कॉलेज पहुंचे तो खुला चौंकाने वाला राज! 7,000 से ज्यादा छात्र निकले HIV पॉजिटिव, सरकार में मची हलचल
कर्नाटक में युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे HIV संक्रमण के मामलों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के 7,000 से अधिक छात्र और युवा HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग, डिग्री और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में विशेष HIV जागरूकता, काउंसलिंग और स्वैच्छिक जांच शिविर आयोजित करने का बड़ा फैसला लिया है।
सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी छात्र को डराना या निशाना बनाना नहीं है, बल्कि युवाओं को HIV के बारे में सही जानकारी देना, समय रहते संक्रमण की पहचान करना और संक्रमित लोगों को इलाज से जोड़ना है। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र का HIV टेस्ट उसकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।
7,000 से अधिक छात्र और युवा पाए गए HIV पॉजिटिव
कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन सोसाइटी (KSAPS) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के बीच HIV संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के 7,000 से अधिक छात्र और युवा HIV पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता को और बढ़ा दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र में जागरूकता की कमी, असुरक्षित यौन संबंध, समय पर जांच न कराना और सामाजिक झिझक जैसी कई वजहें संक्रमण के बढ़ते मामलों के पीछे हो सकती हैं।
कॉलेजों में लगाए जाएंगे विशेष हेल्थ कैंप
बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त (एडेड) और निजी कॉलेजों में विशेष हेल्थ कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया है।
इन कैंपों में छात्रों को HIV से संबंधित जानकारी दी जाएगी, विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग की जाएगी और इच्छुक छात्रों की स्वैच्छिक HIV जांच भी कराई जाएगी।
सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल इंजीनियरिंग कॉलेजों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि डिग्री कॉलेजों सहित अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू किया जाएगा।
बिना अनुमति किसी का टेस्ट नहीं होगा
HIV जांच को लेकर कई तरह की आशंकाओं के बीच सरकार ने साफ किया है कि किसी भी छात्र पर जांच कराने का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार—
HIV टेस्ट पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
छात्र की स्पष्ट और सूचित सहमति आवश्यक होगी।
बिना अनुमति किसी भी छात्र का टेस्ट नहीं किया जाएगा।
जांच और रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों का विश्वास बनाए रखना और उन्हें बिना किसी डर के स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
KSAPS की सिफारिश के बाद लिया गया फैसला
यह महत्वपूर्ण निर्णय कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन सोसाइटी (KSAPS) की सिफारिश के बाद लिया गया है।
इसके तहत विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) तथा कॉलेजिएट एजुकेशन विभाग मिलकर कॉलेज परिसरों में इंटीग्रेटेड हेल्थ कैंप आयोजित करेंगे।
इन कैंपों में केवल HIV जांच ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, संक्रमण से बचाव के उपाय और जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल किए जाएंगे।
HIV संक्रमित लोगों की संख्या में कर्नाटक तीसरे स्थान पर
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) की Status of National AIDS & STD Response 2024 (Sankalak) रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक HIV संक्रमित लोगों की संख्या के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक—
राज्य में लगभग 2.60 लाख लोग HIV के साथ जीवन जी रहे हैं।
इनमें से लगभग 2.05 लाख लोग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) का इलाज प्राप्त कर रहे हैं।
अनुमान है कि करीब 54,000 लोगों को अब तक यह भी पता नहीं है कि वे HIV से संक्रमित हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच न होने के कारण कई लोग वर्षों तक संक्रमण के बारे में अनजान रहते हैं।
18 से 35 वर्ष के युवाओं में तेजी से बढ़े मामले
KSAPS के आंकड़ों के अनुसार 18 से 35 वर्ष की आयु वर्ग में HIV संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
2023-24 में इस आयु वर्ग में लगभग 44,500 मामले सामने आए थे।
2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 66,600 तक पहुंच गई।
यह वृद्धि स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता और जांच अभियान नहीं चलाए गए तो आने वाले वर्षों में संक्रमण के मामलों में और वृद्धि हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य डर नहीं, जागरूकता फैलाना
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य छात्रों में भय पैदा करना नहीं है।
सरकार चाहती है कि युवा HIV से जुड़े मिथकों और गलतफहमियों से बाहर निकलें तथा सही वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करें।
इसके लिए कॉलेजों में—
जागरूकता कार्यक्रम,
विशेषज्ञों के व्याख्यान,
स्वास्थ्य परामर्श,
स्वैच्छिक जांच,
गोपनीय काउंसलिंग
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
HIV क्या है?
HIV (Human Immunodeficiency Virus) एक ऐसा वायरस है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को कमजोर करता है।
यदि समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण आगे चलकर AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) में बदल सकता है।
हालांकि आधुनिक चिकित्सा के कारण आज HIV संक्रमित व्यक्ति नियमित इलाज लेकर लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकता है।
HIV कैसे फैलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार HIV मुख्य रूप से इन कारणों से फैल सकता है—
असुरक्षित यौन संबंध
संक्रमित रक्त चढ़ाने से
संक्रमित सुई या सिरिंज के उपयोग से
संक्रमित मां से गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान बच्चे में
वहीं HIV निम्न माध्यमों से नहीं फैलता—
साथ बैठने से
हाथ मिलाने से
गले मिलने से
भोजन साझा करने से
मच्छर के काटने से
एक ही शौचालय इस्तेमाल करने से
इसलिए संक्रमित व्यक्ति के प्रति भेदभाव करना उचित नहीं माना जाता।
समय पर जांच और इलाज सबसे जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV की जल्द पहचान होने पर मरीज को समय पर ART (Antiretroviral Therapy) शुरू कराई जा सकती है।
नियमित इलाज से—
वायरस को नियंत्रित रखा जा सकता है,
रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहती है,
संक्रमण का खतरा कम होता है,
मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
इसी कारण सरकार युवाओं को स्वैच्छिक जांच के लिए प्रेरित कर रही है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV से जुड़ी सामाजिक झिझक आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई लोग जांच कराने से डरते हैं क्योंकि उन्हें समाज में भेदभाव का भय रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने से छात्र सही जानकारी प्राप्त करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर बिना झिझक जांच कराने के लिए आगे आएंगे।
कर्नाटक में युवाओं के बीच बढ़ते HIV संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के 7,000 से अधिक छात्रों और युवाओं का HIV पॉजिटिव पाया जाना इस बात का संकेत है कि जागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कॉलेजों में स्वैच्छिक HIV जांच, काउंसलिंग और जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी छात्र की जांच उसकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जागरूकता, समय पर जांच और उपचार को प्राथमिकता दी जाए तो HIV संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और संक्रमित लोगों को स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिल सकती है।

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