Viral Video : 1 लाख की डील, 50-50 हजार का बंटवारा… लेकिन जैसे ही जेब में पहुंचे नोट, अचानक आ गई विजिलेंस! फिर जो हुआ…
ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग से जुड़े दो कर्मचारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोप है कि विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर एक व्यक्ति से 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। रकम को लेकर दोनों के बीच कथित तौर पर बराबर हिस्सेदारी तय थी। लेकिन जिस व्यक्ति से पैसे मांगे गए, उसने मामले की जानकारी पहले ही विजिलेंस को दे दी। इसके बाद विजिलेंस टीम ने पूरी कार्रवाई की तैयारी की और जैसे ही कथित रिश्वत की रकम दोनों आरोपियों तक पहुंची, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ लिया।
इस कार्रवाई के बाद आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग में हड़कंप मच गया। विजिलेंस टीम ने जिन लोगों को पकड़ा है, उनमें अधिकारी डॉ. अर्जुन लाल अहिरवार और सहायक क्लर्क राम किशोर गुप्ता के नाम सामने आए हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के बदले 1 लाख रुपये की मांग की थी।
हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल विजिलेंस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रजिस्ट्रेशन के लिए मांगी गई थी बड़ी रकम
मामले की शुरुआत कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन से जुड़े एक काम से हुई। शिकायतकर्ता को विभागीय प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराना था। आरोप है कि इस काम को पूरा करने के बदले उससे 1 लाख रुपये की मांग की गई।
शिकायतकर्ता के सामने जब इतनी बड़ी रकम की मांग रखी गई तो उसने सीधे पैसे देने के बजाय इसकी जानकारी विजिलेंस विभाग को देने का फैसला किया। इसके बाद उसने झांसी विजिलेंस से संपर्क किया और अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की प्रारंभिक जांच की। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।
50-50 हजार रुपये लेने की थी कथित डील
आरोप है कि मांगी गई 1 लाख रुपये की रकम में दोनों आरोपियों के बीच हिस्सा तय किया गया था। कथित तौर पर दोनों को 50-50 हजार रुपये मिलने थे।
यही रकम विजिलेंस के लिए कार्रवाई का आधार बनी। शिकायतकर्ता को निर्धारित योजना के तहत रकम लेकर आरोपियों तक पहुंचने के लिए कहा गया। विजिलेंस टीम ने पूरी कार्रवाई पर नजर बनाए रखी और उचित समय का इंतजार किया।
रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1 लाख की “फीस” मांग रहे थे साहब… लेकिन विजिलेंस ने ऐसी एंट्री मारी कि डील उलटी पड़ गई।
— VIRAL ZONE INDIA (@MohitTr11637443) August 10, 2026
ललितपुर आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग में अधिकारी डॉ. अर्जुन लाल अहिरवार और सहायक क्लर्क राम किशोर गुप्ता ने एक व्यक्ति से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1 लाख रुपये मांगे।
डील ये… pic.twitter.com/tuIZiKzB1i
जैसे ही रिश्वत की रकम कथित तौर पर दोनों आरोपियों के कब्जे में पहुंची, विजिलेंस टीम ने मौके पर कार्रवाई कर दी।
पैसे हाथ में आते ही विजिलेंस की एंट्री
जिस वक्त दोनों आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की रकम ले रहे थे, उसी दौरान विजिलेंस टीम ने कार्रवाई की। टीम ने दोनों को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
ट्रैप कार्रवाई के दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने मौके से संबंधित साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू की। ऐसे मामलों में टीम द्वारा रिश्वत की रकम, बातचीत और लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाता है।
कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। विजिलेंस टीम अब यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में केवल दो लोग शामिल थे या फिर विभाग में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
शिकायतकर्ता की सूचना से खुला मामला
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिकायतकर्ता की रही। अगर शिकायतकर्ता कथित रिश्वत की मांग की जानकारी विजिलेंस को नहीं देता तो शायद यह मामला सामान्य विभागीय लेनदेन की तरह आगे बढ़ सकता था।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने कार्रवाई की योजना बनाई और शिकायतकर्ता को ट्रैप में सहयोग करने के लिए तैयार किया। इसके बाद जिस तरह से कथित तौर पर रकम का लेनदेन हुआ, उसी आधार पर दोनों आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की गई।
