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श्राद्ध में मचा मातम! आकाशीय बिजली ने छीन ली दो जिंदगियां, एम्बुलेंस की देरी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा


 

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां आकाशीय बिजली ने कुछ ही पलों में दो परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। सरायकेला थाना क्षेत्र की मुड़कुम पंचायत के नुआगुड़ा गांव में रविवार शाम श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान अचानक हुए भीषण वज्रपात की चपेट में आने से एक 10 वर्षीय बच्ची और 32 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस गए। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि एम्बुलेंस समय पर गांव पहुंच जाती तो दोनों घायलों की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान का इंतजार है।

श्राद्ध कार्यक्रम के बीच अचानक बदला मौसम

ग्रामीणों के अनुसार, नुआगुड़ा गांव में रौशनी सुरेन की मां सरस्वती सुरेन का श्राद्ध कर्म चल रहा था। इस धार्मिक कार्यक्रम में गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। रविवार शाम करीब साढ़े चार बजे अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई और देखते ही देखते आसमान में तेज गर्जना होने लगी।

इसी दौरान एक जोरदार आकाशीय बिजली कार्यक्रम स्थल के पास गिरी। बिजली गिरते ही वहां मौजूद कई लोग उसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

सात लोग हुए घायल, दो की गई जान

वज्रपात की चपेट में कुल सात लोग आए। इनमें 10 वर्षीय रौशनी सुरेन और 32 वर्षीय सोनू सरदार की हालत सबसे अधिक गंभीर बताई गई। इसके अलावा मालती सुरेन (6), सोनामाई सुरेन (12), सुनील गागराई (18), बेबी सुरेन (40) और राधी सुरेन (35) भी गंभीर रूप से झुलस गए।

घटना के तुरंत बाद गांव के लोगों ने सभी घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और प्राथमिक सहायता देने का प्रयास किया।

पारंपरिक तरीके से बचाने की कोशिश

ग्रामीणों ने बताया कि बिजली गिरने के बाद स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार कुछ लोगों ने बेहोश पड़े घायलों के शरीर पर गोबर लगाने का प्रयास किया। उनका मानना था कि इससे पीड़ितों को होश आ सकता है या उनकी जान बचाई जा सकती है।

चिकित्सकीय दृष्टि से इस प्रकार के उपायों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली गिरने से घायल व्यक्ति को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाकर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना सबसे जरूरी होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उस समय रौशनी सुरेन और सोनू सरदार की सांसें चल रही थीं और वे लगातार एम्बुलेंस सेवा को फोन कर रहे थे।

एम्बुलेंस पहुंचने में हुई देरी का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि हादसा शाम लगभग 4:30 बजे हुआ, जबकि एम्बुलेंस करीब 6:00 बजे गांव पहुंची। उनके अनुसार, इस दौरान घायल लगातार तड़पते रहे और समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी।

जैसे ही एम्बुलेंस गांव पहुंची, सभी घायलों को तत्काल सरायकेला सदर अस्पताल के लिए रवाना किया गया। लेकिन रास्ते में ही रौशनी सुरेन और सोनू सरदार ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

हालांकि, एम्बुलेंस के पहुंचने में हुई कथित देरी को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अस्पताल में चल रहा पांच घायलों का इलाज

इस दर्दनाक हादसे में घायल पांचों ग्रामीणों का इलाज सरायकेला सदर अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

घायलों में शामिल हैं—

  • मालती सुरेन (6 वर्ष)

  • सोनामाई सुरेन (12 वर्ष)

  • सुनील गागराई (18 वर्ष)

  • बेबी सुरेन (40 वर्ष)

  • राधी सुरेन (35 वर्ष)

डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायलों को आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर नियमित निगरानी की जा रही है।

पूरे गांव में पसरा मातम

श्राद्ध जैसे धार्मिक कार्यक्रम में अचानक हुई इस त्रासदी ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। जिस घर में पहले से ही परिवार शोक में डूबा था, वहां अब एक और मासूम की मौत ने दुख को कई गुना बढ़ा दिया।

रौशनी सुरेन की मौत से परिजन बदहवास हैं, वहीं सोनू सरदार के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में हर ओर केवल चीख-पुकार और शोक का माहौल देखने को मिला।

झारखंड में बढ़ रहे हैं वज्रपात के मामले

मानसून के दौरान झारखंड सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। मौसम विशेषज्ञ लगातार लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या ऊंचे स्थानों पर खड़े न होने की सलाह देते हैं।

बिजली गिरने की अधिकांश घटनाएं अचानक मौसम बदलने के दौरान होती हैं। ऐसे समय मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और सुरक्षित स्थान पर शरण लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

बिजली गिरने पर क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आकाशीय बिजली गिरने का खतरा हो तो कुछ सावधानियां अपनाना जीवन बचा सकती हैं—

  • तेज गर्जना या बिजली चमकने पर तुरंत पक्के भवन में चले जाएं।

  • खुले मैदान, खेत या जलाशय के पास खड़े न रहें।

  • अकेले खड़े ऊंचे पेड़ के नीचे शरण न लें।

  • धातु की वस्तुओं और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें।

  • यदि कोई व्यक्ति बिजली गिरने से घायल हो जाए तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराएं।

  • पारंपरिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय शीघ्र चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि दूरदराज के गांवों में एम्बुलेंस सेवा की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि ऐसी आपदाओं में लोगों की जान बचाई जा सके।

यदि एम्बुलेंस की देरी संबंधी आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

सरायकेला के नुआगुड़ा गांव की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएं कुछ ही क्षणों में अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। एक श्राद्ध समारोह में शामिल लोग यह नहीं जानते थे कि कुछ ही मिनटों बाद पूरा माहौल मातम में बदल जाएगा। इस हादसे ने जहां दो परिवारों से उनके अपने छीन लिए, वहीं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। फिलहाल घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है और स्थानीय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की जा रही है।

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