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8 दिन तक कमरे में कैद रहा रिटायर्ड शिक्षक! खिड़की से मिली जिंदगी, फिर पत्नी पर लगाए ऐसे आरोप कि हर कोई रह गया हैरान

 


Hathras News | उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी ने उन्हें पिछले आठ दिनों से घर के एक कमरे में बंद कर रखा था। उनका दावा है कि इस दौरान वे कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहे और अगर पड़ोसियों ने खिड़की के रास्ते उन्हें खाना और पानी न पहुंचाया होता, तो उनकी जान पर बन सकती थी।

बुजुर्ग शिक्षक ने अपनी पत्नी पर वर्षों से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि लगातार मारपीट के कारण उनकी आंखों की रोशनी तक चली गई है। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन स्थिति उस समय और उलझ गई जब बुजुर्ग ने खुद ही कमरे का दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया। फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार यह मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले का है। पीड़ित बुजुर्ग की पहचान अशोक कुमार के रूप में हुई है, जो पेशे से एक सेवानिवृत्त शिक्षक बताए जा रहे हैं।

अशोक कुमार का आरोप है कि उनकी पत्नी उन्हें अक्सर कमरे में बंद करके घर से बाहर चली जाती है। इस बार भी कथित तौर पर ऐसा ही हुआ। उनके अनुसार, पत्नी घर छोड़ने से पहले चार दिनों के लिए भोजन बनाकर रख गई थी, लेकिन जब वह भोजन खत्म हो गया तो उन्हें कई दिनों तक बिना पर्याप्त भोजन के रहना पड़ा।

खिड़की के सहारे बची जान

बुजुर्ग शिक्षक का कहना है कि जब उनकी हालत खराब होने लगी तो पड़ोस में रहने वाले उनके भाइयों और अन्य परिजनों को इसकी जानकारी हुई।

उनके अनुसार, चूंकि कमरे का दरवाजा बंद था, इसलिए पड़ोसियों ने खिड़की के रास्ते उन्हें खाना और पानी देना शुरू किया। इसी तरह पिछले कई दिनों तक उनकी जरूरतें पूरी की जाती रहीं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि समय पर उन्हें भोजन और पानी नहीं मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप

अशोक कुमार ने अपनी पत्नी पर केवल कमरे में बंद करने का ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का भी आरोप लगाया है।

उनका दावा है कि पिछले सात वर्षों से उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी कई बार उनके साथ मारपीट करती रही है।

बुजुर्ग का कहना है कि सिर और चेहरे पर बार-बार चोट लगने के कारण उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हुई और अब वे लगभग दृष्टिहीन हो चुके हैं।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

पुलिस पहुंची लेकिन नहीं खुला दरवाजा

घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची।

बताया गया कि पुलिस ने बुजुर्ग से दरवाजा खोलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

उनका कहना था कि जब तक उनकी पत्नी वापस नहीं आती, वह कमरे का दरवाजा नहीं खोलेंगे।

इस घटना ने पुलिस के सामने भी एक असामान्य स्थिति पैदा कर दी।

पड़ोसी क्यों नहीं कर पाए हस्तक्षेप?

स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था।

बताया जा रहा है कि महिला के गुस्से और संभावित कानूनी विवाद के डर से पड़ोसी और रिश्तेदार सीधे हस्तक्षेप करने से बचते रहे।

हालांकि उन्होंने मानवीय आधार पर खिड़की के माध्यम से भोजन और पानी पहुंचाकर बुजुर्ग की मदद की।

वृद्धाश्रम भेजने की लगाई गुहार

बुजुर्ग शिक्षक ने प्रशासन से अपील की है कि पत्नी के वापस आने पर पुलिस की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाए।

उन्होंने कहा कि अब वे उस घर में नहीं रहना चाहते।

उनकी इच्छा है कि उन्हें किसी सुरक्षित वृद्धाश्रम में भेज दिया जाए ताकि वे अपनी बाकी जिंदगी शांति और सम्मान के साथ गुजार सकें।

उनकी यह अपील सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

घरेलू हिंसा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा किसी भी व्यक्ति के साथ हो सकती है।

हालांकि अधिकांश मामलों में महिलाएं पीड़ित होती हैं, लेकिन पुरुषों और बुजुर्गों के साथ भी मानसिक, आर्थिक या शारीरिक प्रताड़ना की घटनाएं सामने आती रही हैं।

ऐसे मामलों में समय रहते शिकायत करना और कानूनी सहायता लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।

बुजुर्गों की सुरक्षा क्यों है जरूरी?

भारत में बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल के लिए कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

यदि किसी वरिष्ठ नागरिक के साथ—

  • मारपीट की जाती है,

  • उन्हें भोजन या दवा से वंचित किया जाता है,

  • मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है,

  • या उनकी देखभाल नहीं की जाती,

तो वे संबंधित प्रशासन या पुलिस से सहायता मांग सकते हैं।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर शिकायत की व्यवस्था भी उपलब्ध है।

पुलिस क्या कर सकती है?

यदि किसी मामले में प्रथम दृष्टया अपराध के संकेत मिलते हैं तो पुलिस—

  • दोनों पक्षों के बयान दर्ज करती है।

  • पड़ोसियों और गवाहों से पूछताछ करती है।

  • चिकित्सकीय परीक्षण कराती है (यदि आवश्यक हो)।

  • उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करती है।

इस मामले में भी पुलिस का कहना है कि तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

कुछ लोगों ने बुजुर्ग शिक्षक के प्रति सहानुभूति जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आने से पहले किसी भी पक्ष को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना उचित होगा।

कई सवालों के जवाब अभी बाकी

इस पूरे मामले में अभी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं—

  • क्या बुजुर्ग को वास्तव में कई दिनों तक कमरे में बंद रखा गया था?

  • पत्नी की ओर से इस मामले में क्या पक्ष सामने आता है?

  • क्या मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य हैं?

  • क्या पुलिस जांच में आरोप सही साबित होंगे?

  • क्या प्रशासन बुजुर्ग की वृद्धाश्रम भेजने की मांग पर विचार करेगा?

इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

हाथरस से सामने आया यह मामला पारिवारिक विवाद, बुजुर्गों की सुरक्षा और घरेलू प्रताड़ना जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। सेवानिवृत्त शिक्षक ने अपनी पत्नी पर आठ दिनों तक कमरे में बंद रखने, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा भोजन से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में हैं और पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है। दूसरी ओर बुजुर्ग की वृद्धाश्रम भेजे जाने की अपील ने इस घटना को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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