हरियाली तीज पर छिपा है बड़ा रहस्य! इन राशियों पर बरस सकती है भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष कृपा
नई दिल्ली: सावन के महीने में आने वाला हरियाली तीज का पर्व हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है और सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। साल 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। विभिन्न पंचांगों में स्थान के अनुसार तिथि और मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
हरियाली तीज केवल एक व्रत या पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, प्रेम, दांपत्य जीवन और स्त्री शक्ति से जुड़ी परंपराओं का भी उत्सव है। सावन के दौरान चारों तरफ हरियाली छा जाती है, बारिश से वातावरण सुहावना हो जाता है और इसी प्राकृतिक सौंदर्य के बीच महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं, चूड़ियां पहनती हैं और सजे हुए झूलों का आनंद लेती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन तथा माता पार्वती की कठोर तपस्या की स्मृति से जुड़ी हुई है। इसी कारण इस दिन शिव-पार्वती की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
15 अगस्त को ही क्यों मनाई जा रही है हरियाली तीज?
हरियाली तीज सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2026 में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम से शुरू होकर 15 अगस्त को शाम तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जा रहा है।
पंचांग गणना के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम लगभग 6:46 से 6:48 बजे के आसपास शुरू होकर 15 अगस्त की शाम करीब 5:28 से 5:30 बजे तक रहने की जानकारी विभिन्न पंचांगों में दी गई है। स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
यही वजह है कि इस साल हरियाली तीज को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच भ्रम की स्थिति भी बनी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार पर्व 15 अगस्त को मनाया जा रहा है।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व क्या है?
हरियाली तीज का सबसे बड़ा धार्मिक संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी।
माता पार्वती की तपस्या, भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी घटना की स्मृति में हरियाली तीज का पर्व मनाए जाने की मान्यता है।
इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करते हुए महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस व्रत को रखने की परंपरा का पालन करती हैं।
हरियाली तीज पर पूजा का शुभ समय
हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए अलग-अलग पंचांगों में स्थान के अनुसार मुहूर्त दिए जाते हैं। सामान्य रूप से ब्रह्म मुहूर्त, प्रातःकालीन पूजा, अभिजीत मुहूर्त और प्रदोष काल को धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रकाशित पंचांग विवरण के अनुसार 2026 में हरियाली तीज के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 बजे से 5:35 बजे तक बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर के आसपास रहता है। आपके शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार इन समयों में अंतर हो सकता है।
प्रयागराज के स्थानीय पंचांग के अनुसार 15 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त लगभग 4:09 से 4:52 बजे, अभिजीत मुहूर्त 11:41 से 12:33 बजे और शाम की संध्या का समय लगभग 6:38 से 7:44 बजे बताया गया है।
इसलिए यदि आप किसी विशेष शहर में पूजा कर रहे हैं तो स्थानीय पंचांग के मुहूर्त को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
प्रदोष काल में शिव-पार्वती पूजा का महत्व
हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरे दिन की जा सकती है, लेकिन शाम का समय धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
शाम के समय घर में पूजा स्थल को साफ करके शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया जाता है।
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है।
पूजा के अंत में आरती और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
हरियाली तीज पर कौन-कौन सी चीजें चढ़ाई जाती हैं?
हरियाली तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को अलग-अलग प्रकार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान शिव को सामान्य रूप से जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। माता पार्वती को सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, चुनरी, बिंदी, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।
कई स्थानों पर महिलाएं माता पार्वती को हरे रंग के वस्त्र भी अर्पित करती हैं। पूजा सामग्री में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और पूजा की भावना मानी जाती है।
हरियाली तीज की पूजा विधि
हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए।
पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। यदि परिवार की परंपरा हो तो मिट्टी या अन्य सामग्री से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जा सकती है।
इसके बाद दीपक और धूप जलाएं।
सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
भगवान शिव को जल और दूध अर्पित करें। बेलपत्र, पुष्प और अन्य सामग्री चढ़ाएं। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा पढ़ें या किसी से सुनें। शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करें और अपने परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।
शाम के समय दोबारा पूजा करके आरती करें।
हरियाली तीज पर हरे रंग का इतना महत्व क्यों?
