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार किया गया था। भोजन में चावल के साथ सोयाबीन और आलू की सब्जी बनाई गई थी। खाना परोसे जाने के बाद बच्चों ने सब्जी में नमक कम होने की शिकायत की। इसके बाद रसोई में मौजूद रसोइया ने भोजन में नमक डालने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान ऐसी गलती हो गई, जिसने कई बच्चों की तबीयत बिगाड़ दी।
एक ही जगह रखे थे नमक और सर्फ के डिब्बे
बताया जा रहा है कि स्कूल के रसोईघर में नमक और कपड़े धोने वाले सर्फ का डिब्बा एक ही स्थान पर रखा हुआ था। इसी वजह से रसोइया से कथित तौर पर पहचान करने में गलती हो गई और उसने नमक की जगह सर्फ डाल दिया। इसके बाद वही भोजन बच्चों को परोस दिया गया।
शुरुआत में किसी को इस गलती का अंदाजा नहीं हुआ। बच्चों ने खाना खाना शुरू किया और कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। कई बच्चों ने पेट में परेशानी, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की। कुछ बच्चों की हालत देखकर स्कूल में मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच भी हड़कंप मच गया।
यूपी में मिड-डे मिल में सब्जी की जगह पर नमक खिलाया जाता है। लेकिन बिहार में मिड-डे मील में नमक की जगह सर्फ खिला दिया। जिससे दो दर्जन से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए हैं।
— गुरु प्रसाद यादव, लखनऊ (@guruprasadyada5) August 18, 2026
नालंदा में नूरसराय के मध्य विद्यालय परासी के स्कूल में बच्चों को चावल के साथ सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी।… pic.twitter.com/mC4sbyW1a2
घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाने की व्यवस्था की गई। प्रभावित बच्चों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चों की जांच की गई और उनकी स्थिति पर नजर रखी गई।
खाना खाते ही शुरू हो गई उल्टी और चक्कर की शिकायत
घटना से जुड़े विवरण के अनुसार, भोजन करने के तुरंत बाद बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दिखाई देने लगी। कुछ बच्चों को उल्टी हुई, जबकि कई बच्चों ने चक्कर आने और कमजोरी महसूस होने की शिकायत की। अचानक बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों में चिंता फैल गई।
बच्चों के बीमार होने की खबर जैसे ही उनके परिवारों तक पहुंची, अभिभावक भी अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल परिसर में बच्चों के परिजनों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई अपने बच्चे की स्थिति जानने के लिए परेशान दिखाई दिया। हालांकि चिकित्सकों की निगरानी में बच्चों का इलाज शुरू होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आने लगी।
सिविल सर्जन ने बताया- सभी बच्चे खतरे से बाहर
नालंदा के सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह के मुताबिक, प्रभावित सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज चल रहा है। बच्चों की स्थिति पर चिकित्सकों की टीम नजर रख रही है। इस बयान के बाद अभिभावकों ने राहत की सांस ली।
हालांकि घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की व्यवस्था और रसोईघर में खाद्य सामग्री रखने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नमक और कपड़े धोने वाले सर्फ जैसे पदार्थों को एक ही जगह रखना किसी भी स्थिति में जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी छोटी सी लापरवाही का परिणाम बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
रसोईघर की व्यवस्था पर उठे सवाल
स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई और खाद्य सामग्री की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। नमक, मसाले, तेल और अन्य खाद्य सामग्री को अलग-अलग और स्पष्ट पहचान वाले कंटेनरों में रखा जाना चाहिए। वहीं साबुन, सर्फ, फिनाइल या अन्य रासायनिक पदार्थों को खाद्य सामग्री से पूरी तरह अलग रखना जरूरी है।
नूरसराय के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खाद्य सामग्री और कपड़े धोने वाले सर्फ को एक ही जगह क्यों रखा गया था। यदि दोनों डिब्बों को अलग स्थान पर रखा जाता या उन पर बड़े और स्पष्ट नाम लिखे होते, तो इस तरह की गलती की संभावना काफी कम हो सकती थी।
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। बड़ी संख्या में बच्चे रोजाना स्कूल के भोजन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसे तैयार करने और परोसने की प्रक्रिया में भी विशेष सावधानी जरूरी होती है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में चिंता का माहौल है। परिवारों का कहना है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि भोजन तैयार करने के दौरान किसी सामग्री की पहचान में गलती हो सकती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, रसोईघर में इस्तेमाल होने वाली खाद्य और गैर-खाद्य सामग्री को अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। रसोइयों को भी नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी सामग्री को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा न हो। भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जांच की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है। घटना में सर्फ किस मात्रा में भोजन में मिला और इसके कारण बच्चों पर कितना प्रभाव पड़ा, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है।
यह घटना एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। बच्चों के भोजन के मामले में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए स्कूल की रसोई में खाद्य सामग्री के भंडारण, रसोइयों की जिम्मेदारी और भोजन की जांच की प्रक्रिया को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है।
नालंदा की इस घटना में फिलहाल सबसे राहत की बात यही है कि सिविल सर्जन के अनुसार सभी प्रभावित बच्चे खतरे से बाहर हैं। लेकिन जिस तरह नमक की जगह सर्फ भोजन में पहुंच गया, उसने स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मामले की जांच में लापरवाही के कौन से कारण सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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