Breaking News

जन्म के बाद खुला शरीर का अनोखा राज! बच्चे में मिलीं तीन जननांग संरचनाएं, डॉक्टरों ने तुरंत उठाया बड़ा कदम



इराक: चिकित्सा जगत में कुछ जन्मजात स्थितियां इतनी दुर्लभ होती हैं कि डॉक्टरों के सामने भी ऐसा मामला पहली बार आता है। इराक के दुहोक क्षेत्र से सामने आया तीन जननांग वाले बच्चे का मामला भी ऐसी ही बेहद दुर्लभ चिकित्सकीय घटना थी। इस मामले ने दुनियाभर में लोगों का ध्यान खींचा था, क्योंकि मेडिकल साहित्य में इसे मानव में ट्राइफेलिया (Triphallia) का पहला प्रकाशित मामला बताया गया था।

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस घटना को कई बार हाल की घटना की तरह पेश किया जाता है, जबकि मूल मेडिकल केस रिपोर्ट वर्ष 2020 में प्रकाशित हुई थी। उस समय बच्चा तीन महीने का था और उसके शरीर में सामान्य जननांग के अलावा दो अतिरिक्त छोटी संरचनाएं मौजूद थीं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि दोनों अतिरिक्त संरचनाएं मुख्य जननांग से अलग स्थान पर विकसित हुई थीं। जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि इनमें मूत्रमार्ग मौजूद नहीं था। इसके कारण वे सामान्य शारीरिक कार्य में हिस्सा नहीं ले सकती थीं। डॉक्टरों ने सर्जरी करके दोनों अतिरिक्त संरचनाओं को हटा दिया।

बच्चे को अस्पताल क्यों लाया गया था?

मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के माता-पिता उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे क्योंकि उसके बाएं अंडकोष के आसपास सूजन दिखाई दे रही थी। डॉक्टरों ने जब बच्चे की शारीरिक जांच शुरू की तो उन्हें एक असामान्य संरचना दिखाई दी।

करीब से जांच करने पर पता चला कि मुख्य जननांग के अलावा शरीर में दो और छोटी जननांग जैसी संरचनाएं मौजूद थीं।

पहली अतिरिक्त संरचना लगभग 2 सेंटीमीटर लंबी थी। उसमें जननांग का सिरा यानी ग्लांस भी विकसित था। यह मुख्य जननांग की जड़ के पास जुड़ी हुई थी।

दूसरी संरचना लगभग 1 सेंटीमीटर लंबी बताई गई। यह अंडकोष के नीचे की तरफ मौजूद थी।

डॉक्टरों के लिए यह स्थिति बेहद असामान्य थी क्योंकि इस तरह की जन्मजात संरचना के मामले मेडिकल इतिहास में बहुत कम देखने को मिलते हैं।

तीनों संरचनाएं क्या काम करती थीं?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। बच्चे के शरीर में तीन संरचनाएं दिखाई देने का मतलब यह नहीं था कि तीनों सामान्य और पूरी तरह कार्यशील जननांग थे।

डॉक्टरों की जांच में पाया गया कि दोनों अतिरिक्त संरचनाओं में मूत्रमार्ग नहीं था। यानी उनसे पेशाब बाहर निकलने की सामान्य प्रक्रिया संभव नहीं थी।

मुख्य जननांग ही सामान्य रूप से विकसित था और शरीर के सामान्य कार्य में उपयोगी था।

इसी कारण अतिरिक्त दोनों संरचनाओं को चिकित्सकीय रूप से हटाने का फैसला लिया गया।

ऑपरेशन के बाद क्या हुआ?

डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिए दोनों अतिरिक्त संरचनाओं को हटा दिया। उपलब्ध मेडिकल जानकारी के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे को बाद में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे की नियमित निगरानी भी की। लगभग एक साल तक फॉलो-अप में उसकी स्थिति अच्छी बताई गई और किसी बड़ी समस्या की जानकारी सामने नहीं आई।

इस तरह दुर्लभ जन्मजात स्थिति के बावजूद बच्चे का इलाज सफलतापूर्वक किया गया।

आखिर क्या है ट्राइफेलिया?