विजिलेंस की इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी पर रोक लगाना और शिकायत मिलने पर भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करना होता है।
अब सामने आएंगे कई अहम सवाल
दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वत मांगने का यह पहला मामला था या इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति से इसी तरह पैसे मांगे गए थे।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा सकती है कि विभाग में रजिस्ट्रेशन से संबंधित कितने मामलों में इन अधिकारियों की भूमिका रही है। अगर पिछले मामलों में भी किसी तरह की शिकायत या संदिग्ध लेनदेन सामने आता है तो जांच और विस्तृत हो सकती है।
इसके अलावा विजिलेंस यह भी जांच कर सकती है कि दोनों आरोपियों के बीच कथित तौर पर रिश्वत की रकम बांटने की व्यवस्था पहले से तय थी या इस मामले में ही ऐसा किया गया।
सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी पर फिर उठे सवाल
ललितपुर की इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में आम लोगों से जुड़े कामों के बदले कथित रूप से पैसे मांगने की समस्या पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रजिस्ट्रेशन, प्रमाणपत्र, लाइसेंस, अनुमति और दूसरे सरकारी कामों के लिए नागरिकों को संबंधित विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी काम करने के बदले अतिरिक्त रकम की मांग करता है तो आम व्यक्ति के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है।
कई बार लोग शिकायत करने के बजाय मजबूरी में पैसे देने का रास्ता चुन लेते हैं। यही वजह है कि विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां शिकायतों के आधार पर ट्रैप कार्रवाई करती हैं।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय विजिलेंस से संपर्क किया और कार्रवाई का रास्ता चुना।
जांच में डिजिटल और अन्य साक्ष्य भी हो सकते हैं अहम
विजिलेंस अब मामले से जुड़े सभी संभावित साक्ष्यों की जांच कर सकती है। शिकायतकर्ता और आरोपियों के बीच हुई बातचीत, फोन कॉल, संदेश और अन्य संपर्कों की जानकारी मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसके अलावा विभाग में रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि जिस काम के लिए रिश्वत की कथित मांग की गई थी, उसकी वास्तविक सरकारी प्रक्रिया क्या थी और क्या उसे नियमों के मुताबिक पूरा किया जा रहा था।
अगर जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा आगे बढ़ सकता है।
कार्रवाई के बाद विभाग में मचा हड़कंप
दो अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई। सरकारी कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस कार्रवाई की चर्चा होती रही।
विजिलेंस की ट्रैप कार्रवाई में किसी आरोपी को मौके पर कथित रूप से रिश्वत लेते पकड़ा जाना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि कानूनी रूप से किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जाएगा जब संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में आरोप साबित हों।
इसी वजह से इस मामले में भी आगे की जांच और अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
क्या और लोगों तक पहुंचेगी जांच?
अब निगाह इस बात पर है कि विजिलेंस की जांच आगे कहां तक पहुंचती है। यदि जांच में यह सामने आता है कि रजिस्ट्रेशन के नाम पर कथित रूप से रिश्वत लेने की व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी, तो विभाग के अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
वहीं, अगर यह केवल एक मामले तक सीमित पाया जाता है तो दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल ललितपुर में हुई यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कथित तौर पर 1 लाख रुपये की रकम को लेकर हुई डील विजिलेंस के ट्रैप में बदल गई। जिस रकम को लेकर कथित तौर पर दोनों आरोपियों के बीच 50-50 हजार रुपये का हिस्सा तय था, वही रकम उनकी गिरफ्तारी का आधार बन गई।
मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में विजिलेंस की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रजिस्ट्रेशन के नाम पर कथित रिश्वत मांगने के पीछे पूरा नेटवर्क क्या था, इसमें और कौन लोग शामिल थे और क्या पहले भी इसी तरह किसी अन्य व्यक्ति से पैसे मांगे गए थे।
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