स्ट्रोक आने से पहले शरीर देता है ये 7 संकेत! ज्यादातर लोग कर देते हैं नजरअंदाज, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी
आधुनिक जीवनशैली, लगातार बढ़ता मानसिक तनाव, घंटों बैठकर काम करने की आदत और अनियमित दिनचर्या का असर अब केवल शरीर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में स्ट्रोक, माइग्रेन, डिमेंशिया, पार्किंसन और अन्य न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र) रोगों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो बीमारियां पहले मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं, अब उनके मामले 30 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी तेजी से सामने आ रहे हैं। डॉक्टर इसके पीछे बढ़ते तनाव, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, उच्च रक्तचाप और अनियंत्रित मधुमेह को प्रमुख कारण मान रहे हैं।
विश्व मस्तिष्क दिवस (World Brain Day) के अवसर पर नोएडा के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि मस्तिष्क से जुड़े शुरुआती लक्षणों को कभी भी हल्के में न लें, क्योंकि समय पर इलाज कई गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
तनाव बन रहा है कई गंभीर बीमारियों की जड़
विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव केवल मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह शरीर में कई गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देता है।
लगातार तनाव रहने पर—
रक्तचाप बढ़ सकता है।
हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।
नींद प्रभावित होती है।
हृदय और मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
स्ट्रोक और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे और उसके साथ उच्च रक्तचाप या मधुमेह भी हो, तो मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है।
हर महीने सैकड़ों मरीज पहुंच रहे अस्पताल
नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सत्यन नंदा के अनुसार वर्तमान समय में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल की न्यूरोलॉजी ओपीडी में हर महीने लगभग 300 से 320 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
इनमें सबसे अधिक मामले निम्न बीमारियों के होते हैं—
स्ट्रोक
माइग्रेन
मिर्गी (Epilepsy)
पार्किंसन रोग
डिमेंशिया
परिधीय न्यूरोपैथी
रीढ़ और नसों से जुड़ी समस्याएं
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है।
यदि समय पर इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है और स्थायी विकलांगता का खतरा भी कम हो सकता है।
स्ट्रोक के कुछ सामान्य शुरुआती संकेत हैं—
शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी आना
हाथ या पैर सुन्न पड़ जाना
चेहरा टेढ़ा दिखाई देना
बोलने में कठिनाई होना
दूसरों की बात समझने में परेशानी
अचानक धुंधला दिखाई देना
तेज चक्कर आना
संतुलन बिगड़ जाना
अचानक असहनीय सिरदर्द
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
डिमेंशिया के भी हो सकते हैं शुरुआती संकेत
डॉक्टरों के अनुसार केवल स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि याददाश्त संबंधी बीमारियों के मामलों में भी वृद्धि हो रही है।
डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकते हैं—
बार-बार चीजें भूलना
सामान्य बातों में भ्रम होना
सही शब्द याद न आना
निर्णय लेने में कठिनाई
व्यवहार में बदलाव
रोजमर्रा के कार्य करने में परेशानी
यदि ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें तो न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।
युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित
नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. के.एम. हसन के अनुसार पहले जिन बीमारियों के मामले 60 वर्ष के बाद अधिक दिखाई देते थे, अब वे 30 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी बढ़ रहे हैं।
उन्होंने इसके पीछे कई कारण बताए—
लगातार मानसिक तनाव
जंक फूड का अधिक सेवन
शारीरिक गतिविधियों की कमी
लंबे समय तक बैठकर काम करना
अनियंत्रित उच्च रक्तचाप
मधुमेह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बोझ और बढ़ सकता है।
बच्चों में भी बढ़ रहे न्यूरोलॉजिकल रोग
डॉ. हसन ने बताया कि अस्पताल की न्यूरोलॉजी ओपीडी में आने वाले मरीजों में लगभग 5 से 8 प्रतिशत बच्चे भी शामिल होते हैं।
यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि तंत्रिका तंत्र संबंधी कई समस्याएं अब कम उम्र में भी सामने आने लगी हैं।
ऐसे मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है।
लगातार सिरदर्द को सामान्य न समझें
विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द माइग्रेन या सामान्य थकान की वजह से नहीं होता।
यदि—
बार-बार तेज सिरदर्द हो,
दर्द अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए,
सिरदर्द के साथ उल्टी, चक्कर या कमजोरी महसूस हो,
तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं—
रक्तचाप नियमित रूप से जांचें।
ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
पर्याप्त पानी पिएं।
रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें।
वजन नियंत्रित रखें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि किसी व्यक्ति में अचानक—
शरीर के एक हिस्से में कमजोरी,
बोलने में दिक्कत,
चेहरा टेढ़ा होना,
बेहोशी,
तेज सिरदर्द,
संतुलन खोना,
दृष्टि धुंधली होना
जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली ने मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक, माइग्रेन, डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि युवा और कुछ मामलों में बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
स्ट्रोक या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। इसलिए यदि अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, तेज सिरदर्द, चक्कर या याददाश्त में लगातार कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली, तनाव नियंत्रण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की सबसे प्रभावी रणनीति मानी जाती है।

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