ट्राइफेलिया एक बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति है जिसमें व्यक्ति के शरीर में तीन penile structures विकसित हो जाती हैं।

इससे मिलती-जुलती स्थिति को डिफेलिया कहा जाता है, जिसमें दो जननांग होते हैं।

मेडिकल साहित्य में डिफेलिया के मामले ट्राइफेलिया की तुलना में अधिक दर्ज हुए हैं। अतिरिक्त जननांग की स्थिति को व्यापक रूप से सुपरन्यूमेरेरी पेनिस भी कहा जाता है।

ऐसे मामलों में अतिरिक्त संरचना का आकार, स्थान और उसकी आंतरिक बनावट अलग-अलग हो सकती है। कुछ अतिरिक्त संरचनाएं बहुत छोटी होती हैं, जबकि कुछ मामलों में उनका विकास अधिक हो सकता है।

कितनी दुर्लभ है यह स्थिति?

सुपरन्यूमेरेरी पेनिस बेहद दुर्लभ जन्मजात स्थिति है। मेडिकल साहित्य में इसकी अनुमानित दर लगभग 50 से 60 लाख जीवित जन्मों में एक बताई गई है।

डिफेलिया के करीब 100 मामलों का उल्लेख मेडिकल साहित्य में किया जा चुका है। लेकिन तीन जननांग वाले मामलों की संख्या इससे भी बेहद कम है।

इसी वजह से 2020 में प्रकाशित इराकी बच्चे का मामला चिकित्सा जगत में इतना महत्वपूर्ण माना गया था।

हालांकि बाद के वर्षों में एक और ट्राइफेलिया केस की मेडिकल रिपोर्ट सामने आई। इसलिए अब यह कहना सही नहीं होगा कि इराक का मामला दुनिया में ऐसा अकेला मामला है।

क्या तीन जननांग होना आनुवंशिक बीमारी है?

ऐसे मामले देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर बच्चे के शरीर में ऐसी असामान्यता क्यों पैदा होती है।

इसका कोई एक निश्चित कारण हर मामले में नहीं बताया जा सकता।

भ्रूण के विकास के दौरान जननांगों की संरचना कई जटिल जैविक प्रक्रियाओं से बनती है। इस दौरान होने वाली असामान्य विकास प्रक्रिया के कारण कुछ बच्चों में शरीर की संरचना सामान्य से अलग हो सकती है।

इराक के इस मामले में परिवार के इतिहास और गर्भावस्था से जुड़े संभावित कारणों की भी जानकारी ली गई थी, लेकिन किसी एक निश्चित कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ऐसी स्थिति हमेशा किसी पारिवारिक आनुवंशिक समस्या के कारण ही होती है।

क्या गर्भावस्था के दौरान किसी गलती से ऐसा होता है?

सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी जन्मजात स्थितियों को गर्भावस्था के दौरान किसी खास दवा या गलती से जोड़ दिया जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई निश्चित प्रमाण नहीं था।

गर्भ में बच्चे का विकास बहुत जटिल प्रक्रिया है। शरीर के अलग-अलग अंगों का निर्माण कई चरणों में होता है और कभी-कभी विकास संबंधी असामान्यता के कारण किसी अंग की संरचना सामान्य से अलग हो सकती है।

इसलिए किसी विशेष कारण की पुष्टि किए बिना माता-पिता को जिम्मेदार ठहराना या किसी एक दवा को इसका कारण बताना उचित नहीं है।

क्या यह बच्चे के लिए खतरनाक था?

ऐसी जन्मजात स्थिति हर बार जानलेवा नहीं होती। हालांकि, डॉक्टरों के लिए यह देखना जरूरी होता है कि शरीर के दूसरे अंग सामान्य रूप से विकसित हुए हैं या नहीं।

ऐसे मामलों में मूत्रमार्ग, मूत्राशय, गुर्दे, अंडकोष और आसपास की अन्य संरचनाओं की जांच की जा सकती है।

यदि अतिरिक्त संरचना शरीर के सामान्य कार्य में बाधा डाल रही हो या भविष्य में संक्रमण, दर्द या अन्य जटिलता का खतरा हो तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

इस बच्चे के मामले में अतिरिक्त संरचनाओं में मूत्रमार्ग नहीं होने के कारण उन्हें हटाया गया।

भारत में भी सामने आया था ऐसा दावा

कुछ वर्ष पहले भारत से भी एक बच्चे के शरीर में अतिरिक्त जननांग से जुड़ा मामला मीडिया में चर्चा में आया था। हालांकि उस मामले में विस्तृत वैज्ञानिक मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे इराक के प्रकाशित मेडिकल केस के समान प्रमाणित घटना नहीं माना जा सकता।

यही वजह है कि किसी भी असामान्य चिकित्सा घटना को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट और वैज्ञानिक मेडिकल रिपोर्ट के बीच अंतर समझना जरूरी है।

किसी घटना का वायरल होना अपने आप में उसके वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होने का सबूत नहीं है।

सोशल मीडिया पर क्यों फैलती हैं ऐसी खबरें?

