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Viral Video: मां की डांट के बाद 100 फीट ऊंची टंकी पर चढ़ी 15 साल की छात्रा, फिर आया वो खौफनाक पल… महिला दारोगा ने ऐसे बचाई जान



गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में रविवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुछ घंटों के लिए पूरे इलाके को सकते में डाल दिया। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 वर्षीय छात्रा अपनी मां की डांट से नाराज होकर करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गई। छात्रा काफी देर तक टंकी के किनारे बैठी रही और नीचे उतरने से इनकार करती रही। इस दौरान उसके पैर टंकी से बाहर लटके हुए थे। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई।

मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रा को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नीचे आने के लिए तैयार नहीं हुई। करीब तीन घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रा को बिना डराए और बिना कोई जल्दबाजी किए सुरक्षित नीचे उतारने की थी।

स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। आखिरकार एम्स थाने में तैनात महिला दारोगा जागृति खरवार ने खुद जोखिम उठाने का फैसला किया। उन्होंने छात्रा से लगातार बातचीत की और उसे भरोसा दिलाने की कोशिश की। इसके बाद वह धीरे-धीरे उसके करीब पहुंचीं। मौका मिलते ही उन्होंने छात्रा को पीछे से पकड़ लिया।

इसी दौरान छात्रा ने नीचे छलांग लगा दी। लेकिन महिला दारोगा ने उसका हाथ और कपड़ा पकड़कर उसे गिरने से रोक लिया। बताया जा रहा है कि छात्रा करीब 20 मिनट तक हवा में लटकी रही। दारोगा ने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी और ऊपर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से आखिरकार छात्रा को सुरक्षित ऊपर खींच लिया गया।

इस तरह पुलिस की सूझबूझ और महिला दारोगा के साहस से एक बड़ा हादसा टल गया।

मां की डांट के बाद नाराज हुई छात्रा

घटना गोरखपुर के एम्स थाना क्षेत्र की महादेव झारखंडी कॉलोनी में रविवार दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, छात्रा शिवपुर आवास विकास कॉलोनी की रहने वाली है और 9वीं कक्षा में पढ़ती है।

बताया जा रहा है कि छात्रा फोन पर एक लड़के से लगातार बातचीत करती थी। रविवार को उसकी मां ने फोन पर बात करने को लेकर उसे डांट दिया और लड़के से बातचीत करने से मना किया।

मां की डांट से छात्रा नाराज हो गई। परिवार वालों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि नाराजगी के कुछ ही देर बाद वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी।

छात्रा घर से निकलकर पास की पानी की टंकी पर चढ़ गई। करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर छात्रा को देखकर आसपास के लोग घबरा गए।

टंकी पर पैर लटकाकर बैठी रही

छात्रा टंकी के ऊपरी हिस्से में पहुंचकर किनारे पर बैठ गई। उसके पैर नीचे की ओर लटक रहे थे। करीब 100 फीट की ऊंचाई पर इस तरह बैठी छात्रा को देखकर लोगों की सांसें थम गईं।

धीरे-धीरे मौके पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। किसी ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस के पहुंचने के बाद छात्रा को नीचे उतारने की कोशिश शुरू हुई।

पुलिसकर्मी छात्रा से बातचीत करते रहे। उसे समझाया गया कि वह सुरक्षित नीचे आ जाए और परिवार के साथ घर लौटे। लेकिन छात्रा किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी।

पुलिस के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील थी। छात्रा को अचानक पकड़ने या उसके करीब जाने से वह घबरा सकती थी। ऐसे में पुलिस को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ा।

तीन घंटे तक चलता रहा घटनाक्रम

बताया जा रहा है कि छात्रा करीब तीन घंटे तक पानी की टंकी पर रही। इस दौरान पुलिसकर्मी लगातार उससे बातचीत करते रहे।

पुलिस की कोशिश थी कि किसी तरह छात्रा का भरोसा जीता जाए। उससे बातचीत के दौरान उसके मन की बात समझने और उसे शांत करने की कोशिश की गई।

नीचे मौजूद लोग भी पूरे घटनाक्रम को लेकर चिंतित थे। हर किसी की नजर टंकी के ऊपर बैठी छात्रा पर थी।

स्थिति ऐसी थी कि एक छोटी सी गलती भी गंभीर हादसे में बदल सकती थी। इसलिए पुलिस ने जल्दबाजी के बजाय धैर्य और बातचीत का रास्ता अपनाया।

महिला दारोगा ने खुद आगे बढ़कर संभाली जिम्मेदारी

जब काफी देर तक छात्रा नीचे आने को तैयार नहीं हुई तो एम्स थाने में तैनात महिला दारोगा जागृति खरवार ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया।

महिला दारोगा ने छात्रा से बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे उसके करीब पहुंचने की कोशिश की। उनका उद्देश्य छात्रा को डराना नहीं बल्कि उसका भरोसा जीतना था।

वह लगातार छात्रा से बात करती रहीं ताकि उसका ध्यान अपनी ओर बना रहे। इसी दौरान वह सावधानी से उसके पीछे पहुंच गईं।

