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Video - अस्पताल के बेड पर लेटे युवक की अचानक निकली चीख... आखिर ऐसा क्या हुआ कि लग गया करंट?

 


नई दिल्ली: अस्पताल को आमतौर पर ऐसी जगह माना जाता है, जहां मरीज सुरक्षित माहौल में इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जब अस्पताल के अंदर ही किसी मरीज के साथ हादसा हो जाए, तो यह न केवल चिंता का विषय बन जाता है बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर देता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के लिए भर्ती एक युवक को अस्पताल के बेड पर लेटे-लेटे ही अचानक करंट लग गया। घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और युवक को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दी गई।

इस घटना ने अस्पतालों में बिजली सुरक्षा, उपकरणों की नियमित जांच और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर अस्पताल के भीतर ऐसा हादसा कैसे हुआ।

इलाज के दौरान अचानक हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक किसी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था। वह वार्ड में अपने बेड पर आराम कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसे तेज करंट का झटका महसूस हुआ। युवक की चीख सुनकर वार्ड में मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन घबरा गए।

अस्पताल के कर्मचारियों ने तत्काल बिजली की आपूर्ति बंद कराई और युवक को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसकी चिकित्सकीय जांच शुरू की। प्रारंभिक उपचार के बाद उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई।

घटना के बाद कुछ समय के लिए अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई मरीजों और उनके परिजनों ने भी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

आखिर करंट कैसे लगा?

फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि युवक को करंट किस वजह से लगा। हालांकि शुरुआती स्तर पर कई संभावित कारणों की जांच की जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में निम्न कारण हो सकते हैं—

  • अस्पताल के बेड में बिजली का रिसाव होना।

  • अर्थिंग सिस्टम में खराबी।

  • किसी मेडिकल उपकरण में तकनीकी दोष।

  • बिजली के खुले तार या ढीले कनेक्शन।

  • नमी या पानी के संपर्क में आए विद्युत उपकरण।

  • रखरखाव में लापरवाही।

जांच टीम इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

अस्पताल प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि युवक को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। साथ ही संबंधित वार्ड की बिजली व्यवस्था की जांच शुरू कर दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल ने यह भी कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

परिजनों में नाराजगी

घटना के बाद युवक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी जगह पर यदि मरीज सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।

परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती मरीज पूरी तरह डॉक्टरों और प्रशासन की जिम्मेदारी होते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

अस्पतालों में बिजली सुरक्षा क्यों है जरूरी?

आधुनिक अस्पताल पूरी तरह बिजली आधारित उपकरणों पर निर्भर होते हैं। आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, मॉनिटर, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, इन्फ्यूजन पंप और अन्य कई जीवन रक्षक उपकरण लगातार बिजली से संचालित होते हैं।

ऐसी स्थिति में यदि बिजली व्यवस्था में थोड़ी भी तकनीकी खराबी आ जाए तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।

इसी कारण सभी अस्पतालों में समय-समय पर विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य माना जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—

  • सभी बिजली उपकरणों की नियमित जांच हो।

  • अर्थिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाए।

  • खराब वायरिंग को तुरंत बदला जाए।

  • मेडिकल उपकरणों की समय-समय पर सर्विसिंग हो।

  • कर्मचारियों को विद्युत सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

देश के विभिन्न हिस्सों से समय-समय पर अस्पतालों में बिजली संबंधी हादसों की खबरें सामने आती रही हैं। कहीं शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हुईं तो कहीं खराब उपकरणों के कारण मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।

हालांकि अधिकांश अस्पताल नियमित रखरखाव के माध्यम से ऐसे जोखिमों को कम करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता, वहां गंभीर हादसे होने की संभावना बनी रहती है।

जांच से सामने आएगी सच्चाई

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। यह जानना आवश्यक होगा कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या किसी स्तर पर मानवीय लापरवाही रही।

यदि जांच में बिजली उपकरणों की खराबी, रखरखाव में कमी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों और परिजनों को भी रहना चाहिए सतर्क

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों की जिम्मेदारी सबसे अधिक होती है, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों को भी कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए।

यदि किसी विद्युत उपकरण से चिंगारी, जलने की गंध, ढीला तार या असामान्य आवाज सुनाई दे तो तुरंत अस्पताल के कर्मचारियों को सूचना देनी चाहिए। किसी भी बिजली उपकरण को स्वयं छूने या ठीक करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

अस्पताल के बेड पर लेटे युवक को करंट लगने की घटना ने स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल वह स्थान होता है जहां लोग सुरक्षित इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि वहीं इस प्रकार की घटना हो जाए तो चिंता स्वाभाविक है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या प्रशासनिक चूक सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह घटना सभी अस्पतालों के लिए भी एक चेतावनी है कि बिजली सुरक्षा, उपकरणों के रखरखाव और मरीजों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

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