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गौमूत्र एक्सपर्ट' बोलते ही फूटा सियासी विस्फोट! अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी से कह दी ऐसी बात, गूंज उठा पूरा लोकसभा

संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद अनुराग ठाकुर के बीच आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई। सदन में परीक्षा सुधार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी द्वारा की गई एक टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया। इसके बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने न केवल उस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया बल्कि गांधी परिवार पर भी तीखा हमला बोला।

यह पूरा विवाद प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका और उनके कुछ सार्वजनिक बयानों को लेकर सामने आया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच हुई इस नोकझोंक के बाद सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा भी देखने को मिला।

क्या है पूरा मामला?

लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार से जुड़ी समिति का जिक्र करते हुए आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि पर टिप्पणी की। उन्होंने उन्हें "गौमूत्र एक्सपर्ट" कहकर संबोधित किया। इसी टिप्पणी को भाजपा ने देश के एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक का अपमान बताया।

गौरतलब है कि प्रोफेसर वी. कामकोटि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित समिति के सदस्य हैं। इस समिति में उद्योग जगत के जाने-माने नाम नंदन नीलेकणि भी शामिल हैं। प्रोफेसर कामकोटि इससे पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), कंप्यूटर विज्ञान और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाते रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारतीय परंपराओं और गौमूत्र पर शोध संबंधी चर्चाओं में भी अपने विचार सार्वजनिक मंचों पर रखे हैं, जिन्हें लेकर पहले भी बहस होती रही है।

अनुराग ठाकुर ने दिया तीखा जवाब

प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने सदन में कहा कि कांग्रेस नेताओं को देश के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रोफेसर वी. कामकोटि का मजाक उड़ाया जा रहा है, उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रोफेसर कामकोटि आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ हैं और उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "आपके पूरे परिवार की डिग्रियां जोड़ दी जाएं तो भी उनके बराबर नहीं होंगी।"

उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया, जबकि विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया।

'भारत की परंपराओं का मजाक उड़ाती है कांग्रेस'

अपने भाषण के दौरान अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा उन विषयों का उपहास उड़ाती रही है, जिन पर आज दुनिया के कई वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कोई वैज्ञानिक यदि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कंप्यूटर विज्ञान का विशेषज्ञ है, तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह भारतीय ज्ञान परंपरा या पारंपरिक विषयों पर अध्ययन नहीं कर सकता। उनके अनुसार वैज्ञानिकों को विभिन्न विषयों पर शोध करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान को लेकर दुनिया में लगातार अनुसंधान हो रहा है, लेकिन कांग्रेस ऐसे विषयों पर व्यंग्य करती है।

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

अनुराग ठाकुर ने अपने भाषण के दौरान गांधी परिवार पर भी व्यक्तिगत राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी से अलग और अधिक संतुलित भाषा का इस्तेमाल करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि प्रियंका गांधी अधिक गंभीर और संयमित तरीके से अपनी बात रखेंगी, लेकिन आईआईटी मद्रास के निदेशक जैसे प्रतिष्ठित शिक्षाविद पर टिप्पणी करना उचित नहीं था।

अनुराग ठाकुर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि भाई-बहन दोनों की राजनीतिक शैली एक जैसी दिखाई देती है। उनके इस बयान पर विपक्षी सांसदों ने आपत्ति भी जताई।

प्रोफेसर वी. कामकोटि कौन हैं?

प्रोफेसर वी. कामकोटि देश के प्रमुख शिक्षाविदों और कंप्यूटर वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। वह आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं और कंप्यूटर विज्ञान, साइबर सुरक्षा, एम्बेडेड सिस्टम तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में उनका लंबा शैक्षणिक अनुभव रहा है।

इसके अलावा वे कई राष्ट्रीय समितियों और तकनीकी परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। हाल के वर्षों में भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और गौमूत्र से जुड़े उनके कुछ सार्वजनिक वक्तव्यों ने भी चर्चा को जन्म दिया था। इन्हीं बयानों के कारण वह समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

संसद में बढ़ती बयानबाजी पर उठे सवाल

लोकसभा में हुई इस घटना के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में गंभीर नीतिगत चर्चाओं के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियां और तीखी बयानबाजी लगातार बढ़ रही है। इससे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा कई बार पीछे छूट जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का सबसे बड़ा मंच है, जहां शिक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर गंभीर बहस की अपेक्षा की जाती है। हालांकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी नोकझोंक लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना बेहतर माना जाता है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

इस घटना के बाद भाजपा नेताओं ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं कांग्रेस की ओर से भी भाजपा के जवाब को अनावश्यक रूप से व्यक्तिगत और राजनीतिक हमला बताया गया।

दोनों दलों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कुछ लोगों ने वैज्ञानिकों के सम्मान की बात कही, जबकि कुछ ने संसद में नेताओं की भाषा और आचरण पर सवाल उठाए।

वैज्ञानिक शोध और परंपरा पर बहस

यह विवाद एक बार फिर उस बहस को सामने ले आया है कि आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कई विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विषय पर वैज्ञानिक शोध तथ्यों, परीक्षणों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए। वहीं किसी वैज्ञानिक के शोध या विचारों पर असहमति व्यक्त की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

लोकसभा में प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर हुई टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कड़ा पलटवार करते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखे आरोप लगाए। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद में भाषा की मर्यादा, वैज्ञानिकों के सम्मान और भारतीय परंपराओं पर चल रही राजनीतिक बहस को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया।

हालांकि इस मुद्दे पर दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर कायम हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अपेक्षा की जाती है कि विचारों का विरोध तथ्यों और तर्कों के आधार पर हो तथा व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचा जाए। संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर गरिमापूर्ण संवाद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

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