3000 KM दूर अचानक हुआ धमाका... जल उठा अमेरिकी गैस जहाज, क्या शुरू हो गया नया युद्ध?
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। भूमध्य सागर से आई एक नई घटना ने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है। मिस्र के दामियत्ता (Damietta) बंदरगाह पर बुधवार को हुए एक जोरदार विस्फोट के बाद दो बड़े गैस जहाजों में आग लग गई। शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना को संभावित ड्रोन हमले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मिस्र सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर बना दिया है।
इस विस्फोट के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पश्चिम एशिया का संघर्ष अब भूमध्य सागर तक पहुंच चुका है? क्या यह हमला यमन के हूती विद्रोहियों ने किया, या इसके पीछे ईरान समर्थित कोई नेटवर्क सक्रिय है? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा, लेकिन इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर नई आशंकाएं जरूर पैदा कर दी हैं।
दो बड़े गैस जहाज बने हादसे का शिकार
घटना में जिन दो जहाजों को नुकसान पहुंचा, उनमें पहला अमेरिकी कंपनी Energos Infrastructure के स्वामित्व वाला फ्लोटिंग गैस स्टोरेज टैंकर Energos Winter था। दूसरा जहाज ग्रीस की शिपिंग कंपनी GasLog द्वारा संचालित LNG कैरियर GasLog Salem था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बंदरगाह क्षेत्र में पहले तेज धमाके की आवाज सुनाई दी और उसके कुछ ही क्षण बाद दोनों जहाजों से धुएं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। बंदरगाह पर मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत आपातकालीन कार्रवाई शुरू की।
मची अफरा-तफरी, तुरंत लागू किया गया इमरजेंसी प्लान
मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि विस्फोट के बाद तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना लागू कर दी गई थी। फायर ब्रिगेड, समुद्री सुरक्षा बल और राहत टीमें कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गईं।
कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पा लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, जो राहत की बात मानी जा रही है।
आग बुझने के बाद दोनों जहाजों को बंदरगाह से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया ताकि किसी बड़े हादसे की संभावना को टाला जा सके। इसके साथ ही दामियत्ता पोर्ट के अन्य टर्मिनलों पर सामान्य संचालन बहाल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई।
ड्रोन हमले की आशंका क्यों जताई जा रही है?
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी Ambrey ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में दावा किया है कि कम से कम एक गैस जहाज को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया हो सकता है। समुद्री ट्रैकिंग से जुड़ी अन्य एजेंसियों ने भी शुरुआती विश्लेषण में ड्रोन हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है।
हालांकि Energos Infrastructure ने अपने बयान में कहा कि जहाज पर मौजूद सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और अभी तक यह निश्चित नहीं हो पाया है कि हमला वास्तव में ड्रोन से हुआ था या विस्फोट किसी अन्य कारण से हुआ।
यही वजह है कि जांच एजेंसियां तकनीकी साक्ष्यों, जहाजों के ब्लैक बॉक्स, सीसीटीवी फुटेज और रडार डेटा की गहन जांच कर रही हैं।
किस पर है शक?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह ड्रोन हमला था तो इसके पीछे कौन हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल तीन संभावनाओं पर चर्चा हो रही है—
हूती विद्रोही, जो पहले भी समुद्री जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं।
ईरान समर्थित कोई अन्य संगठन।
किसी तीसरे पक्ष द्वारा किया गया हमला, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव बढ़ाना हो सकता है।
अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
ट्रंप ने ईरान पर जताया शक
घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें घटना की पूरी जानकारी दे दी गई है।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि जांच में ईरान की भूमिका सामने आती है तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा।
हालांकि ट्रंप ने कोई प्रत्यक्ष सबूत सार्वजनिक नहीं किया और न ही अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक रूप से किसी देश को जिम्मेदार ठहराया है।
दूसरी ओर ईरान की तरफ से इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दामियत्ता बंदरगाह क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मिस्र का दामियत्ता बंदरगाह भूमध्य सागर के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में से एक माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का आयात और निर्यात होता है।
यह बंदरगाह स्वेज नहर के बेहद करीब स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है।
स्वेज नहर लाल सागर और भूमध्य सागर को जोड़ती है। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच होने वाला बड़ा समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
यदि यहां सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ते हैं तो इसका असर केवल मिस्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमध्य सागर में भी जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ता है तो LNG और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
बीते महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण कई शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने मार्ग बदल चुकी हैं।
यदि अब भूमध्य सागर भी असुरक्षित माना जाने लगे तो जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिससे—
माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
ऊर्जा कीमतों में उछाल आ सकता है।
वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
यूरोप और एशिया में गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
समुद्री सुरक्षा एजेंसियां हुईं सतर्क
घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने जहाज संचालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
जहाजों की निगरानी बढ़ा दी गई है और क्षेत्र में आने-जाने वाले व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं।
कई बीमा कंपनियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि यदि खतरा बढ़ता है तो समुद्री बीमा प्रीमियम में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या बढ़ेगा क्षेत्रीय संघर्ष?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि यह वास्तव में ड्रोन हमला था और इसके पीछे किसी संगठित समूह की भूमिका है, तो पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में भूमध्य सागर में हुई यह घटना कई देशों की सुरक्षा रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहना संभव नहीं है कि विस्फोट का वास्तविक कारण क्या था या इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।
मिस्र के दामियत्ता बंदरगाह पर हुए विस्फोट और दो गैस जहाजों में लगी आग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। शुरुआती रिपोर्टें संभावित ड्रोन हमले की ओर इशारा कर रही हैं, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और जांच जारी है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। लेकिन यदि भविष्य में ऐसे हमले बढ़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब मिस्र की जांच रिपोर्ट और अमेरिका सहित संबंधित देशों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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