जिसे मृत घोषित कर दिया गया था, वह अचानक बेस कैंप के पास दिखा; फिर सामने आई हैरान करने वाली कहानी
हाइलाइट्स
एवरेस्ट चमत्कार ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, 6 दिन बाद जिंदा मिले दावा शेरपा।
ऑक्सीजन खत्म होने के बाद भी बर्फ और चॉकलेट के सहारे जिंदा रहे नेपाली गाइड।
परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी तक शुरू कर दी थी।
हिमस्खलन और गहरी दरार में फंसने के बावजूद नहीं हारी उम्मीद।
बचाव टीम ने बेस कैंप के पास देखा तो सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई।
दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर हर साल सैकड़ों पर्वतारोही अपनी किस्मत आजमाते हैं। लेकिन कभी-कभी यहां ऐसी घटनाएं घटती हैं जो इंसानी हौसले और जीवटता की नई मिसाल बन जाती हैं। इस बार एक ऐसा ही एवरेस्ट चमत्कार सामने आया है जिसने न केवल नेपाल बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है।
57 वर्षीय अनुभवी नेपाली गाइड दावा शेरपा को छह दिनों तक लापता रहने के बाद जीवित बचा लिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उनके परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी तक शुरू कर दी थी। लेकिन फिर जो हुआ, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।
ऑक्सीजन खत्म हुई और शुरू हुआ मौत से संघर्ष
यह एवरेस्ट चमत्कार मई 2026 के अंत में शुरू हुआ, जब दावा शेरपा एवरेस्ट फतह करने के बाद वापस लौट रहे थे। वापसी के दौरान उनका ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया और वह अपनी टीम से पीछे रह गए।
शुरुआत में माना गया कि वह लापता हो गए हैं, लेकिन दावा शेरपा का कहना है कि वह रास्ता नहीं भटके थे। असल समस्या ऑक्सीजन खत्म होने के बाद पैदा हुई, जब उनका शरीर आगे बढ़ने में असमर्थ होने लगा।
उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें एहसास हो गया था कि स्थिति बेहद गंभीर है। ऊंचाई, ठंड और ऑक्सीजन की कमी मिलकर मौत का जाल बुन रही थीं।
“मुझे लगा था अब मैं नहीं बचूंगा”
इस एवरेस्ट चमत्कार की सबसे भावुक कड़ी वह बयान है जो दावा शेरपा ने अस्पताल पहुंचने के बाद दिया।
उन्होंने कहा, "मुझे बिल्कुल नहीं लगा था कि मैं जिंदा बच पाऊंगा। मुझे लग रहा था कि मेरी मौत यहीं हो जाएगी।"
एवरेस्ट के डेथ ज़ोन में कई दिनों तक फंसे रहना लगभग असंभव माना जाता है। वहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और शरीर धीरे-धीरे जवाब देने लगता है।
लेकिन दावा शेरपा ने हार नहीं मानी।
बर्फ और चॉकलेट बनी जिंदगी का सहारा
इस एवरेस्ट चमत्कार का सबसे अविश्वसनीय हिस्सा यह है कि दावा शेरपा छह दिनों तक कैसे जीवित रहे।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दो दिनों तक उन्होंने कुछ नहीं खाया। बाद में उन्होंने बर्फ चबाकर अपनी प्यास बुझाने की कोशिश की।
हालांकि सख्त बर्फ चबाने से उनके दांतों में दर्द होने लगा, लेकिन जीवित रहने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
जेब में मिली चॉकलेट बनी जीवनरक्षक
तीसरे दिन उन्हें अपनी जेब में कुछ चॉकलेट मिली। वही चॉकलेट उनके लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हुई।
दावा शेरपा ने बताया कि उन्होंने बर्फ को पिघलाकर पानी बनाया और चॉकलेट खाकर शरीर को ऊर्जा देने की कोशिश की। यही छोटी-सी चीज बाद में इस एवरेस्ट चमत्कार का अहम कारण बन गई।
गहरी दरार में फंस गए थे दावा शेरपा
जानकारी के अनुसार नीचे उतरते समय दावा शेरपा एक गहरी बर्फीली दरार में गिर गए थे। वहां वह करीब ढाई दिनों तक फंसे रहे।
यहां से निकलना लगभग नामुमकिन लग रहा था।
हिमस्खलन ने दी नई उम्मीद
आमतौर पर हिमस्खलन को खतरे के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस एवरेस्ट चमत्कार में हिमस्खलन उम्मीद की किरण बन गया।
दावा शेरपा के अनुसार एक हिमस्खलन के बाद दरार के भीतर बर्फ भरने लगी। इससे उन्हें ऊपर चढ़ने का मौका मिला।