हरियाली तीज के नाम में ही “हरियाली” शब्द शामिल है। सावन के दौरान प्रकृति चारों तरफ से हरे रंग में ढक जाती है। पेड़-पौधों में नई हरियाली आती है और बारिश के कारण वातावरण में नई ऊर्जा दिखाई देती है।
इसी प्राकृतिक सौंदर्य को पर्व से जोड़ते हुए महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं। हरी चूड़ियां, हरी साड़ी या हरे रंग के अन्य वस्त्र पहनने की परंपरा कई क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
हरे रंग को प्रकृति, विकास और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए हरियाली तीज पर हरे रंग का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष माना जाता है।
झूले और मेहंदी के बिना अधूरी मानी जाती है तीज की खुशी
हरियाली तीज के दौरान झूला झूलने की परंपरा बेहद लोकप्रिय है। पेड़ों पर सजाए गए झूलों पर महिलाएं और युवतियां सावन के गीत गाती हैं और त्योहार का आनंद लेती हैं।
मेहंदी भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महिलाएं हाथों और पैरों पर सुंदर मेहंदी लगाती हैं। चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और पारंपरिक आभूषण पहनकर महिलाएं त्योहार को उत्साह के साथ मनाती हैं।
कई क्षेत्रों में मायके से बेटी के लिए कपड़े, मिठाई, श्रृंगार सामग्री और अन्य उपहार भेजने की परंपरा भी है, जिसे सिंधारा या सिंगारा तीज की परंपराओं से जोड़ा जाता है।
हरियाली तीज का व्रत कौन रखता है?
हरियाली तीज का व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के बीच लोकप्रिय है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
कुछ अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।
कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखने की परंपरा का पालन करती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए लंबे समय तक बिना पानी या भोजन के रहने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, गर्भावस्था, दवाओं की आवश्यकता या अन्य चिकित्सकीय परिस्थिति में व्रत का तरीका अपने डॉक्टर और परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार तय करना चाहिए।
हरियाली तीज व्रत के बारे में क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि शिव-पार्वती की पूजा से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।
व्रत कथा सुनने और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता भी है। कुछ परंपराओं में संतान सुख और परिवार की समृद्धि से भी इस पर्व को जोड़ा जाता है।
हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका उद्देश्य आस्था और आध्यात्मिक विश्वास से जुड़ा है। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस साल हरियाली तीज क्यों है खास?
2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त को पड़ रही है। इसी दिन भारत का स्वतंत्रता दिवस भी है। यानी इस बार देश के लिए राष्ट्रीय महत्व का दिन और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व एक ही तारीख पर पड़ रहे हैं।
इसके अलावा कुछ ज्योतिषीय विश्लेषणों में इस वर्ष गुरु की स्थिति को हरियाली तीज के संदर्भ में विशेष बताया गया है और इसे विवाह, संतान, ज्ञान, धन तथा सौभाग्य से जुड़े विषयों के लिए शुभ संकेतों से जोड़ा गया है। हालांकि ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और व्यक्ति-विशेष का फल उसकी पूरी जन्मकुंडली के आधार पर अलग माना जाता है।
पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
हरियाली तीज के दिन पूजा करते समय सबसे पहले मन को शांत रखना चाहिए। पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करें।
व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। निर्जला व्रत परंपरा का हिस्सा हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने पर शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।
पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री साफ और शुद्ध रखें। परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत कथा और पूजा विधि का पालन करें।
साथ ही यह भी याद रखें कि पर्व का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि परिवार, रिश्तों और समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ाना भी है।
हरियाली तीज 2026 इस बार 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, तपस्या और पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस पर्व में भाग लेती हैं।
पूजा में भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं, जबकि माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ाने की परंपरा है। हरे वस्त्र, मेहंदी, चूड़ियां, झूले और सावन के गीत इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।
इस साल तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम तक रहने के कारण हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को रखा जा रहा है।
ध्यान रखें कि पूजा के सटीक मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना सबसे उचित रहेगा।

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