किस उम्र में पूरी तरह खत्म हो जाती है मर्द की पौरुष शक्ति? आंकड़ा जानकर नहीं होगा यकीन
7 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के हालिया फैसले ने पूरे देश में एक नई कानूनी और चिकित्सीय बहस को जन्म दे दिया है। अदालत ने इस जघन्य अपराध के दोषी को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा में संशोधन करते हुए आदेश दिया कि उसे उसकी पौरुष शक्ति समाप्त होने तक जेल में रखा जाए।
इस फैसले के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर पुरुष की पौरुष शक्ति किस उम्र में खत्म होती है? क्या इसके लिए कोई तय उम्र होती है या यह व्यक्ति विशेष की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है? चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है। पुरुषों की यौन क्षमता उम्र के साथ धीरे-धीरे कम होती है, लेकिन पूरी तरह समाप्त होने की कोई तय आयु नहीं होती।
क्या होती है पौरुष शक्ति?
सामान्य भाषा में पौरुष शक्ति से तात्पर्य पुरुष की यौन क्षमता, प्रजनन क्षमता और यौन क्रियाओं को करने की शारीरिक एवं मानसिक योग्यता से लगाया जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे किसी एक पैरामीटर से नहीं मापा जाता, बल्कि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, रक्त संचार और कई अन्य जैविक कारकों के आधार पर देखा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पौरुष शक्ति केवल उम्र पर निर्भर नहीं करती बल्कि व्यक्ति की जीवनशैली, खानपान, व्यायाम, बीमारी, तनाव और आनुवंशिक कारण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या कोई निश्चित उम्र होती है?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह बताए कि किसी निश्चित उम्र में हर पुरुष की पौरुष शक्ति समाप्त हो जाती है।
महिलाओं में जहां मेनोपॉज के बाद प्रजनन क्षमता समाप्त हो जाती है, वहीं पुरुषों में ऐसा कोई अचानक परिवर्तन नहीं होता। पुरुषों में यौन क्षमता और हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होता है, लेकिन कई लोग 70, 80 या उससे अधिक उम्र तक भी यौन रूप से सक्रिय रह सकते हैं।
यही कारण है कि डॉक्टर किसी भी व्यक्ति की पौरुष क्षमता का आकलन केवल उसकी उम्र देखकर नहीं करते।
30 वर्ष के बाद शुरू होती है हार्मोन में गिरावट
चिकित्सा अनुसंधानों के अनुसार पुरुषों में मुख्य सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन लगभग 30 वर्ष की आयु के बाद धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाता है।
अधिकांश अध्ययनों के मुताबिक इस उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन का स्तर हर वर्ष लगभग 1 प्रतिशत तक घट सकता है। हालांकि शुरुआती वर्षों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।
धीरे-धीरे इस हार्मोन में कमी आने से कुछ पुरुषों में निम्नलिखित बदलाव देखने को मिल सकते हैं—
ऊर्जा में कमी
मांसपेशियों की ताकत कम होना
यौन इच्छा में कमी
इरेक्शन संबंधी समस्याएं
थकान बढ़ना
मूड में बदलाव
आत्मविश्वास में कमी
हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में ये सभी लक्षण दिखाई दें।
क्या है एंड्रोपोज?
महिलाओं में मेनोपॉज की तरह पुरुषों में भी उम्र बढ़ने के साथ हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं। इसे कई बार एंड्रोपोज कहा जाता है।
आमतौर पर 40 से 50 वर्ष की आयु के बीच कुछ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर पहले की तुलना में अधिक तेजी से कम होने लगता है।
हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि एंड्रोपोज मेनोपॉज जैसा निश्चित और सार्वभौमिक चरण नहीं है। हर पुरुष इसका अनुभव नहीं करता और न ही सभी में इसके लक्षण समान होते हैं।
कुछ लोगों में यह परिवर्तन बहुत हल्का होता है जबकि कुछ में इसका असर जीवन की गुणवत्ता पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या बुजुर्ग पुरुष भी यौन रूप से सक्रिय रह सकते हैं?
कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अच्छी शारीरिक और मानसिक स्थिति बनाए रखने वाले पुरुष वृद्धावस्था तक भी सक्रिय यौन जीवन जी सकते हैं।
शोधों के अनुसार 75 से 85 वर्ष की आयु तक भी कई पुरुष यौन रूप से सक्रिय रहते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि व्यक्ति—
नियमित व्यायाम करे,
संतुलित आहार ले,
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए,
मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियों को नियंत्रित रखे,
मानसिक तनाव कम रखे,
तो उसकी यौन क्षमता लंबे समय तक बेहतर बनी रह सकती है।
कौन-कौन से कारण प्रभावित करते हैं पौरुष शक्ति?
केवल उम्र ही पौरुष शक्ति निर्धारित नहीं करती। कई अन्य कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इनमें शामिल हैं—
मधुमेह
मोटापा
उच्च रक्तचाप
हृदय रोग
धूम्रपान
शराब का अत्यधिक सेवन
अवसाद
मानसिक तनाव
नींद की कमी
कुछ दवाओं का लंबे समय तक उपयोग
इसी कारण समान उम्र के दो व्यक्तियों की यौन क्षमता में काफी अंतर हो सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश का कानूनी अर्थ क्या है?
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले में जिस "पौरुष शक्ति समाप्त होने" की बात कही गई, उसे चिकित्सा विज्ञान की किसी निश्चित आयु से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का आशय यह था कि दोषी को इतनी लंबी अवधि तक कारावास में रखा जाए कि वह अत्यधिक वृद्ध और शारीरिक रूप से इतना कमजोर हो जाए कि समाज के लिए यौन अपराध का खतरा न बने।
यह अभिव्यक्ति एक कानूनी अवधारणा के रूप में प्रयुक्त हुई है, न कि किसी वैज्ञानिक या चिकित्सीय आयु सीमा के रूप में।
क्या यह फैसला भविष्य में मिसाल बन सकता है?
इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने समाज की सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर रुख अपनाया है।
दूसरी ओर कुछ विधि विशेषज्ञों का कहना है कि "पौरुष शक्ति समाप्त होने" जैसी अभिव्यक्ति की व्याख्या भविष्य में अलग-अलग तरीके से की जा सकती है, क्योंकि इसकी कोई चिकित्सीय परिभाषा या निश्चित आयु उपलब्ध नहीं है।
ऐसे मामलों में अदालतें अपराध की प्रकृति, दोषी की उम्र, कानून के प्रावधान और समाज के हित को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग निर्णय दे सकती हैं।
क्या उम्र बढ़ने का मतलब यौन क्षमता खत्म होना है?
विशेषज्ञ इस धारणा को गलत मानते हैं कि अधिक उम्र का मतलब यौन क्षमता का पूरी तरह समाप्त हो जाना है।
उम्र बढ़ने के साथ क्षमता में कमी आना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन कई लोग 70 या 80 वर्ष की आयु में भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीते हैं।
इसीलिए किसी व्यक्ति की यौन क्षमता का आकलन केवल उम्र के आधार पर नहीं किया जा सकता।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस के साथ-साथ चिकित्सा विज्ञान से जुड़ा सवाल भी लोगों के सामने रखा है। विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है कि पुरुषों की पौरुष शक्ति समाप्त होने की कोई निश्चित आयु निर्धारित नहीं है। टेस्टोस्टेरोन में गिरावट और यौन क्षमता में कमी एक धीरे-धीरे होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग गति से होती है।
ऐसे में अदालत के आदेश को चिकित्सीय उम्र के बजाय एक कानूनी अभिव्यक्ति के रूप में समझना अधिक उचित होगा। इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर यौन अपराधों में न्यायालय समाज की सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कठोर दृष्टिकोण अपना सकते हैं।
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