मिडिल ईस्ट में छिड़ा महायुद्ध? अमेरिका-सऊदी के हमले के बाद ईरान का ऐसा पलटवार, दुनिया दहल उठी
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। क्षेत्र में पहले से जारी टकराव के बीच अब एक नया मोड़ सामने आया है। सामने आई जानकारी और विभिन्न दावों के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त रूप से इराक के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में कथित तौर पर ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं, इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ये घट
नाएं पूरी तरह सही साबित होती हैं, तो इससे पूरे पश्चिम एशिया में बड़े सैन्य संघर्ष का खतरा और बढ़ सकता है।
इराक के कई इलाकों में गूंजे धमाके
रिपोर्टों के मुताबिक, इराक के रेगिस्तानी क्षेत्रों में देर रात अचानक तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। दावा किया गया कि अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त वायुसेना ने बेहद सटीक तरीके से उन ठिकानों को निशाना बनाया, जहां ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों के हथियार, गोला-बारूद और लॉजिस्टिक्स सप्लाई सेंटर मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के लिए किया जा रहा था।
20 लोगों की मौत, 32 घायल होने का दावा
इराक की पैरामिलिट्री संस्था पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) ने दावा किया कि उसके कई ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम 20 सदस्य मारे गए हैं, जबकि 32 अन्य घायल हुए हैं।
घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलने की भी खबर है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
किन-किन इलाकों को बनाया गया निशाना
दावों के अनुसार, हवाई हमले इराक के सात प्रमुख प्रांतों में किए गए। इनमें शामिल हैं—
बगदाद
वासित
निनवे
बसरा
किरकुक
कर्बला
दियाला
इन इलाकों में कथित तौर पर हथियारों के गोदाम, लॉजिस्टिक्स सेंटर और ईरान समर्थित समूहों के संचालन केंद्र मौजूद थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कथित तौर पर कहा कि यह कार्रवाई उन संगठनों के खिलाफ की गई, जिन्हें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का समर्थन प्राप्त है।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन समूहों ने हाल के महीनों में अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की योजना बनाई थी या उन्हें अंजाम दिया था। इसी के जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।
फरवरी से अप्रैल तक सैकड़ों हमलों का दावा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष फरवरी से अप्रैल के बीच ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 600 से अधिक हमलों या हमलों के प्रयास किए।
अमेरिका का कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो भविष्य में भी इसी तरह की सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बगदाद में आपात बैठक
हमलों की खबर सामने आने के बाद इराक की राजधानी बगदाद में सुरक्षा एजेंसियों में हलचल तेज हो गई।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई, जिसमें देश की सुरक्षा व्यवस्था, सीमाई हालात और संभावित जवाबी रणनीति पर चर्चा की गई।
सरकार की ओर से नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील भी की गई।
ईरान का जवाबी हमला करने का दावा
हवाई हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।
ईरानी पक्ष के अनुसार, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयर बेस और CENTCOM के एक सैन्य मुख्यालय को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां और कथित हस्तक्षेप बंद नहीं करेगा, तब तक उसका प्रतिरोध जारी रहेगा।
हालांकि, इस जवाबी हमले के संबंध में भी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
पूरे मिडिल ईस्ट में बढ़ी चिंता
यदि यह घटनाक्रम पूरी तरह सही साबित होता है, तो इसका असर केवल इराक, ईरान, अमेरिका और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
तेल उत्पादक देशों में तनाव बढ़ने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
दुनिया के कई देश पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले भी क्षेत्र में संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील करती रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहा, तो यह संघर्ष कई देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका, सऊदी अरब, ईरान और इराक से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। विभिन्न पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सैन्य कार्रवाई सीमित स्तर तक रहती है या फिर इससे पूरे मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका और गहरा जाती है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इसी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

कोई टिप्पणी नहीं