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16 बच्चे वार्ड में भर्ती थे और अचानक गिर पड़ी छत! ग्वालियर के कमला राजा अस्पताल में हड़कंप

 


ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित कमला राजा अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब छत से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। हादसे के समय वार्ड में कई बच्चे भर्ती थे। घटना में करीब ढाई महीने की एक बच्ची के पैर में मामूली चोट आई, जबकि बाकी बच्चों को तत्काल दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि अस्पताल की इमारत में इससे पहले भी छत का प्लास्टर गिरने की घटना सामने आ चुकी है। लगातार ऐसी घटनाओं ने अस्पताल की बिल्डिंग के रखरखाव और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह-सुबह अचानक गिरा छत का हिस्सा

मिली जानकारी के मुताबिक, कमला राजा अस्पताल के बिल्डिंग नंबर-19 स्थित चिल्ड्रन वार्ड में सुबह करीब 7:30 बजे छत का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। उस समय वार्ड में करीब 16 बच्चे भर्ती थे। अचानक छत से मलबा गिरने के बाद वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई।

गनीमत रही कि गिरा हुआ प्लास्टर सीधे किसी बच्चे के ऊपर नहीं गिरा। हादसे में ढाई महीने की बच्ची खुशी के पैर में मामूली खरोंच आई। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची की हालत खतरे से बाहर है।

कुछ मिनट पहले ही मां ने बदला था बच्ची का बेड

इस घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे से कुछ मिनट पहले ही बच्ची की मां ने उसका पलंग बदल दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची पहले जिस बेड पर लेटी थी, उसकी मां ने उसे वहां से हटाकर दूसरे पलंग पर लिटा दिया था। इसके कुछ ही समय बाद पुराने बेड के ऊपर मौजूद छत का प्लास्टर नीचे गिर गया।

अगर बच्ची उसी जगह लेटी रहती तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती थी। समय रहते बेड बदल जाने से एक बड़ा हादसा टल गया।

16 बच्चों को दूसरे वार्ड में किया गया शिफ्ट

छत से प्लास्टर गिरने की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। सुरक्षा को देखते हुए पूरे चिल्ड्रन वार्ड को खाली कराया गया और वहां भर्ती सभी बच्चों को दूसरे वार्ड में भेज दिया गया।

अस्पताल अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बच्चों और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कराया गया।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, बच्चों को तत्काल पुराने वार्ड में वापस नहीं भेजा गया, ताकि किसी तरह का जोखिम न रहे।

बारिश की सीलन को माना जा रहा वजह

अस्पताल प्रशासन ने शुरुआती तौर पर छत से प्लास्टर गिरने की संभावित वजह बारिश के कारण आई सीलन को बताया है। लगातार बारिश के दौरान पुरानी इमारतों में नमी बढ़ने से प्लास्टर कमजोर होने की आशंका रहती है।

अस्पताल के पीआरओ डॉ. मनीष चतुर्वेदी के अनुसार, घटना में बच्ची को मामूली चोट आई और उसकी हालत सामान्य है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत भी कराई गई है।

हालांकि, केवल बारिश को वजह मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। इमारत की संरचनात्मक स्थिति और लंबे समय से चल रहे रखरखाव की भी जांच जरूरी है।

एक सप्ताह के भीतर दूसरी घटना ने बढ़ाई चिंता

कमला राजा अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरने की यह पहली घटना नहीं बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले भी चिल्ड्रन वार्ड के एक हिस्से में प्लास्टर गिर चुका था।

एक सप्ताह के भीतर दो घटनाओं के सामने आने से अस्पताल की पुरानी इमारत को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर बच्चों के वार्ड में ऐसी घटनाएं मरीजों और उनके परिजनों के लिए बेहद चिंताजनक हैं।

इसके अलावा अस्पताल में वायरिंग और शॉर्ट सर्किट से जुड़ी शिकायतें भी पहले सामने आती रही हैं। ऐसे में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और भवन के नियमित निरीक्षण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पुरानी इमारत के रिनोवेशन का प्रस्ताव भेजा गया

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कमला राजा अस्पताल की इमारत काफी पुरानी है। इसके रिनोवेशन और मेंटेनेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बजट उपलब्ध होने के बाद भवन के जीर्णोद्धार का काम कराया जाएगा। फिलहाल जहां से प्लास्टर गिरा है, वहां तत्काल मरम्मत कराई गई है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल किसी घटना के बाद मरम्मत करना पर्याप्त है? अगर भवन में अन्य हिस्से भी कमजोर हैं तो उनकी पहले से पहचान कर मरम्मत करना जरूरी है, ताकि अगली घटना का इंतजार न करना पड़े।

मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कमला राजा अस्पताल ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बच्चों के वार्ड में भर्ती मरीजों की स्थिति को देखते हुए भवन की सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

एक मासूम के ऊपर छत का हिस्सा गिरना और उसके पैर में चोट लगना भले ही इस बार गंभीर हादसे में नहीं बदला, लेकिन घटना यह जरूर दिखाती है कि खतरा कितना बड़ा हो सकता था।

अस्पताल में भर्ती बच्चों की सुरक्षा के लिए वार्ड की छत, दीवारों, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचे की नियमित जांच आवश्यक है।

क्या अगली बार टल पाएगा बड़ा हादसा?

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल की पुरानी इमारत के उन हिस्सों की पहचान कब होगी, जो मरीजों के लिए खतरा बन सकते हैं।

अस्पताल प्रशासन ने तत्काल मरम्मत और बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने का कदम उठाया है। लेकिन लंबे समय के लिए भवन की तकनीकी जांच और जरूरी मरम्मत जरूरी होगी।

अगर समय रहते कमजोर हिस्सों को ठीक कर दिया जाए तो भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सकता है। खासकर बच्चों के वार्ड में ऐसी लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी लोगों में नाराजगी

घटना की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस अस्पताल में बच्चों का इलाज चल रहा हो, वहां छत का प्लास्टर कैसे गिर सकता है।

हालांकि, घटना को लेकर राजनीतिक या क्षेत्रीय टिप्पणी करने के बजाय जरूरी है कि भवन की वास्तविक स्थिति की तकनीकी जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टों में किसी बच्चे की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। इस हादसे में एक ढाई महीने की बच्ची को मामूली चोट लगने की जानकारी है और बाकी बच्चों को सुरक्षित दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया गया।

इस बार बची मासूम की जान, लेकिन सवाल बाकी

ग्वालियर के कमला राजा अस्पताल में हुआ यह हादसा एक चेतावनी की तरह है। इस बार बच्ची की मां ने समय रहते उसका बेड बदल दिया और एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया। लेकिन हर बार ऐसा संयोग नहीं होगा।

अस्पताल प्रशासन के सामने अब चुनौती केवल गिरे हुए प्लास्टर की मरम्मत करना नहीं, बल्कि पूरी इमारत की सुरक्षा का आकलन करना है।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एक मामूली चोट के साथ टला यह हादसा अगर समय रहते सबक बन गया, तो भविष्य में बड़ी जनहानि रोकी जा सकती है।

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