पंचशील और पाँच प्रतिज्ञाओं के साथ शांतिपूर्ण मार्च की अपील, अनुशासन और अहिंसा पर दिया गया जोर
मार्च में केवल तिरंगा रखने और संविधान के सम्मान का आह्वान
एक प्रस्तावित जनमार्च को लेकर सोशल मीडिया पर पाँच प्रतिज्ञाओं (पंचशील) का संदेश साझा किया गया है। इस संदेश में मार्च में शामिल होने वाले लोगों से अनुशासन, अहिंसा और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की गई है। संदेश के अनुसार, सभी प्रतिभागियों से इन प्रतिज्ञाओं का पालन करने का आग्रह किया गया है ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
इस संदेश को सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह अपील किस विशेष आयोजन या मार्च के लिए जारी की गई है।
पहली प्रतिज्ञा: केवल तिरंगा रहेगा साथ
संदेश में कहा गया है कि मार्च के दौरान केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ही हाथ में रखा जाएगा। किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या अन्य समूह का झंडा लेकर चलने से बचने की अपील की गई है। इसका उद्देश्य कार्यक्रम को किसी दल या संगठन विशेष के बजाय राष्ट्रीय भावना से जोड़कर प्रस्तुत करना बताया गया है।
संविधान और महान नेताओं की तस्वीर रखने की अपील
दूसरी प्रतिज्ञा में प्रतिभागियों से कहा गया है कि वे अपने हाथ में भारतीय संविधान की प्रति या फिर महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर अथवा शहीद भगत सिंह की तस्वीर रखें। संदेश में इन प्रतीकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतिनिधि बताया गया है।
सकारात्मक नारों पर जोर
तीसरी प्रतिज्ञा में नकारात्मक या भड़काऊ नारों से बचने की अपील की गई है। इसके स्थान पर केवल सकारात्मक और देशभक्ति से जुड़े नारों का उपयोग करने को कहा गया है। इनमें "जय हिन्द", "भारत माता की जय", "इंकलाब जिंदाबाद" और "जय भीम" जैसे नारे शामिल हैं।
इस का पालन सभी को करना है,
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 19, 2026
पंचशील/ पाँच प्रतिज्ञा
1. मार्च में सिर्फ़ एक झंडा — तिरंगा। किसी पार्टी, किसी संगठन का और कोई झंडा नहीं होगा ।
2. हाथ में या तो संविधान या फिर गांधी, आंबेडकर या भगत सिंह की तस्वीर रहेगी।
3. जुबान पर कोई नेगेटिव नारा नहीं — बस “जय हिन्द”, “भारत माता… pic.twitter.com/U0JJvpyiuY
संदेश के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव से बचते हुए शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना है।
अनुशासन बनाए रखने का आग्रह
चौथी प्रतिज्ञा में प्रतिभागियों से कार्यक्रम के दौरान अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि मंच संचालकों और स्वयंसेवकों (वालंटियर्स) द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों का पालन किया जाए तथा अन्य लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जाए।
आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अनुशासन को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण इस प्रतिज्ञा में सहयोग और संयम पर विशेष बल दिया गया है।
अहिंसा का संकल्प सबसे महत्वपूर्ण
पाँचवीं और अंतिम प्रतिज्ञा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का सहारा नहीं लिया जाएगा। संदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी प्रकार की उकसावे की स्थिति उत्पन्न होती है, तब भी प्रतिभागी शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखें और किसी पर हाथ न उठाएं।
यह संदेश महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत की याद दिलाता है, जिसमें विरोध या आंदोलन के दौरान भी शांति और संयम बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और विभिन्न लोग इसे अनुशासित एवं शांतिपूर्ण जनभागीदारी का संदेश बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप पहल के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, इस संदेश के साथ किसी प्रशासनिक आदेश या आधिकारिक दिशा-निर्देश का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इसे एक अपील या आचार-संहिता के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी सरकारी निर्देश के रूप में।
पाँच प्रतिज्ञाओं वाला यह संदेश राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, संविधान के प्रति आस्था, सकारात्मक संवाद, अनुशासन और अहिंसा जैसे मूल्यों पर आधारित है। यदि किसी सार्वजनिक मार्च या जनआंदोलन में इन सिद्धांतों का पालन किया जाता है, तो इससे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। फिलहाल यह संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है और लोगों से इन सिद्धांतों का पालन करने की अपील की जा रही है।

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