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चलती टाटा सूमो पर अचानक टूटा मौत का पहाड़! विशाल चट्टान गिरते ही 13 लोगों की दर्दनाक मौत



Himachal Pradesh Road Accident: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति से शुक्रवार को दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। उदयपुर थाना क्षेत्र में कढ़ूनाला-राहौली के पास एक भीषण सड़क हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब कुल्लू से पांगी जा रही एक टाटा सूमो टैक्सी पर पहाड़ी से अचानक एक विशाल चट्टान आ गिरी। चट्टान के वजन और टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार अधिकांश यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई।

इस हादसे ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान पहाड़ी इलाकों में यात्रा की चुनौतियों और भूस्खलन के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

अचानक गिरी चट्टान, पलभर में उजड़ गईं कई जिंदगियां

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा सीमा सड़क संगठन (BRO) की मुख्य सड़क पर स्थित कढ़ूनाला-राहौली के पास हुआ। जिस समय यह दुर्घटना हुई, उस समय टाटा सूमो (HP-01M-2210) कुल्लू से चंबा जिले के पांगी क्षेत्र की ओर जा रही थी।

बताया जा रहा है कि रास्ते में अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया और एक विशाल चट्टान सीधे चलती हुई टाटा सूमो के ऊपर आ गिरी। चट्टान का आकार इतना बड़ा था कि वाहन उसके नीचे पूरी तरह दब गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जोरदार आवाज के साथ चट्टान गिरी और कुछ ही सेकंड में वाहन मलबे में दब गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी।

टैक्सी में सवार थे 15 लोग

जानकारी के अनुसार, टाटा सूमो एक टैक्सी के रूप में संचालित हो रही थी। वाहन में चालक सहित कुल 15 लोग सवार थे। वाहन को बीर सिंह चला रहे थे।

जैसे ही वाहन कढ़ूनाला क्षेत्र में राहौली के समीप पहुंचा, पहाड़ी से अचानक विशाल चट्टान गिर पड़ी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वाहन में बैठे अधिकांश यात्रियों को संभलने का भी मौका नहीं मिला।

हादसे में 13 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। दोनों घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू

घटना की सूचना मिलते ही उदयपुर थाना पुलिस, तिंदी पुलिस चौकी, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।

बचाव दल ने भारी चट्टानों और मलबे के बीच दबे वाहन तक पहुंचने के लिए राहत अभियान शुरू किया। क्षतिग्रस्त वाहन को हटाने और शवों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल भेजा गया। वहीं मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई।

अधिकारियों ने बताया कि पहचान पूरी होने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और फिर उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

सभी मृतक चंबा जिले के पांगी क्षेत्र के निवासी

लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना में 13 लोगों की मृत्यु हुई है और दो लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उन्होंने बताया कि दुर्घटना चंबा जिले के पांगी क्षेत्र और लाहौल-स्पीति जिले की सीमा के पास हुई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोग चंबा जिले के पांगी क्षेत्र के निवासी थे। प्रशासन उनके परिवारों से संपर्क कर रहा है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

बारिश और भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें

हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान लगातार भारी बारिश हो रही है। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन, पहाड़ दरकने और सड़कें बंद होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश से पहाड़ियों की मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर हो जाती है। ऐसे में अचानक बड़े-बड़े पत्थर और चट्टानें सड़कों पर गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

कढ़ूनाला-राहौली क्षेत्र भी भूस्खलन संभावित इलाकों में गिना जाता है, जहां मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता रहती है।

मानसून में लगातार बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

प्रदेश में 30 जून को मानसून की दस्तक के बाद से लगातार प्राकृतिक आपदाओं का दौर जारी है।

इस हादसे से पहले बारिश और उससे जुड़े हादसों में 75 लोगों की मौत हो चुकी थी। लाहौल-स्पीति की इस भीषण दुर्घटना के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 88 पहुंच गई है।

इन घटनाओं में भूस्खलन, बादल फटना, सड़क दुर्घटनाएं, मकान गिरना और तेज बहाव में बहने जैसी कई घटनाएं शामिल हैं।

राज्य सरकार और प्रशासन लगातार राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटे हुए हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश चुनौती बनी हुई है।

मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 जुलाई से 29 जुलाई के बीच हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

इसी को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें।

विशेष रूप से पहाड़ी और भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

  • खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में वाहन रोकने से बचें।

  • मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।

  • आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सहायता लें।

  • पहाड़ी मार्गों पर यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर संवेदनशील मार्गों पर यातायात अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।

पहाड़ी राज्यों में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे हादसे?

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही अत्यधिक बारिश, ढलानों पर मिट्टी का कटाव और कमजोर होती चट्टानों के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं।

सड़क निर्माण, प्राकृतिक बदलाव और अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियां भी कई बार पहाड़ियों की स्थिरता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा हमेशा जोखिम भरी मानी जाती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मौसम खराब होने पर यात्रियों को यात्रा टाल देनी चाहिए और केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही सुरक्षित मार्गों का उपयोग करना चाहिए।

लाहौल-स्पीति में हुआ यह हादसा हिमाचल प्रदेश के हाल के वर्षों की सबसे दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। एक विशाल चट्टान के चलती टाटा सूमो पर गिरने से 13 लोगों की जान चली गई, जबकि दो लोग घायल हो गए। मृतकों के परिजनों में शोक की लहर है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा हुआ है।

इस बीच मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें। मानसून के इस दौर में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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