‘उम्र मत देखो… आजकल ये चलता है’—38 साल की टीचर के जाल में फंसा 11वीं का छात्र, एक साल बाद खुला ऐसा राज कि मचा हड़कंप
मुंबई से सामने आया एक बेहद गंभीर मामला शिक्षा जगत और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। एक महिला शिक्षक पर अपने ही नाबालिग छात्र का यौन शोषण करने का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले में महिला शिक्षक और उसकी एक कथित सहयोगी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले की जांच के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
नाबालिग की पहचान सार्वजनिक न हो, इसलिए उसके नाम और आरोपी महिला शिक्षक के नाम को बदला गया है। नाबालिग को यहां ‘मिहिर’ और आरोपी शिक्षक को ‘शोमिता’ नाम से संबोधित किया गया है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप एक ऐसे व्यक्ति पर लगा है, जिसे छात्र अपने शिक्षक के रूप में देखता था। शिक्षक और छात्र के बीच भरोसे के रिश्ते का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में आरोपी महिला के अलावा और कौन लोग शामिल थे और क्या किसी अन्य छात्र के साथ भी ऐसा व्यवहार किया गया था।
वार्षिक कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान हुई पहली मुलाकात
बताया जा रहा है कि दिसंबर 2023 में मुंबई के एक इंटर कॉलेज में वार्षिक कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। स्कूल के छात्र अलग-अलग कार्यक्रमों की प्रैक्टिस कर रहे थे। इसी दौरान 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र को ग्रुप डांस के लिए चुना गया था।
इसी दौरान उसकी मुलाकात स्कूल में पढ़ाने वाली 38 वर्षीय महिला शिक्षक से हुई। शुरुआत में बातचीत सामान्य शिक्षक-छात्र संबंधों की तरह ही थी। शिक्षक ने छात्र से बातचीत शुरू की और इसके बाद कथित तौर पर उससे लगातार संपर्क में रहने लगी।
छात्र को शुरू में इस व्यवहार में कुछ असामान्य नहीं लगा। लेकिन पुलिस की जांच के मुताबिक, कुछ समय बाद महिला शिक्षक ने उसके साथ अनुचित संबंध बनाने की कोशिश की।
छात्र ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और महिला शिक्षक से दूरी बनानी शुरू कर दी। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी शिक्षक ने उससे संपर्क बनाए रखा।
कथित तौर पर दोस्त के जरिए बनाया दबाव
मामले की जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि महिला शिक्षक ने छात्र को अपने प्रभाव में लाने के लिए उसकी एक परिचित लड़की की मदद ली।
बताया गया है कि यह लड़की महिला शिक्षक की भी परिचित थी। आरोप है कि उसने छात्र को समझाने की कोशिश की कि उम्र में काफी अंतर होने के बावजूद दोनों के बीच संबंध सामान्य हैं।
कथित तौर पर छात्र से बार-बार इस विषय पर बातचीत की गई और उसे महिला शिक्षक के करीब आने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का प्रयास किया गया।
नाबालिगों के मामलों में इस तरह का कथित प्रभाव या दबाव विशेष रूप से गंभीर माना जाता है। कानून नाबालिग की सहमति को वयस्कों के समान नहीं मानता और बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा देने के लिए विशेष प्रावधान मौजूद हैं।
छात्र के साथ कथित तौर पर बढ़ता गया संपर्क
पुलिस के मुताबिक, महिला शिक्षक ने छात्र से मिलने के लिए अलग-अलग जगहों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि स्कूल के बाद वह छात्र को अपने साथ ले जाती थी और उसके साथ अनुचित व्यवहार करती थी।
समय के साथ यह संपर्क कथित तौर पर लगातार बढ़ता गया। छात्र के व्यवहार में भी बदलाव आने लगा। बताया गया है कि वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा और परिवार से भी कई बातें छिपाने लगा।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि छात्र पर किस तरह का दबाव था और क्या उसे धमकाया भी गया था।
होटल में ले जाने का भी आरोप
मामले में एक गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि महिला शिक्षक छात्र को महंगे होटलों में ले जाती थी। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है।
आरोप है कि महिला शिक्षक ने छात्र को शराब भी दी और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। हालांकि इस मामले से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे मामलों में पुलिस होटल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, बुकिंग डिटेल और डिजिटल कम्युनिकेशन जैसे सबूतों की जांच कर सकती है। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
छात्र की मानसिक स्थिति को लेकर भी सामने आई जानकारी
बताया गया है कि इस कथित घटनाक्रम के दौरान छात्र मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। उसके व्यवहार में बदलाव परिवार के लोगों ने भी महसूस किया।
