Breaking News

बड़ी खबर: जंतर-मंतर पर अड़े प्रदर्शनकारी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास जाने से किया इनकार, बोले- 'बात करनी है तो जनता के बीच आइए'

 


नई दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच बातचीत को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। प्रदर्शनकारी संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि मंगलवार सुबह पुलिस ने उनसे संपर्क कर बताया कि केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा उनसे बातचीत करना चाहते हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के सरकारी आवास पर जाकर मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया।

सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बातचीत करना चाहती है तो उसे प्रदर्शन स्थल या उसके आसपास आकर जनता के बीच संवाद करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी के घर या कार्यालय में जाकर बातचीत नहीं करेंगे। उनका कहना है कि फिलहाल जंतर-मंतर पर 'जनता दरबार' चल रहा है और यदि सरकार गंभीर है तो वहीं बातचीत होनी चाहिए।

मंत्री आवास पर जाने से किया इनकार

मीडिया से बातचीत में सौरव दास ने कहा कि सुबह पुलिस अधिकारियों ने दोबारा उनसे संपर्क किया और बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा उनसे बातचीत करना चाहते हैं। पुलिस ने उन्हें मंत्री के आवास पर आने का प्रस्ताव दिया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन जनता के बीच चल रहा है और वे किसी सरकारी आवास या कार्यालय में जाकर बातचीत करने के पक्ष में नहीं हैं।

सौरव दास के अनुसार, "यदि मंत्री बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें जनता के बीच आना चाहिए। बातचीत जंतर-मंतर पर होनी चाहिए, जहां हजारों लोग अपनी मांगों को लेकर मौजूद हैं।"

जंतर-मंतर के पास तटस्थ स्थान पर भी तैयार

हालांकि प्रदर्शनकारी पूरी तरह बातचीत के खिलाफ नहीं हैं। सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार को सुरक्षा कारणों से जंतर-मंतर पर बातचीत करने में कोई परेशानी है, तो वे उसके पास किसी तटस्थ स्थान पर मिलने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी व्यावहारिक सोच रखने वाले लोग हैं और यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है, तो बातचीत के लिए बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल वे सरकार की ओर से अंतिम जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

"सिर्फ औपचारिक बैठक का कोई मतलब नहीं"

सौरव दास ने कहा कि केवल बातचीत के नाम पर बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं है, जब तक सरकार के पास प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख न हो।

उनका कहना था कि सरकार पहले यह स्पष्ट करे कि क्या वह वास्तव में उनकी मांगों पर विचार करने और समाधान निकालने की इच्छुक है।

उन्होंने कहा कि यदि केवल औपचारिकता निभाने के लिए बैठक बुलाई जाती है, तो उसमें समय बर्बाद करने का कोई अर्थ नहीं है।

"हमारा समय भी महत्वपूर्ण है"

प्रदर्शनकारी संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि आंदोलन में अभी भी हजारों लोग शामिल हैं और पूरे प्रदर्शन का संचालन भी उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में बिना किसी ठोस उद्देश्य के बातचीत के लिए प्रदर्शन स्थल छोड़ना उचित नहीं होगा।

उनके अनुसार, यदि सरकार गंभीरता से समाधान चाहती है तो उसे पहले अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए।

सरकार से मांगी स्पष्टता

सौरव दास ने सरकार से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह वास्तव में प्रदर्शनकारियों के साथ सार्थक संवाद करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य केवल बातचीत का दिखावा करना है तो इससे किसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।

उनका कहना था कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगों पर ठोस आश्वासन या समाधान नहीं मिलता।

आंदोलन में अब भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद

प्रदर्शनकारी संगठन का दावा है कि जंतर-मंतर पर अब भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं और आंदोलन लगातार जारी है।

प्रवक्ता के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों का उत्साह बना हुआ है और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है और प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

बातचीत पर टिकी निगाहें

फिलहाल सभी की नजर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा स्थान और एजेंडे पर सहमत होते हैं तो गतिरोध समाप्त होने की संभावना बन सकती है।

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से सौरव दास के इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच बातचीत को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। प्रदर्शनकारी संगठन ने केंद्रीय मंत्री के आवास पर जाकर मुलाकात करने से इनकार करते हुए कहा है कि यदि सरकार वास्तव में संवाद चाहती है तो उसे जनता के बीच आकर बातचीत करनी चाहिए। साथ ही संगठन ने जंतर-मंतर के निकट किसी तटस्थ स्थान पर मिलने की भी इच्छा जताई है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता निकल पाता है।

कोई टिप्पणी नहीं