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कथित अवैध संबंध बनाने का दबाव, फिर सीनियर अधिकारी की हत्या! जंगल में मिली लाश ने खोले कई राज

 


महाराष्ट्र के ठाणे जिले से एक बेहद सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। कल्याण तालुका के जंगल में मिले एक अज्ञात शव की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मिंडा कंपनी के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने अपने ही वरिष्ठ सहकर्मी की हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे लंबे समय से वरिष्ठ कर्मचारी द्वारा किए जा रहे अनुचित व्यवहार और कथित उत्पीड़न से परेशान थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

जंगल में मिला शव, मच गई थी सनसनी

यह मामला 28 जून 2026 का बताया जा रहा है। उस दिन ठाणे जिले के कल्याण तालुका में मुरबाड-अहिल्यानगर मार्ग पर स्थित मामनोली गांव के जंगल में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। जंगल में शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

छह विशेष टीमों का किया गया गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाणे ग्रामीण पुलिस ने जांच को तेज कर दिया। पुलिस अधीक्षक डॉ. विनय कुमार राठौड़, अपर पुलिस अधीक्षक अनमोल मित्तल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में स्थानीय अपराध शाखा और कल्याण तालुका पुलिस की छह विशेष टीमें गठित की गईं।

जांच टीमों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के इलाकों से हर संभव साक्ष्य जुटाने का प्रयास शुरू किया।

मृतक की हुई पहचान

काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने शव की पहचान 42 वर्षीय किशोरचंद्र कार्तिक साहू के रूप में की। वह मुरबाड स्थित मिंडा कंपनी में कार्यरत था और कंपनी में वरिष्ठ पद पर काम कर रहा था।

पहचान होने के बाद पुलिस ने मृतक के कार्यस्थल, सहकर्मियों और उसके दैनिक गतिविधियों की जांच शुरू की।

सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से मिला सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा कंपनी परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग, मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया गया।

इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जांच का शक कंपनी में काम करने वाले दो जूनियर कर्मचारियों पर गया।

इसके बाद पुलिस ने सौरभ विश्वनाथ गोल्हे (24) और ज्ञानेश्वर दत्तात्रेय कांठे (28) को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार करने का दावा

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।

पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने बताया कि वे लंबे समय से अपने वरिष्ठ सहकर्मी के व्यवहार से परेशान थे।

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने यह आरोप लगाया कि मृतक उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार करता था और उन पर अप्राकृतिक एवं अवैध संबंध बनाने के लिए दबाव डालता था।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है।

कथित प्रताड़ना से तंग आकर रची हत्या की साजिश

पुलिस के प्रारंभिक बयान के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि लगातार कथित उत्पीड़न से परेशान होकर उन्होंने हत्या की योजना बनाई।

आरोप है कि दोनों आरोपियों ने मृतक को बहाने से जंगल की ओर बुलाया और वहां उसकी हत्या कर दी।

पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद दोनों ने शव को जंगल में फेंक दिया ताकि वारदात का पता लगाने में कठिनाई हो और पहचान में भी देरी हो सके।

सोने की चेन लूटने का भी आरोप

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या के बाद आरोपियों ने मृतक के गले में पहनी हुई सोने की चेन भी निकाल ली थी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि हत्या के बाद लूट का प्रयास भी किया गया ताकि घटना को किसी अन्य अपराध का रूप दिया जा सके।

हालांकि इस पहलू की भी विस्तृत जांच जारी है।

अदालत ने भेजा पुलिस हिरासत में

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को 24 जुलाई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

इस दौरान पुलिस उनसे विस्तृत पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े अन्य संभावित साक्ष्य जुटा रही है।

सभी पहलुओं से हो रही जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल आरोपियों के बयान के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि—

  • क्या हत्या के पीछे केवल कथित उत्पीड़न ही कारण था?

  • क्या कोई आर्थिक विवाद भी था?

  • क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका है?

  • क्या आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि किसी अन्य साक्ष्य से होती है?

इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

कार्यस्थल पर उत्पीड़न के आरोपों ने खड़े किए सवाल

इस घटना ने कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की सुरक्षा और पेशेवर वातावरण को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को अपने वरिष्ठ अधिकारी से किसी प्रकार के उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार की शिकायत हो, तो उसे कानूनी और संस्थागत माध्यमों से शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

किसी भी परिस्थिति में कानून अपने हाथ में लेना उचित नहीं माना जा सकता।

वहीं यदि जांच में उत्पीड़न के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित मामलों में भी कानून के अनुसार अलग से कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस जुटा रही वैज्ञानिक साक्ष्य

पुलिस अब फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी सबूतों का विश्लेषण कर रही है।

जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें और मामले की हर कड़ी स्पष्ट रूप से सामने आ सके।

ठाणे का यह हत्याकांड कई गंभीर सवाल छोड़ गया है। एक ओर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों द्वारा लगाए गए कथित उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच जारी है। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

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