आरोप है कि महिला शिक्षक ने छात्र को चिंता कम करने वाली दवाएं भी दीं। इस दावे की भी पुलिस जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छात्र को वास्तव में कौन सी दवाएं दी गईं और किस परिस्थिति में दी गईं।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नाबालिग को किसी भी प्रकार की दवा देना बिना उचित चिकित्सकीय निगरानी के गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
12वीं के बाद भी संपर्क करने का आरोप
समय बीतने के साथ छात्र की 12वीं की पढ़ाई पूरी होने लगी। कथित तौर पर छात्र को उम्मीद थी कि स्कूल खत्म होने के बाद वह इस पूरे मामले से बाहर निकल सकेगा।
लेकिन पुलिस के मुताबिक, स्कूल छोड़ने के बाद भी महिला शिक्षक ने कथित तौर पर उससे संपर्क बनाए रखने की कोशिश की। आरोप है कि उसने अपने घरेलू स्टाफ के माध्यम से भी छात्र से संपर्क करने का प्रयास किया।
इसके बाद छात्र ने कथित तौर पर अपने परिवार को पूरी बात बताने का फैसला किया। परिवार को जानकारी मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
परिवार की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
छात्र के परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और महिला शिक्षक तथा कथित तौर पर उसकी मदद करने वाली महिला को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाला विशेष कानून है।
नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बच्चे की सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता पर विशेष जोर देता है। इसी वजह से पीड़ित की वास्तविक पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
आरोपी की कार भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान महिला शिक्षक की कार को भी पुलिस ने जब्त किया है। आरोप है कि इसी वाहन का इस्तेमाल छात्र को अलग-अलग जगह ले जाने के लिए किया गया था।
अब पुलिस वाहन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके अलावा CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि आरोपी और छात्र के बीच संपर्क कब-कब हुआ।
मोबाइल और लैपटॉप की जांच से खुल सकते हैं राज
पुलिस ने महिला शिक्षक के मोबाइल फोन और लैपटॉप को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। जांच एजेंसियों को इन उपकरणों से कथित तौर पर कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल सामग्री मिलने की बात कही जा रही है।
पुलिस इन डिजिटल उपकरणों से चैट, कॉल रिकॉर्ड, तस्वीरें, वीडियो, ईमेल और अन्य जानकारी की जांच कर सकती है। इनसे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि छात्र से संपर्क कैसे शुरू हुआ और कथित तौर पर यह संपर्क कितने समय तक चलता रहा।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या आरोपी महिला शिक्षक ने किसी अन्य नाबालिग छात्र को भी इसी तरह निशाना बनाया था। पुलिस इसी दिशा में भी जांच कर रही है।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक को किया निलंबित
मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने महिला शिक्षक को निलंबित कर दिया है। प्रबंधन की ओर से जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही गई है।
शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक और छात्रों के बीच पेशेवर सीमाओं तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नियम होना बेहद जरूरी है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और शिकायत तंत्र को कितना मजबूत बनाया गया है।
जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है। महिला शिक्षक और दूसरी आरोपी महिला के खिलाफ लगाए गए आरोपों की कानूनी जांच होनी बाकी है। FIR या गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होना नहीं माना जाता। अदालत में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर होगी।
पुलिस अब डिजिटल सबूतों, गवाहों, वाहन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
यह मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। स्कूलों और कॉलेजों में भी ऐसा सुरक्षित वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चे किसी भी अनुचित व्यवहार की जानकारी बिना डर के अभिभावकों, स्कूल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दे सकें।
इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी अब जांच में सामने आने वाले तथ्य हैं। मोबाइल और लैपटॉप से मिले कथित डिजिटल सबूत, संबंधित लोगों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं पीड़ित नाबालिग की पहचान और गरिमा की रक्षा करना इस तरह के मामले में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।

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