हनुमानगढ़ी को लेकर बृजभूषण का विस्फोटक दावा! "मुस्लिम समाज ने कराया निर्माण, लेकिन कभी नहीं पढ़ी गई नमाज" वीडियो देखें
Ayodhya News: अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई और इस संबंध में किए जा रहे दावे पूरी तरह गलत हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में मुस्लिम समाज का योगदान रहा था, इसलिए इतिहास को सही संदर्भ में समझा जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब हनुमानगढ़ी को लेकर विभिन्न राजनीतिक टिप्पणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
क्या कहा बृजभूषण शरण सिंह ने?
मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि कभी हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़ी जाती थी, जबकि उनके अनुसार यह बात तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
उन्होंने कहा,
"हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। जो लोग ऐसा कहते हैं, उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में मुस्लिम समाज का योगदान रहा था।"
किस बयान के बाद शुरू हुई बहस?
हनुमानगढ़ी को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। इसी क्रम में विभिन्न नेताओं की ओर से अलग-अलग दावे किए गए, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया। बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया भी इन्हीं दावों के जवाब के रूप में सामने आई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
बृजभूषण शरण सिंह के बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X सहित अन्य माध्यमों पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इतिहास से जुड़े तथ्यों पर और अधिक स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई. ये गलत बात है.
— Ranvijay Singh (@ranvijaylive) July 17, 2026
जो लोग नमाज पढ़ने की बात करते हैं, उन्हें मालूम होना चाहिए कि हनुमानगढ़ी का निर्माण मुस्लिम समाज ने कराया था.
-बृजभूषण शरण सिंह pic.twitter.com/slPpz9yrZN
हालांकि सोशल मीडिया पर व्यक्त की जा रही राय स्वतंत्र टिप्पणियां हैं और इन्हें आधिकारिक ऐतिहासिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
इतिहास को लेकर अलग-अलग दावे
हनुमानगढ़ी के इतिहास को लेकर समय-समय पर विभिन्न ऐतिहासिक व्याख्याएं सामने आती रही हैं। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच भी कई पहलुओं पर अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं। ऐसे में किसी भी ऐतिहासिक दावे का मूल्यांकन उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों और शोध के आधार पर किया जाता है।
बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान भी एक राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। उनके इस दावे पर अभी तक किसी सरकारी एजेंसी या न्यायिक संस्था की ओर से कोई नई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
पूर्व सांसद के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे अक्सर सार्वजनिक बहस का विषय बनते हैं और ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों तथा आधिकारिक अभिलेखों का महत्व सबसे अधिक होता है।
पत्रकार:- सर कहा जा रहा है हनुमान गढी पर नमाज पढी गई थी
— Braj Shyam Maurya (@brijshyam8) July 17, 2026
बृजभूषण शरण सिंह:- नही नही नही... कभी नमाज नही पढी गई
ये गलत बात है वहां कभी नमाज नही पढी गई थी !!
पत्रकार:- शंकराचार्य ने कहा कि जो ये बात कह रहे वो साबित कर दे मै अयोध्या आना छोड दूंगा
बृजभूषण शरण सिंह:- बिल्कुल, देखिए… pic.twitter.com/2mkritEUJG
अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि "हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई" और यह दावा गलत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में मुस्लिम समाज का योगदान रहा था। उनका यह बयान फिलहाल राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, इस विषय पर विभिन्न ऐतिहासिक दावों और व्याख्याओं के बीच आधिकारिक अभिलेखों और प्रमाणों को ही अंतिम आधार माना जाता है।

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