दुर्लभ जन्मजात मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर सनसनीखेज दावे तेजी से फैलते हैं। कई बार वर्षों पुरानी घटनाओं को वर्तमान की घटना बताकर साझा किया जाता है।

इराक का यह मामला भी इसका उदाहरण है। मूल घटना कई वर्ष पुरानी है, लेकिन इसकी तस्वीरें और जानकारी समय-समय पर फिर से वायरल हो जाती हैं।

कई पोस्ट में यह दावा किया जाता है कि यह दुनिया में पहला और एकमात्र मामला है। लेकिन चिकित्सा साहित्य में बाद में अन्य संबंधित मामलों की जानकारी भी सामने आई है।

इसलिए ऐसी खबरों को पढ़ते समय घटना की तारीख और मेडिकल स्रोतों की विश्वसनीयता देखना बेहद जरूरी है।

क्या तीनों संरचनाओं को रखना जरूरी होता है?

ऐसे मामलों में डॉक्टर स्थिति के अनुसार फैसला लेते हैं। यदि अतिरिक्त संरचना पूरी तरह विकसित नहीं है या शरीर के सामान्य कार्य में बाधा डाल सकती है तो उसे हटाया जा सकता है।

लेकिन हर मरीज में उपचार का तरीका एक जैसा नहीं होता।

डॉक्टर पहले यह पता करते हैं कि अतिरिक्त संरचना में कौन से ऊतक मौजूद हैं, क्या उसमें मूत्रमार्ग है, मुख्य जननांग से उसका संबंध क्या है और क्या शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हैं।

इसके बाद सर्जरी या निगरानी का निर्णय लिया जाता है।

मेडिकल विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

दुर्लभ बीमारियों और जन्मजात असामान्यताओं के मामलों को मेडिकल जर्नल में दर्ज करने का मुख्य उद्देश्य भविष्य में डॉक्टरों को ऐसे मामलों की पहचान और इलाज में मदद करना होता है।

इराक के बच्चे का मामला भी इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक संरचना, जांच, सर्जरी और फॉलो-अप की जानकारी दर्ज की।

इससे दुनिया के अन्य डॉक्टरों को भी ऐसी असामान्य जन्मजात स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है।

इराक में सामने आया तीन जननांग वाले बच्चे का मामला निश्चित रूप से चिकित्सा विज्ञान की बेहद दुर्लभ घटनाओं में से एक था। बच्चे में सामान्य जननांग के अलावा दो अतिरिक्त छोटी संरचनाएं मौजूद थीं। इनमें से एक लगभग 2 सेंटीमीटर और दूसरी करीब 1 सेंटीमीटर लंबी थी।

जांच में पाया गया कि दोनों अतिरिक्त संरचनाओं में मूत्रमार्ग नहीं था। इसलिए वे सामान्य शारीरिक कार्य में हिस्सा नहीं ले सकती थीं। डॉक्टरों ने सर्जरी करके दोनों अतिरिक्त संरचनाओं को हटा दिया और बाद की निगरानी में बच्चे की स्थिति अच्छी रही।

इस घटना को मेडिकल साहित्य में ट्राइफेलिया के नाम से दर्ज किया गया। हालांकि यह घटना दुर्लभ है, लेकिन इसे किसी चमत्कार या रहस्यमयी घटना के बजाय एक दुर्लभ जन्मजात चिकित्सकीय स्थिति के रूप में समझना ज्यादा सही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी खबरों को सोशल मीडिया की सनसनीखेज भाषा में देखने के बजाय वैज्ञानिक जानकारी और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर समझना चाहिए। किसी बच्चे में जन्म के समय असामान्य शारीरिक संरचना दिखाई देने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच और उचित चिकित्सा सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

यह घटना हाल की नहीं है। मूल मेडिकल केस वर्ष 2020 में प्रकाशित हुआ था। यह लेख उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी को सरल भाषा में समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है।

कोई टिप्पणी नहीं