होंठ पर मामूली चोट के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा डेढ़ साल का मासूम... एनेस्थीसिया के बाद क्या हुआ, जिसने परिवार की दुनिया उजाड़ दी?
![]() |
| AI image |
कन्नूर (केरल): केरल के कन्नूर जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डेढ़ वर्षीय एक बच्चे के होंठ पर मामूली चोट लगने के बाद उसे इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि घाव पर टांके लगाने से पहले बच्चे को एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) दी गई, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। बाद में दूसरे अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद बच्चे के परिजनों ने चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं अस्पताल ने किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच समितियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
खेलते समय लगी थी मामूली चोट
मृतक बच्चे की पहचान देवांश शौरिया के रूप में हुई है, जो कन्नूर जिले के एरामम क्षेत्र का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, 5 जुलाई को खेलते समय उसके होंठ पर चोट लग गई थी। चोट ज्यादा गंभीर नहीं दिख रही थी, लेकिन परिजन एहतियात के तौर पर उसे पय्यनूर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।
डॉक्टरों ने बच्चे के होंठ पर टांके लगाने की सलाह दी और इसके लिए एनेस्थीसिया देने की बात कही। परिवार का आरोप है कि बेहोशी की दवा दिए जाने के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई।
एनेस्थीसिया के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों के मुताबिक, एनेस्थीसिया दिए जाने के कुछ ही समय बाद बच्चा बेहोश हो गया और उसकी स्थिति गंभीर हो गई। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे कन्नूर के एक दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों का कहना है कि मामूली चोट के इलाज के लिए अस्पताल ले जाए गए बच्चे की मौत की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
चिकित्सा लापरवाही का आरोप
बच्चे के पिता सूरज ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अंजलि पोडुवल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, यह केवल जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत या जांच एजेंसियों द्वारा आरोप सिद्ध होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
जिला स्तरीय मेडिकल समिति ने की जांच
घटना के बाद चिकित्सा लापरवाही के आरोपों की जांच के लिए जिला स्तर पर एक चिकित्सकीय समिति गठित की गई। बच्चे के पिता का दावा है कि समिति में पांच सदस्य शामिल थे।
उनके अनुसार, समिति के तीन सदस्यों ने इलाज में लापरवाही होने की राय व्यक्त की, जबकि एक सदस्य ने लापरवाही से इनकार किया। एक अन्य सदस्य ने तटस्थ राय दी।
हालांकि, समिति की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और अंतिम निर्णय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
राज्य स्तरीय समिति को भेजी गई रिपोर्ट
परिवार का कहना है कि जिला समिति की रिपोर्ट अब राज्य स्तरीय चिकित्सा समिति के पास भेज दी गई है। यह समिति पूरे मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई के संबंध में अपनी सिफारिश देगी।
बच्चे के पिता ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल यह जानना है कि आखिर ऐसी दुखद घटना कैसे हुई और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाए।
एसआईटी जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे के पिता ने केरल के गृह मंत्री से मुलाकात कर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष और तेज जांच होगी, तभी परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि वे तब तक अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ जाती।
परिवार ने यह भी मांग की है कि इलाज से जुड़े अन्य दो डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की जाए और यदि आवश्यक हो तो उन्हें भी मामले में शामिल किया जाए।
अस्पताल ने क्या कहा?
दूसरी ओर, संबंधित निजी अस्पताल ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
अस्पताल का कहना है कि एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चे को अचानक हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) हुआ था। अस्पताल के अनुसार, मेडिकल टीम ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया, बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया और बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजा गया।
अस्पताल का दावा है कि चिकित्सकों ने उपलब्ध चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक सभी कदम उठाए थे।
पुलिस की जांच जारी
पय्यनूर थाना पुलिस का कहना है कि यह मामला चिकित्सा लापरवाही से जुड़ा है, इसलिए विशेषज्ञों की राय बेहद महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की प्रक्रिया, डॉक्टरों के बयान, अस्पताल के दस्तावेज और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को शामिल किया जाएगा। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
चिकित्सा लापरवाही के मामलों में क्या होता है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा लापरवाही के मामलों में केवल मरीज की मृत्यु या इलाज के असफल होने से डॉक्टर को दोषी नहीं माना जा सकता। यह साबित करना आवश्यक होता है कि इलाज के दौरान स्वीकृत चिकित्सा मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ था और उसी के कारण नुकसान हुआ।
इसी कारण ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय समितियों की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परिवार को न्याय का इंतजार
देवांश की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है। माता-पिता का कहना है कि वे किसी के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं लड़ रहे, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की सच्चाई सामने आने से भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिल सकती है।
केरल के कन्नूर में डेढ़ वर्षीय देवांश शौरिया की मौत का मामला अब चिकित्सा जांच और कानूनी प्रक्रिया के केंद्र में है। एक ओर परिवार चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए एसआईटी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं अस्पताल सभी आरोपों से इनकार करते हुए कह रहा है कि बच्चे को एनेस्थीसिया के बाद अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ था और डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कोई टिप्पणी नहीं