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26 दिन का आंदोलन खत्म, लेकिन कहानी अभी बाकी! छात्रों ने सरकार को दी 60 दिन की मोहलत



रांची। झारखंड में JPSC-JSSC CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पूरे मामले की जांच की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार शाम साढ़े चार बजे औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लंबे समय से डटे आंदोलनकारी छात्रों ने आपसी सहमति के बाद आंदोलन के पहले चरण को समाप्त करने का फैसला किया है। हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन खत्म करने का मतलब उनकी जांच की मांग का खत्म होना नहीं है। छात्रों ने सरकार को 60 दिनों का समय दिया है और इस दौरान न्यायिक जांच की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

छात्र नेताओं के मुताबिक, बुधवार शाम करीब 4:30 बजे आंदोलन स्थल पर औपचारिक कार्यक्रम के साथ 26 दिनों से जारी आंदोलन की समाप्ति की घोषणा की जाएगी। इसी दौरान आंदोलन में शामिल दो अनशनकारी छात्रों का अनशन भी समाप्त कराया जाएगा। अनशन खत्म कराने के लिए प्रसिद्ध लोकगायक और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित मुकुंद नायक को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। बताया गया है कि उन्हीं के हाथों दोनों अनशनकारी छात्रों का अनशन तुड़वाया जाएगा।

26 दिन तक जारी रहा छात्र आंदोलन

JPSC-JSSC CGL परीक्षाओं को लेकर छात्रों का यह आंदोलन कई दिनों तक लगातार चर्चा में रहा। झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आंदोलन में शामिल हुए। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की और अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने भूख हड़ताल, सत्याग्रह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा जैसे कई कार्यक्रम किए। आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों के बीच व्यवस्था को लेकर विश्वास बना रहे।

26 दिनों तक चले आंदोलन में छात्रों ने लगातार अपनी मांगों को उठाया। इस दौरान आंदोलन स्थल पर छात्रों की मौजूदगी बनी रही और कई चरणों में सरकार के सामने अपनी बात रखने का प्रयास किया गया।

दो अनशनकारी छात्रों का भी टूटेगा अनशन

आंदोलन के दौरान दो छात्र अनशन पर बैठे थे। अब आंदोलन समाप्त करने के साथ ही दोनों अनशनकारी छात्रों का अनशन भी समाप्त कराया जाएगा। इसके लिए मुकुंद नायक को विशेष रूप से बुलाया गया है।

छात्र नेताओं के अनुसार, मुकुंद नायक के हाथों अनशन तुड़वाने के बाद आंदोलन स्थल पर औपचारिक रूप से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही 26 दिनों से चल रही धरना-प्रदर्शन की गतिविधियां अपने पहले चरण में समाप्त हो जाएंगी।

आंदोलनकारी छात्रों के लिए यह क्षण भावनात्मक भी होगा, क्योंकि इतने लंबे समय तक बड़ी संख्या में छात्रों ने एक साथ अपनी मांगों को लेकर संघर्ष किया है। हालांकि आंदोलन समाप्त करने के निर्णय के बावजूद छात्रों ने सरकार को लेकर अपनी निगरानी जारी रखने की बात कही है।

शाम को निकलेगी 'आभार यात्रा'

आंदोलन समाप्त होने के बाद छात्रों की ओर से शाम को 'आभार यात्रा' निकाली जाएगी। छात्र नेताओं के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करना है।

छात्रों ने खास तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त किया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया और संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।

छात्र नेताओं के अनुसार, सरकार के इस कदम के बाद आंदोलन को फिलहाल समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि उनका कहना है कि अभी सबसे महत्वपूर्ण मांग परीक्षा में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच है, जिस पर छात्रों की नजर बनी रहेगी।

60 दिनों का दिया गया समय

आंदोलन समाप्त करने के साथ ही छात्रों ने सरकार के सामने एक नई समयसीमा भी रखी है। छात्र नेताओं के अनुसार, सरकार को 60 दिनों का समय दिया गया है। इस अवधि में छात्रों की मांग है कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच कराई जाए और मामले में ठोस कार्रवाई की जाए।

छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार ने न्यायिक जांच के लिए अपनी सहमति दी है। अब छात्र यह देखना चाहते हैं कि इस दिशा में वास्तविक कार्रवाई कितनी जल्दी शुरू होती है और जांच की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

आंदोलनकारी छात्रों के लिए केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि जांच की प्रक्रिया स्पष्ट और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब सामने आए।

आंदोलन खत्म नहीं, फिलहाल स्थगित

छात्र नेताओं ने आंदोलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है। उनके अनुसार, यह आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया जा रहा है

छात्रों ने सरकार को 60 दिनों की समयसीमा दी है। यदि इस दौरान न्यायिक जांच को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया या छात्रों को लगा कि उनकी प्रमुख मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

इस चेतावनी से साफ है कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी JPSC-JSSC CGL परीक्षा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। आने वाले दो महीने सरकार और छात्रों दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

सरकार के फैसले पर छात्रों की नजर

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना मात्र नहीं था, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।

प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के लिए परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की तैयारी, समय और आर्थिक संसाधन जुड़े होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का समाधान छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसी वजह से आंदोलनकारी छात्र न्यायिक जांच की मांग पर लगातार जोर देते रहे हैं। उनका कहना है कि जांच के जरिए ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा से संबंधित कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति क्या थी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

आंदोलन के दौरान दिखी एकजुटता

26 दिनों के आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता छात्रों की एकजुटता रही। झारखंड के विभिन्न जिलों से छात्र-छात्राएं आंदोलन में पहुंचे और अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी मांगों को सामने रखा।

भूख हड़ताल और सत्याग्रह से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा तिरंगा यात्रा तक, छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया। आंदोलन स्थल पर छात्रों की लगातार मौजूदगी ने इसे लंबे समय तक चर्चा में बनाए रखा।

अब बुधवार शाम आंदोलन का पहला चरण समाप्त होने जा रहा है। दो अनशनकारी छात्रों का अनशन टूटेगा, आंदोलन की औपचारिक समाप्ति की घोषणा होगी और इसके बाद छात्र आभार यात्रा निकालेंगे।

अब आगे क्या होगा?

बुधवार शाम के बाद असली नजर अगले 60 दिनों की गतिविधियों पर रहेगी। छात्रों की ओर से सरकार को दी गई समयसीमा में न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं, यह आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल रहेगा।

अगर सरकार छात्रों के अनुसार ठोस कदम उठाती है, तो लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद होगी। लेकिन यदि 60 दिनों के भीतर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तो छात्र नेताओं ने फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

इस स्थिति में JPSC-JSSC CGL से जुड़ा विवाद एक बार फिर सड़क पर लौट सकता है और छात्रों का आंदोलन नए चरण में प्रवेश कर सकता है।

JPSC-JSSC CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच की मांग को लेकर चला 26 दिनों का छात्र आंदोलन बुधवार शाम साढ़े चार बजे अपने पहले चरण में समाप्त हो जाएगा। दो अनशनकारी छात्रों का अनशन मुकुंद नायक के हाथों समाप्त कराया जाएगा और इसके बाद छात्र आंदोलन की औपचारिक समाप्ति की घोषणा करेंगे।

इसके साथ ही छात्र शाम को 'आभार यात्रा' निकालकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त करेंगे। हालांकि आंदोलन समाप्त करने के बावजूद छात्रों ने न्यायिक जांच की मांग को बरकरार रखा है।

सरकार को 60 दिनों की समयसीमा दी गई है। छात्रों का कहना है कि यदि इस अवधि में न्यायिक जांच की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। ऐसे में फिलहाल आंदोलन थम जरूर रहा है, लेकिन JPSC-JSSC CGL विवाद पर छात्रों की नजर अगले 60 दिनों तक बनी रहेगी।

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