AI से छात्रा की कथित अश्लील तस्वीरें बनाकर इंस्टाग्राम पर कीं पोस्ट, इसके बाद हुआ चौकाने वाला ये काम
![]() |
| AI Image |
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से साइबर अपराध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक छात्र ने अपनी साथी छात्रा की AI तकनीक की मदद से कथित अश्लील तस्वीरें तैयार कर उन्हें फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इतना ही नहीं, जब संबंधित अकाउंट बंद कराया गया तो कथित तौर पर दूसरी आईडी बनाकर दोबारा तस्वीरें अपलोड की गईं।
पीड़ित छात्रा की मां की शिकायत पर प्रेम नगर थाने में आरोपी छात्र अक्षय राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तस्वीरें किस तकनीक से बनाई गईं और उन्हें किन-किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया।
AI तकनीक के कथित दुरुपयोग का मामला
शिकायत के अनुसार, छात्रा की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें AI तकनीक की सहायता से कथित रूप से अश्लील रूप दिया गया। इसके बाद इन तस्वीरों को एक इंस्टाग्राम अकाउंट से अपलोड किया गया, जिससे छात्रा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
परिजनों का आरोप है कि तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगीं, जिससे छात्रा और उसके परिवार को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से की गई पोस्ट
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने कथित तौर पर एक अलग इंस्टाग्राम आईडी बनाकर तस्वीरें पोस्ट कीं। जब परिवार ने शिकायत कर उस अकाउंट को बंद कराया, तो आरोप है कि इसके बाद दूसरी आईडी बनाकर फिर से वही तस्वीरें अपलोड कर दी गईं।
इस घटनाक्रम के बाद छात्रा के परिवार ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
मां ने दर्ज कराई एफआईआर
पीड़ित छात्रा की मां ने प्रेम नगर थाने में लिखित शिकायत देते हुए आरोपी अक्षय राणा पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा सकती है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप इस समय शिकायत का हिस्सा हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस कर रही है डिजिटल जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद भी ले सकती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि—
तस्वीरें वास्तव में AI की सहायता से बनाई गई थीं या नहीं।
इंस्टाग्राम अकाउंट किसके नाम से संचालित हो रहा था।
पोस्ट किस डिवाइस और इंटरनेट कनेक्शन से अपलोड की गईं।
क्या तस्वीरें अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की गई थीं।
डिजिटल साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
AI और डीपफेक का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फोटो और वीडियो एडिटिंग तकनीक तेजी से विकसित हुई है। इन तकनीकों का उपयोग कई सकारात्मक कार्यों में किया जा रहा है, लेकिन कुछ मामलों में इनका कथित दुरुपयोग भी सामने आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति की तस्वीर को उसकी अनुमति के बिना अश्लील या भ्रामक रूप में बदलकर इंटरनेट पर साझा करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कई मामलों में यह गंभीर कानूनी अपराध भी हो सकता है।
यही वजह है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ रहे साइबर अपराध
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर बुलिंग, फर्जी प्रोफाइल, मॉर्फ्ड फोटो और डीपफेक जैसी घटनाओं में भी वृद्धि देखी जा रही है।
कई बार व्यक्तिगत विवाद, बदला लेने की भावना या किसी को बदनाम करने के उद्देश्य से लोगों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें इंटरनेट पर वायरल कर दिया जाता है।
ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्या कहते हैं साइबर विशेषज्ञ?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की फर्जी या मॉर्फ्ड तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए तो उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करना चाहिए।
इसके साथ ही स्थानीय साइबर पुलिस या संबंधित थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
डिजिटल साक्ष्यों जैसे स्क्रीनशॉट, लिंक और यूआरएल सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार होता है।
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी
ऐसे मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि किसी अकाउंट से किसी की आपत्तिजनक या फर्जी तस्वीरें साझा की जाती हैं, तो शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म संबंधित कंटेंट हटाने और अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
हालांकि, कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होता है कि अपराध किसने किया और उसकी कानूनी जिम्मेदारी किस पर बनती है।
छात्रों में डिजिटल जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
AI जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग रचनात्मक और सकारात्मक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति को बदनाम करने या मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
प्रेम नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आरोपी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बरेली में सामने आया यह मामला आधुनिक तकनीक के कथित दुरुपयोग और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है। आरोप है कि एक छात्र ने AI तकनीक की मदद से अपनी साथी छात्रा की कथित अश्लील तस्वीरें बनाकर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा कीं। छात्रा की मां की शिकायत पर प्रेम नगर थाने में आरोपी अक्षय राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। यह घटना डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन जिम्मेदारी और AI तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।

कोई टिप्पणी नहीं