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54 हजार लोगों को नहीं पता कि उनके शरीर में है HIV! रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले राज



देश में एचआईवी (HIV) संक्रमण को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक देश के उन राज्यों में शामिल है जहां सबसे अधिक लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह बताई गई है कि हजारों ऐसे लोग हैं जिन्हें यह तक पता नहीं कि वे HIV संक्रमित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और इलाज न होने की वजह से संक्रमण के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के साथ-साथ राज्य के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों की ओर से साझा किए गए आंकड़ों ने भी युवाओं और छात्रों के बीच HIV संक्रमण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, नियमित जांच और समय पर इलाज ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

देश में तीसरे स्थान पर कर्नाटक

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) की "स्टेटस ऑफ नेशनल एड्स एंड एसटीडी रिस्पॉन्स 2024" रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक देश के उन राज्यों में तीसरे स्थान पर है जहां HIV संक्रमित लोगों की संख्या सबसे अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में लगभग 2.60 लाख लोग HIV के साथ जीवन जी रहे हैं। इनमें से करीब 2.05 लाख मरीज एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) प्राप्त कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि हजारों संक्रमित लोग या तो उपचार से बाहर हैं या उन्हें अभी तक अपने संक्रमण की जानकारी ही नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि लगभग 54 हजार लोगों को यह पता ही नहीं है कि वे HIV पॉजिटिव हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां समय पर जांच को सबसे बड़ी प्राथमिकता मान रही हैं।

युवाओं में बढ़ रहा संक्रमण का खतरा

कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में HIV संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

डॉ. एडमंड फर्नान्डेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा जानकारी में दावा किया कि कर्नाटक में 7,000 से अधिक विद्यार्थी और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवा HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इस दावे के बाद कॉलेज परिसरों और शैक्षणिक संस्थानों में HIV टेस्टिंग, स्क्रीनिंग और काउंसलिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा अलग से नहीं की गई है।

क्यों जरूरी है समय पर HIV की जांच?

विशेषज्ञों का कहना है कि HIV से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति वर्षों तक बिना जानकारी के सामान्य जीवन जी सकता है और अनजाने में संक्रमण आगे भी फैल सकता है।

यदि समय रहते HIV की जांच हो जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए तो एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की मदद से वायरस को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इससे संक्रमित व्यक्ति लंबा और अपेक्षाकृत स्वस्थ जीवन जी सकता है तथा दूसरों में संक्रमण फैलने का जोखिम भी काफी कम हो जाता है।

HIV क्या है?

HIV यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस एक ऐसा वायरस है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) पर हमला करता है। यह मुख्य रूप से उन कोशिकाओं को प्रभावित करता है जो संक्रमण से शरीर की रक्षा करती हैं।

यदि HIV का समय पर इलाज न किया जाए तो धीरे-धीरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है और अंततः यह AIDS (एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम) में बदल सकता है।

AIDS वह अवस्था है जिसमें शरीर सामान्य संक्रमणों और कई गंभीर बीमारियों से भी प्रभावी ढंग से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।

HIV कैसे फैलता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार HIV केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में फैलता है।

संक्रमण के प्रमुख कारण हैं—

  • असुरक्षित यौन संबंध (Unprotected Sex)

  • संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग

  • संक्रमित रक्त चढ़ाना

  • गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से बच्चे में संक्रमण (यदि आवश्यक उपचार न मिले)

इन बातों से HIV नहीं फैलता

HIV को लेकर समाज में आज भी कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि HIV—

  • हाथ मिलाने से नहीं फैलता।

  • गले लगाने से नहीं फैलता।

  • साथ बैठकर खाना खाने से नहीं फैलता।

  • एक ही बर्तन इस्तेमाल करने से नहीं फैलता।

  • छींकने या खांसने से नहीं फैलता।

  • सामान्य सामाजिक संपर्क से संक्रमण नहीं होता।

इसीलिए HIV संक्रमित लोगों के साथ भेदभाव करना न केवल गलत है बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों के भी विपरीत है।

HIV के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?

संक्रमण के लगभग 2 से 4 सप्ताह बाद कुछ लोगों में शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं—

  • बुखार

  • ठंड लगना

  • शरीर पर लाल चकत्ते

  • रात में अत्यधिक पसीना आना

  • मांसपेशियों में दर्द

  • गले में दर्द

  • लिम्फ नोड्स का सूजना

  • मुंह में छाले

  • अत्यधिक थकान

हालांकि, कई संक्रमित लोगों में शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं भी दिखाई देते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर HIV की पहचान संभव नहीं है। इसकी पुष्टि केवल जांच से ही की जा सकती है।

HIV के तीन चरण

विशेषज्ञ HIV संक्रमण को सामान्यतः तीन चरणों में बांटते हैं—

1. एक्यूट HIV संक्रमण

यह शुरुआती चरण होता है जिसमें फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

2. क्रोनिक HIV

इस चरण में वायरस धीरे-धीरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता रहता है। कई लोगों में इस दौरान लंबे समय तक कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखाई देते।

3. AIDS

यह HIV संक्रमण का अंतिम चरण होता है, जब रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है और व्यक्ति बार-बार विभिन्न संक्रमणों का शिकार होने लगता है।

AIDS के संभावित लक्षण

AIDS की अवस्था में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं, जैसे—

  • शरीर पर लगातार लाल चकत्ते या रैशेज

  • तेजी से वजन घटना (HIV Wasting Syndrome)

  • जीभ पर सफेद परत (Oral Thrush)

  • बार-बार संक्रमण होना

  • लंबे समय तक बुखार रहना

  • अत्यधिक कमजोरी

  • याददाश्त कमजोर होना

  • अवसाद या मानसिक भ्रम

  • महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी बदलाव

  • बार-बार यीस्ट संक्रमण

  • पुरुषों में जननांगों से जुड़ी समस्याएं

इन लक्षणों का मतलब हमेशा HIV या AIDS होना नहीं है। ऐसे लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी संदेह की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच कराना जरूरी है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि HIV अब पहले की तरह लाइलाज बीमारी नहीं मानी जाती। आधुनिक दवाओं और नियमित इलाज की मदद से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकता है।

इसके लिए सबसे जरूरी है—

  • सुरक्षित व्यवहार अपनाना।

  • जोखिम होने पर समय पर HIV जांच कराना।

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज शुरू करना।

  • HIV संक्रमित लोगों के प्रति भेदभाव न करना।

  • युवाओं और छात्रों में वैज्ञानिक जानकारी और जागरूकता बढ़ाना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर जांच, सही इलाज और जागरूकता पर लगातार काम किया जाए तो HIV संक्रमण को नियंत्रित करने और नए मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की जा सकती है।

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