मौका मिलते ही दारोगा ने छात्रा को पीछे से पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों के लिए यह बेहद जोखिम भरा क्षण था, क्योंकि छात्रा टंकी के किनारे बैठी हुई थी।

छलांग लगाते ही दारोगा ने थाम लिया

छात्रा को पकड़े जाने के बाद उसने नीचे छलांग लगाने की कोशिश की। लेकिन जागृति खरवार ने उसे तुरंत पकड़ लिया।

बताया गया है कि दारोगा ने छात्रा का हाथ और उसके कपड़े को मजबूती से पकड़ लिया। इसके चलते छात्रा नीचे गिरने के बजाय हवा में ही लटक गई।

यह स्थिति करीब 20 मिनट तक बनी रही। इतने समय तक महिला दारोगा ने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी।

ऊपर मौजूद अन्य पुलिसकर्मी भी तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने छात्रा को ऊपर खींचने की कोशिश शुरू की।

यह पूरा बचाव अभियान बेहद सावधानी से किया गया, क्योंकि थोड़ी सी चूक छात्रा और पुलिसकर्मियों दोनों के लिए खतरनाक हो सकती थी।

आखिरकार सुरक्षित ऊपर खींच ली गई छात्रा

काफी मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों ने छात्रा को ऊपर खींच लिया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से पानी की टंकी से नीचे लाया गया।

घटना के दौरान सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि छात्रा को सुरक्षित बचा लिया गया। महिला दारोगा और अन्य पुलिसकर्मियों की सूझबूझ से संभावित बड़ा हादसा टल गया।

मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस के इस प्रयास की सराहना की। खासकर महिला दारोगा द्वारा अपनी जान की परवाह किए बिना छात्रा को पकड़ने के प्रयास की चर्चा हुई।

परिवार की डांट से बढ़ा तनाव

इस घटना ने एक बार फिर किशोर उम्र के बच्चों के साथ संवाद की जरूरत पर ध्यान खींचा है। किशोरावस्था में बच्चे कई तरह के भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं। इस उम्र में किसी बात पर तत्काल प्रतिक्रिया देना या भावनाओं में आकर जोखिम भरा कदम उठाना संभव है।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को अनुशासन या गलत व्यवहार पर समझाया नहीं जाना चाहिए। लेकिन ऐसे मामलों में बातचीत, भरोसा और भावनात्मक समर्थन भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक गुस्सा, अलग-थलग रहना या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें दिखाई दें तो उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

सोशल मीडिया और फोन को लेकर बढ़ रही चिंताएं

आज के समय में किशोरों की जिंदगी में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की भूमिका काफी बढ़ गई है। बच्चों के ऑनलाइन संपर्क और दोस्ती को लेकर माता-पिता के बीच चिंता होना स्वाभाविक है।

लेकिन बच्चों से संवाद करते समय केवल डांटने या फोन छीनने के बजाय उन्हें समझना और उनकी बात सुनना भी जरूरी है। किसी बच्चे के ऑनलाइन संबंध या दोस्ती को लेकर चिंता होने पर शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए स्थिति समझने की कोशिश की जा सकती है।

अगर बच्चा भावनात्मक रूप से परेशान नजर आए तो परिवार को उसकी भावनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पुलिस की भूमिका ने बचाई जिंदगी

गोरखपुर की इस घटना में पुलिस के सामने चुनौती केवल छात्रा को नीचे उतारने की नहीं थी। असली चुनौती उसे सुरक्षित तरीके से बचाने की थी।

करीब 100 फीट की ऊंचाई पर मौजूद छात्रा के पास जाना अपने आप में जोखिम भरा था। ऐसे में पुलिस ने पहले बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की और जब वह सफल नहीं हुई तो महिला दारोगा ने खुद जोखिम उठाया।

जागृति खरवार का छात्रा के करीब पहुंचना और छलांग लगाने के दौरान उसे पकड़ लेना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

अगर उस क्षण पकड़ छूट जाती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकता था। लेकिन पुलिसकर्मियों की तत्परता से छात्रा को सुरक्षित बचा लिया गया।

घटना से मिली बड़ी सीख

यह घटना केवल पुलिस की बहादुरी की कहानी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। किशोर उम्र के बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझना जरूरी है।

किसी भी विवाद या डांट के बाद अगर बच्चा अचानक घर से निकल जाए, खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करे या असामान्य व्यवहार करे, तो परिवार को तुरंत उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पुलिस या विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

गोरखपुर में रविवार को जो कुछ हुआ, वह कुछ घंटों तक पूरे इलाके के लिए चिंता का कारण बना रहा। लेकिन अंत में पुलिस की सूझबूझ और महिला दारोगा के साहस के कारण छात्रा सुरक्षित बच गई।

करीब तीन घंटे तक चली इस घटना का सबसे खौफनाक पल वह था, जब छात्रा ने ऊंचाई से छलांग लगाने की कोशिश की और महिला दारोगा ने उसे पकड़ लिया। एक तरफ करीब 100 फीट की गहराई थी और दूसरी तरफ पुलिसकर्मी की मजबूत पकड़—कुछ मिनटों के इस संघर्ष ने एक किशोरी की जिंदगी बचा ली।

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