दुनिया थामे बैठी है सांसें! गिरफ्तारी की अटकलों के बीच नेतन्याहू ने दिया सबसे बड़ा संकेत
नई दिल्ली। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट और न्यूयॉर्क में उनकी संभावित यात्रा को लेकर चल रहे विवाद के बीच नेतन्याहू ने ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी विदेशी सरकार ने ICC के गिरफ्तारी वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की, तो इज़राइल की स्पेशल फ़ोर्स हस्तक्षेप करने के लिए तैयार रहेगी।
हालांकि नेतन्याहू ने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान उनके संभावित अमेरिका दौरे को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चाएं तेज हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ICC, अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ICC वारंट के बाद बढ़ा विवाद
नवंबर 2024 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने गाजा युद्ध के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों को लेकर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
ICC के इस कदम का इज़राइल ने शुरू से ही विरोध किया। इज़राइल का कहना है कि वह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। दूसरी ओर, ICC का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराधों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई आवश्यक है।
इसी वारंट के कारण नेतन्याहू की विदेश यात्राओं को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। कई ऐसे देश जो ICC के सदस्य हैं, सिद्धांत रूप में कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य माने जाते हैं।
फॉक्स न्यूज़ इंटरव्यू में क्या बोले नेतन्याहू?
अमेरिका दौरे के दौरान फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उन्हें विदेश यात्रा के दौरान गिरफ्तारी का जोखिम महसूस होता है, विशेष रूप से यदि किसी अप्रत्याशित स्थिति, जैसे मेडिकल इमरजेंसी, के कारण उन्हें किसी ICC सदस्य देश में रुकना पड़े।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह इन संभावनाओं के बारे में सोचते हैं, लेकिन उन्हें यात्रा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी सैन्य पृष्ठभूमि का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इज़राइल की स्पेशल फ़ोर्स में लगभग पांच वर्ष तक सेवा की है। इसी संदर्भ में उन्होंने संकेत दिया कि यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो इज़राइल के पास अपने प्रधानमंत्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता मौजूद है।
उनके इस बयान को कई विश्लेषक एक कड़ा राजनीतिक संदेश मान रहे हैं।
न्यूयॉर्क यात्रा बनी विवाद की वजह
पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब न्यूयॉर्क के अधिकारी ज़ोहरान ममदानी ने जुलाई की शुरुआत में कहा था कि यदि नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल होने न्यूयॉर्क आते हैं तो वह संबंधित कानूनी अधिकारियों के साथ इस बात पर चर्चा करेंगे कि ICC के गिरफ्तारी वारंट को किस प्रकार लागू किया जा सकता है।
इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक सुर्खियां बटोरीं।
हालांकि बाद में ममदानी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क प्रशासन के पास किसी विदेशी नेता को ICC वारंट के आधार पर गिरफ्तार करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का अधिकार संघीय सरकार के पास होता है और स्थानीय प्रशासन केवल अपनी राय व्यक्त कर सकता है।
इसके बाद उन्होंने अपने पहले बयान को प्रभावी रूप से वापस ले लिया।
ममदानी पर नेतन्याहू का पलटवार
फॉक्स न्यूज़ इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने ज़ोहरान ममदानी की कड़ी आलोचना भी की।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज के अलग-अलग वर्गों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति समाज में विभाजन पैदा करती है और यहूदी समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास करती है।
नेतन्याहू ने संकेत दिया कि वह भविष्य में भी न्यूयॉर्क की यात्रा करने से पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रंप का भी आया बयान
इस पूरे विवाद के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने नेतन्याहू के समर्थन में कहा कि अमेरिका में उन्हें किसी भी परिस्थिति में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
ट्रंप का यह बयान अमेरिका और इज़राइल के बीच मजबूत राजनीतिक संबंधों की एक और झलक माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि यदि नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने अमेरिका आते हैं, तो उन्हें अमेरिकी प्रशासन का राजनीतिक समर्थन मिल सकता है।
ICC और इज़राइल के बीच लंबे समय से टकराव
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट और इज़राइल के बीच विवाद नया नहीं है।
इज़राइल लंबे समय से यह कहता रहा है कि ICC को उसके मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। इज़राइल का तर्क है कि उसकी न्यायिक व्यवस्था स्वतंत्र और सक्षम है तथा वह अपने मामलों की जांच स्वयं कर सकता है।
दूसरी ओर ICC का कहना है कि जब गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोप सामने आते हैं, तब अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त है।
यही कारण है कि नवंबर 2024 में जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
क्या वास्तव में हो सकती है गिरफ्तारी?
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों के अनुसार ICC के गिरफ्तारी वारंट का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित देश रोम संविधि (Rome Statute) का सदस्य है या नहीं और वह कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए कितना प्रतिबद्ध है।
हालांकि व्यवहारिक स्तर पर किसी मौजूदा प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ्तारी अत्यंत जटिल और संवेदनशील मामला माना जाता है। इसमें कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी कई पहलू भी शामिल होते हैं।
इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि नेतन्याहू की किसी भी विदेश यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक परिस्थितियां विशेष महत्व रखेंगी।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ICC के वारंट को लेकर किसी भी देश में वास्तविक कार्रवाई की कोशिश होती है, तो इसका असर केवल इज़राइल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ेगा।
यह मामला संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था, अमेरिका-इज़राइल संबंधों और मध्य पूर्व की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। कई देशों की नजर अब सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा पर टिकी हुई है, जहां नेतन्याहू की संभावित मौजूदगी और उससे जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
फिलहाल बनी हुई है अनिश्चितता
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे या नहीं। यदि वे अमेरिका जाते हैं, तो उनकी यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
वहीं, ICC का गिरफ्तारी वारंट अब भी प्रभावी है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। दूसरी ओर अमेरिका और इज़राइल इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह केवल मध्य पूर्व की राजनीति ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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