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लखनऊ में 15 वर्षीय छात्रा से कथित गैंगरेप का आरोप, सहेली के घर से लौटते वक्त कार में किया अपहरण, तीन आरोपी गिरफ्तार

 


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है। अलीगंज थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय एक किशोरी के साथ कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि सहेली के घर से लौट रही नौवीं कक्षा की छात्रा को कार सवार तीन युवकों ने जबरन अगवा कर लिया। इसके बाद उसे एक किराये के कमरे में ले जाकर कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर सड़क किनारे छोड़ दिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही है।

सहेली के घर से लौट रही थी छात्रा

पुलिस के अनुसार, पीड़िता मूल रूप से हरदोई जिले की रहने वाली है और वर्तमान में अपने परिवार के साथ लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में किराये के मकान में रहती है। वह कक्षा नौ की छात्रा है।

बताया गया कि सोमवार शाम वह अपनी एक सहेली के घर गई थी। वहां से वापस लौटते समय 60 फीट रोड के पास कार सवार तीन युवकों ने कथित तौर पर उसे जबरन कार में बैठा लिया। आरोप है कि इस दौरान उसका मुंह दबा दिया गया ताकि वह शोर न मचा सके।

इसके बाद आरोपी उसे एक कमरे में ले गए, जहां उसके साथ कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का आरोप है कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसे धमकाते हुए सड़क किनारे छोड़ दिया गया।

देर रात परिजनों के साथ पहुंची थाने

घटना के बाद किसी तरह घर पहुंची किशोरी ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के सदस्य उसे लेकर देर रात अलीगंज थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, मारपीट, आपराधिक धमकी और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

अधिकारियों का कहना है कि नाबालिग होने के कारण पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज से मिला अहम सुराग

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा मोबाइल लोकेशन, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों को भी जांच में शामिल किया गया।

इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली है, जिसे जांच के लिए कब्जे में लिया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद वाहन और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

पूर्व मकान मालिक का बेटा भी शामिल

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में पीड़िता के पूर्व मकान मालिक का बेटा जतिन बाजपेई, उसका साथी दीपक तथा प्रयागराज निवासी एलएलबी का छात्र विंध्यवासिनी पांडेय शामिल हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित घटना विंध्यवासिनी पांडेय के किराये के कमरे में हुई। पुलिस ने कमरे का निरीक्षण कर वहां से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं।

फिलहाल तीनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के खिलाफ पहले भी विभिन्न मामलों में मुकदमे दर्ज हैं।

अब पुलिस उनका पूरा आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वे पहले भी किसी गंभीर अपराध में शामिल रहे हैं।

यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। साथ ही पुलिस ने न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसके बयान भी दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से पुलिस वैज्ञानिक तरीके से सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच कराने पर विशेष ध्यान दे रही है।

पुलिस हर पहलू से कर रही जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जाएगा।

यह भी जांच की जा रही है कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक हुई। साथ ही आरोपियों और पीड़िता के बीच पहले से किसी प्रकार की जान-पहचान थी या नहीं, इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

राजधानी लखनऊ में सामने आई इस घटना के बाद महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। विशेष रूप से स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए नियमित पुलिस गश्त, सीसीटीवी निगरानी और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि परिवारों को बच्चों को सुरक्षा संबंधी जागरूकता देना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देना बेहद जरूरी है।

कानून के तहत होगी कार्रवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में पॉक्सो अधिनियम लागू होने के कारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया विशेष प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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