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किसी को बताया तो पेट काट दूंगा...’ दो मासूम बहनों से दरिंदगी के आरोप ने दहला दिया इलाका



महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ शहर के वाकड़ इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 65 वर्षीय एक व्यक्ति को अपनी पड़ोस में रहने वाली दो नाबालिग बहनों के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि आरोपी ने पिछले करीब डेढ़ महीने के दौरान 10 वर्षीय बच्ची के साथ कई बार और उसकी चार वर्षीय छोटी बहन के साथ भी एक बार दुष्कर्म किया। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जांच जारी है। साथ ही पीड़ित बच्चियों को कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

पड़ोसी पर लगा गंभीर आरोप

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान रमजान बागवान (65 वर्ष) के रूप में हुई है। आरोप है कि वह पीड़ित परिवार का पड़ोसी है और परिवार के भरोसे का फायदा उठाकर उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी ने कथित तौर पर 10 वर्षीय बच्ची के साथ पिछले डेढ़ महीने में चार बार यौन शोषण किया। इसके अलावा उसकी चार वर्षीय छोटी बहन के साथ भी एक बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस इन सभी आरोपों की विस्तृत जांच कर रही है।

मजदूरी करने जाता था पूरा परिवार

जानकारी के अनुसार, पीड़ित बच्चियों का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता है। परिवार के माता-पिता और दादा-दादी रोजाना काम पर चले जाते थे। इसी दौरान बच्चियां घर या आसपास रहती थीं।

दूसरी ओर आरोपी का परिवार भी कामकाजी बताया जा रहा है। घटना वाले दिन आरोपी की पत्नी और बेटा काम पर गए हुए थे, जबकि आरोपी घर पर अकेला था। पुलिस का कहना है कि इसी परिस्थिति का कथित तौर पर आरोपी ने फायदा उठाया।

पड़ोस की महिला की सतर्कता से खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा एक पड़ोसी महिला की सतर्कता के कारण हुआ। पुलिस के अनुसार, महिला ने एक दिन 10 वर्षीय बच्ची को आरोपी के घर जाते हुए देखा। यह बात उसे संदिग्ध लगी।

शाम को जब बच्चियों के माता-पिता मजदूरी से लौटे तो महिला ने उन्हें पूरी जानकारी दी और बच्ची के आरोपी के घर जाने की बात बताई। इसके बाद बच्ची की मां ने उससे विस्तार से पूछताछ की।

बताया जा रहा है कि पहले बच्ची काफी डरी हुई थी, लेकिन मां के बार-बार समझाने पर उसने कथित घटनाओं की जानकारी दी। बच्ची के बयान के बाद परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।

कथित धमकी के कारण चुप रही बच्ची

पुलिस के अनुसार, बच्ची ने अपने बयान में बताया कि आरोपी उसे लगातार धमकी देता था। आरोप है कि वह कहता था कि यदि उसने किसी को घटना के बारे में बताया तो वह उसे जान से मार देगा और चाकू से हमला करेगा।

इन्हीं धमकियों के कारण बच्ची लंबे समय तक डरी रही और किसी को कुछ नहीं बता सकी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर बच्चों को डराकर या लालच देकर चुप रहने के लिए मजबूर करने की कोशिश करते हैं, जिससे अपराध का खुलासा देर से हो पाता है।

पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित परिवार सीधे वाकड़ पुलिस स्टेशन पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की।

पुलिस ने आरोपी रमजान बागवान को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ POCSO अधिनियम, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (यदि लागू हो) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

पीड़ित बच्चियों को मिल रही सहायता

ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पीड़ित बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। पुलिस और संबंधित विभागों के अनुसार, बच्चियों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके साथ ही विशेषज्ञ काउंसलर के माध्यम से मनोवैज्ञानिक सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि वे इस गंभीर मानसिक आघात से धीरे-धीरे उबर सकें।

समाज के लिए गंभीर चेतावनी

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कई बार अपराधी परिचित, रिश्तेदार या पड़ोसी भी हो सकते हैं, इसलिए बच्चों को "गुड टच" और "बैड टच" के बारे में जागरूक करना बेहद आवश्यक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई बच्चा अचानक डरा हुआ रहने लगे, किसी व्यक्ति से मिलने से घबराए या उसके व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो अभिभावकों को सतर्क होकर उससे संवेदनशील तरीके से बात करनी चाहिए।

समय रहते खुलासा होना बना अहम

इस मामले में पड़ोस की महिला की सतर्कता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यदि उसने बच्ची के आरोपी के घर जाने की जानकारी परिवार को न दी होती, तो संभव है कि मामला और लंबे समय तक सामने नहीं आता।

पुलिस भी लोगों से अपील करती है कि यदि उन्हें किसी बच्चे की सुरक्षा को लेकर कोई संदेह हो, तो बिना देर किए संबंधित अधिकारियों या पुलिस को सूचना दें। समय पर दी गई जानकारी किसी बच्चे को बड़े अपराध का शिकार होने से बचा सकती है।

जांच जारी

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांच के अधीन है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जांच एजेंसियां सभी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़ित बच्चियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।

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