रुपये पर बढ़ा दबाव, RBI के कदमों पर टिकी बाजार की नजर
भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार में इस सप्ताह निवेशकों की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संभावित रणनीति पर टिकी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे आयातकों और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
कच्चे तेल की महंगाई बनी सबसे बड़ी वजह
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची, तो इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। महंगे तेल के कारण आयात बिल बढ़ने की आशंका है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बन रहा है।
दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
सोमवार के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 96.46 के स्तर तक कमजोर हो गया। यह पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता ने भी रुपये की कमजोरी को बढ़ावा दिया है।
RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपये में लगातार गिरावट जारी रहती है तो भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री को भी RBI की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोका जा सके।
शेयर और बॉन्ड बाजार पर भी असर
रुपये की कमजोरी का असर शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला। बढ़ती महंगाई की आशंका के चलते सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है, जबकि शेयर बाजार में भी दबाव बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब इस सप्ताह आने वाले आर्थिक आंकड़ों और RBI की आगे की रणनीति पर बनी हुई है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। जिन निवेशकों का निवेश लंबी अवधि के लिए है, उन्हें बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों को मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
आगे क्या रहेगा फोकस?
इस सप्ताह बाजार की नजर तीन प्रमुख बातों पर रहेगी—कच्चे तेल की कीमतों की दिशा, RBI का संभावित हस्तक्षेप और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां। यदि वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। दूसरी ओर यदि भू-राजनीतिक संकट गहराता है तो भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ सकता है।

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