35 बोरियां खुलीं तो उड़ गए पुलिस के होश! साधारण घर से निकला 20 करोड़ का काला खजाना
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से सामने आई एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। फिल्मों में अक्सर विलेन के गुप्त ठिकानों से नोटों और सोने का जखीरा निकलते हुए दिखाया जाता है, लेकिन इस बार वास्तविक जीवन में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एक साधारण से दिखने वाले घर में पुलिस ने छापेमारी की तो वहां का दृश्य देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। घर के अंदर 35 बोरियों में भारी मात्रा में नकदी और करीब 15 किलोग्राम सोने के बिस्कुट मिलने का दावा किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बरामद नकदी की अनुमानित कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
गुप्त सूचना के बाद हुई देर रात कार्रवाई
जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से इलाके में अवैध धन जमा होने की सूचना मिल रही थी। इसी सूचना के आधार पर बीरभूम जिले के देउचा क्षेत्र में स्थित मीनार मंडल के घर पर देर रात छापेमारी की गई। पुलिस टीम को शुरुआत में यह उम्मीद नहीं थी कि एक साधारण से मकान में इतना बड़ा खजाना छिपा हो सकता है।
मीनार मंडल को पूर्व सरकारी बस चालक बताया जा रहा है। साथ ही उनका संबंध इलाके के चर्चित पत्थर कारोबारी टुलू मंडल के परिवार से भी बताया जा रहा है। पुलिस ने जब घर की तलाशी शुरू की तो कई कमरों में बंद ताले तोड़े गए। इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने पूरी टीम को हैरान कर दिया।
35 बोरियों में भरी थी नकदी
तलाशी के दौरान पुलिस को एक-दो नहीं बल्कि 35 बोरियां मिलीं। अधिकारियों के अनुसार इन बोरियों में बड़ी मात्रा में नकदी रखी गई थी। नोट इतने अधिक थे कि उनकी गिनती करना भी आसान नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक नकदी की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि पुलिस को तत्काल पांच नोट गिनने वाली मशीनें मंगवानी पड़ीं। कई घंटों तक लगातार नोटों की गिनती चलती रही। इसके बाद बरामद रकम को सुरक्षित रखने के लिए बड़े लोहे के बक्सों की व्यवस्था की गई और पूरी नकदी को सील कर पुलिस की निगरानी में जब्त कर लिया गया।
15 किलो सोने के बिस्कुट भी बरामद होने का दावा
छापेमारी के दौरान केवल नकदी ही नहीं बल्कि लगभग 15 किलोग्राम सोने के बिस्कुट भी बरामद किए जाने का दावा किया गया है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में सामने आए सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जा सकता है।
सोने और नकदी की संयुक्त कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह संपत्ति किस स्रोत से अर्जित की गई और इसे घर में छिपाकर क्यों रखा गया था।
पत्थर उद्योग से जुड़े लेन-देन पर जांच का फोकस
प्रारंभिक जांच में पुलिस की नजर पत्थर उद्योग से जुड़े आर्थिक लेन-देन पर है। जांच एजेंसियों के अनुसार टुलू मंडल की एजेंसी पर आरोप है कि वह तीन जिलों के पत्थर उद्योगों के प्रवेश द्वारों से टैक्स वसूलने का काम करती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी रिकॉर्ड में हर महीने जितनी राशि जमा दिखाई जाती थी, वह वास्तविक वसूली से काफी कम बताई जा रही है। आरोप है कि जहां सरकारी खजाने में लगभग 83 करोड़ रुपये मासिक जमा होने की संभावना थी, वहीं रिकॉर्ड में केवल 2 से 5 करोड़ रुपये जमा दिखाए जाते थे। ऐसे में बाकी रकम कहां गई, यही अब जांच का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
आर्थिक अपराध की कई परतें खुलने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना वास्तव में अवैध रूप से जमा किया गया था, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं हो सकता। इसके पीछे संगठित नेटवर्क, हवाला, टैक्स चोरी या अवैध कारोबार जैसे कई पहलुओं की जांच की जा सकती है।
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, संपत्तियों, कारोबारी लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस कथित नेटवर्क से अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं।
सियासी गलियारों में भी बढ़ी हलचल
इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने बयान देना शुरू कर दिया है।
राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति जारी रहेगी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि जनता के धन की लूट करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा और कानून अपना काम करेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति पर किसी का निजी अधिकार नहीं हो सकता तथा भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
जब्त संपत्ति की जांच जारी
पुलिस ने बरामद नकदी और सोने को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर जमा करा दिया है। अब संबंधित विभागों की मदद से नकदी की वास्तविक गणना, सोने की शुद्धता और उसकी कीमत का आकलन किया जाएगा।
इसके अलावा आयकर विभाग, आर्थिक अपराध शाखा तथा अन्य संबंधित एजेंसियों से भी संपर्क किया जा सकता है ताकि पूरे मामले की वित्तीय जांच व्यापक स्तर पर की जा सके।
जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। क्या बरामद धन पूरी तरह अवैध था? क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? क्या इस मामले में और लोगों की गिरफ्तारी होगी? इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सभी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही हैं। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े कथित आर्थिक घोटालों में शामिल हो सकता है। वहीं यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो कई और बड़े नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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