रेसिंग कारों में दौड़ रहा इथेनॉल, अब भारत की नई ईंधन नीति पर बड़ा बयान! पेट्रोल मंत्री ने बताए फायदे, माइलेज और कीमतों पर भी कही अहम बात
नई दिल्ली: देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ वाहन मालिक माइलेज और इंजन पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विषय पर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि इथेनॉल का उपयोग केवल सामान्य वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में रेसिंग कारों में भी इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि इथेनॉल उच्च ऑक्टेन क्षमता वाला जैव ईंधन है, जो इंजन के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार की जैव ईंधन नीति केवल ईंधन विकल्प विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराना और कार्बन उत्सर्जन घटाना भी है।
रेसिंग कारों में भी हो रहा इथेनॉल का इस्तेमाल
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में हाई-परफॉर्मेंस रेसिंग कारों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफल उपयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार इथेनॉल की उच्च ऑक्टेन रेटिंग इंजन को बेहतर प्रदर्शन देने में सहायता करती है और इंजन में "नॉकिंग" की समस्या भी कम होती है।
उन्होंने कहा कि रेसिंग वाहनों में ईंधन की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और इथेनॉल ने वहां भी अपनी उपयोगिता साबित की है। यही कारण है कि कई देश धीरे-धीरे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की ओर बढ़ रहे हैं।
क्या माइलेज कम होता है?
इथेनॉल मिश्रण को लेकर आम लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल माइलेज को लेकर रहता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि कुछ परिस्थितियों में माइलेज में हल्की कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसका कारण केवल इथेनॉल नहीं होता।
उन्होंने बताया कि वाहन की तकनीक, इंजन की स्थिति, सड़क की गुणवत्ता, ड्राइविंग शैली और वाहन के रखरखाव जैसे कई अन्य कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। इसलिए केवल इथेनॉल मिश्रण को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इथेनॉल की ऊर्जा घनत्व (Energy Density) पेट्रोल की तुलना में कम होती है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में ईंधन दक्षता में हल्का अंतर दिखाई दे सकता है। हालांकि आधुनिक इंजन तकनीक इस अंतर को काफी हद तक संतुलित कर सकती है।
E20 के बाद क्या होगा?
भारत में वर्तमान में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इस संबंध में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में इससे आगे नहीं बढ़ेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ने से पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण, अनुसंधान और वाहन निर्माताओं की तैयारियों का पूरा आकलन किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना है जिससे उपभोक्ताओं या वाहन उद्योग को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
दुनिया के कई देश पहले से अपना चुके हैं उच्च मिश्रण
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत इस दिशा में अकेला देश नहीं है।
अमेरिका में बड़े पैमाने पर E10 ईंधन का उपयोग किया जाता है, जबकि E15 भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वहां बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E85 तक का उपयोग कर रहे हैं।
ब्राजील दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां E27 मिश्रण अनिवार्य किया जा चुका है। वहां कुछ वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी संचालित किए जाते हैं।
इसके अलावा कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए उच्च इथेनॉल मिश्रण अपनाया है।
सरकार का कहना है कि भारत का E20 कार्यक्रम भी इसी वैश्विक रुझान का हिस्सा है।
इथेनॉल क्यों माना जाता है बेहतर?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग लगभग 108 RON होती है, जो सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक है।
उच्च ऑक्टेन ईंधन इंजन में बेहतर दहन प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। इससे इंजन में नॉकिंग कम होती है और उच्च प्रदर्शन वाले इंजनों में अधिक क्षमता प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल दहन के दौरान अपेक्षाकृत स्वच्छ उत्सर्जन भी करता है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
लगातार बढ़ा उत्पादन
भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम दो दशक से अधिक समय से संचालित किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013-14 में देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 38 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष थी। अब यह बढ़कर लगभग 2000 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है।
इसी प्रकार इथेनॉल मिश्रण का स्तर भी करीब 1.5 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकार इसे देश के जैव ईंधन कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है।
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
सरकार का कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा लाभ किसानों को भी मिल रहा है।
गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल तैयार किया जाता है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है और आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-15 से अब तक किसानों को इथेनॉल आपूर्ति के माध्यम से 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
विदेशी मुद्रा की बचत
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है।
सरकार का दावा है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
इसके अलावा लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है और 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
मंत्री के अनुसार अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में कुल अंडर-रिकवरी लगभग 1.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल?
देशभर के वाहन चालकों की नजर अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर है।
इस सवाल पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फिलहाल कीमतों में कटौती को लेकर कोई निर्णय लेना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले दो से तीन महीने तक स्थिर और कम बनी रहती हैं, तो सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी और उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जैव ईंधन कार्यक्रम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि इसके साथ वाहन उद्योग, ईंधन गुणवत्ता, इंजन अनुकूलता और उपभोक्ताओं की जागरूकता जैसे मुद्दों पर भी लगातार काम करने की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि उत्पादन क्षमता, वितरण प्रणाली और तकनीकी मानकों में संतुलन बनाए रखा जाता है, तो इथेनॉल कार्यक्रम भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इथेनॉल मिश्रण को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट है कि यह केवल वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय, पर्यावरण संरक्षण और विदेशी मुद्रा बचत से जुड़ी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि रेसिंग कारों में भी सफलतापूर्वक उपयोग होने वाला यह जैव ईंधन भविष्य में भारत के ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि E20 से आगे बढ़ने का कोई भी कदम व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही उठाया जाएगा।

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