उन्होंने कहा, "मैंने ऊपर देखा और पहली बार महसूस किया कि शायद मैं यहां से बाहर निकल सकता हूं।"
रस्सी मिली और बदल गई किस्मत
दरार से बाहर निकलने के बाद दावा शेरपा को पर्वतारोहण के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली रस्सियां दिखाई दीं।
यह रस्सियां उनके लिए जीवनरेखा साबित हुईं।
इस एवरेस्ट चमत्कार के दौरान उन्होंने धीरे-धीरे रस्सियों की मदद से नीचे उतरना शुरू किया। रास्ते में एक और हिमस्खलन आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
पूरी रात चलते हुए वह आखिरकार बेस कैंप के करीब पहुंच गए।
एक सप्ताह बाद दिखा पहला इंसान
दावा शेरपा के अनुसार लगभग एक सप्ताह तक उन्होंने किसी इंसान को नहीं देखा था।
जब वह बेस कैंप के नजदीक पहुंचे तो उन्हें कुछ लोग दिखाई दिए जो पर्वत पर जमा कचरा साफ करने जा रहे थे।
यही लोग इस एवरेस्ट चमत्कार के प्रत्यक्ष गवाह बने।
उन्होंने तुरंत दावा शेरपा को पहचान लिया और नीचे लाने की व्यवस्था की। इसके बाद हेलिकॉप्टर से उन्हें काठमांडू पहुंचाया गया।
परिवार ने छोड़ दी थी उम्मीद
इस एवरेस्ट चमत्कार का सबसे भावनात्मक पहलू उनके परिवार से जुड़ा है।
दावा शेरपा की पत्नी दामू शेरपा ने बताया कि बचाव अभियान चला रही टीम ने जब कहा कि उन्हें ढूंढ पाना संभव नहीं है, तब परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी।
अंतिम संस्कार की तैयारी तक हो गई थी
परिवार ने दावा शेरपा को मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी।
लेकिन जब अचानक उनके जीवित मिलने की खबर आई तो किसी को विश्वास नहीं हुआ।
दामू शेरपा ने कहा, "जब मैंने उन्हें देखा तो मेरी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। हमें बताया गया था कि वे कभी वापस नहीं आएंगे।"
डॉक्टरों ने क्या बताया?
काठमांडू के अस्पताल में भर्ती दावा शेरपा फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
इस एवरेस्ट चमत्कार के बावजूद उनके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा है।
फ्रॉस्टबाइट और डिहाइड्रेशन की समस्या
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक अत्यधिक ठंड में रहने के कारण उन्हें फ्रॉस्टबाइट हुआ है। उनकी कुछ उंगलियों की त्वचा बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इसके अलावा शरीर में पानी की भारी कमी और कुछ हड्डियों में चोट भी पाई गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
एवरेस्ट पर मौत का इतिहास
यह एवरेस्ट चमत्कार इसलिए भी खास है क्योंकि एवरेस्ट दुनिया के सबसे खतरनाक पर्वतों में गिना जाता है।
1920 के दशक से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद अब तक 300 से अधिक लोग एवरेस्ट पर अपनी जान गंवा चुके हैं।
सिर्फ इस वर्ष के पर्वतारोहण सीज़न में पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
ऐसे में छह दिनों तक बिना पर्याप्त भोजन, पानी और ऑक्सीजन के जीवित रहना किसी असाधारण उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा।
विशेषज्ञों ने कहा- यह चमत्कार से कम नहीं
खोज अभियान का नेतृत्व कर रही संस्था 8K Expeditions के कार्यकारी निदेशक पेम्बा शेरपा ने इसे "खुद को बचाने की अद्भुत क्षमता" का परिणाम बताया।
उनके अनुसार दावा शेरपा ने जिस तरह हर मुश्किल का सामना किया, वह असाधारण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एवरेस्ट चमत्कार केवल भाग्य नहीं, बल्कि अनुभव, मानसिक दृढ़ता और जीवित रहने की प्रबल इच्छा का भी परिणाम है।
दावा शेरपा की कहानी इंसानी जिजीविषा का अद्भुत उदाहरण है। जिस व्यक्ति को मृत मान लिया गया था, जिसने छह दिन तक मौत को बेहद करीब से देखा, वही व्यक्ति आखिरकार जिंदा लौट आया।
यह एवरेस्ट चमत्कार आने वाले वर्षों तक पर्वतारोहण की दुनिया में याद रखा जाएगा। बर्फ, भूख, ऑक्सीजन की कमी, हिमस्खलन और अकेलेपन के बीच भी उम्मीद की लौ जलाए रखने वाले दावा शेरपा ने साबित कर दिया कि जब तक हौसला जिंदा है, तब तक चमत्कार भी संभव हैं।

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