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भारत का बड़ा दांव! 100 अहम आयातित उत्पाद अब देश में बनेंगे, चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

 


भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने करीब 100 महत्वपूर्ण आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका कुल आयात मूल्य लगभग 51 अरब डॉलर है। इन उत्पादों का निर्माण देश में बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है ताकि वैश्विक आपूर्ति शृंखला के जोखिम कम हों और भारत की औद्योगिक क्षमता मजबूत हो सके।

आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति

सरकार का उद्देश्य उन उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है, जिनके लिए भारत अभी बड़े पैमाने पर दूसरे देशों, विशेषकर चीन, पर निर्भर है। योजना के तहत उद्योगों को प्रोत्साहन, नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

सरकार जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, उनमें शामिल हैं—

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) से जुड़े उपकरण

  • सोलर पैनल और सोलर सेल

  • टेक्सटाइल और फुटवियर

  • उन्नत विनिर्माण उपकरण

  • औद्योगिक मशीनरी

  • हाई-टेक कंपोनेंट्स

इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत का औद्योगिक आधार और मजबूत होने की उम्मीद है।

चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से लगभग 132 अरब डॉलर का आयात किया। सरकार अब उन वस्तुओं की सूची तैयार कर रही है जिनका उत्पादन भारत में प्रतिस्पर्धी लागत पर किया जा सके।

इसके लिए दक्षिण कोरिया, ताइवान, जर्मनी और इटली जैसी तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से विस्तार कर सकता है। नई फैक्ट्रियों की स्थापना, आधुनिक तकनीक का उपयोग और निवेश बढ़ने से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

इससे देश को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

रोजगार के नए अवसर

घरेलू उत्पादन बढ़ने से हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। विनिर्माण इकाइयों के विस्तार से इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, तकनीकी सेवाओं और MSME क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बल

यह पहल 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार पहले भी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के माध्यम से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देती रही है। अब आयात प्रतिस्थापन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उद्योग जगत की क्या है राय?

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार दीर्घकालिक नीति, आसान निवेश माहौल और प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन उपलब्ध कराती है, तो भारत वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

हालांकि, इसके लिए लागत, तकनीक, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और तेज़ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

करीब 51 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण आयातित उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की योजना भारत की औद्योगिक नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। यदि यह रणनीति सफल होती है तो न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रोजगार, निवेश, निर्यात और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। साथ ही भारत वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।

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